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Kaithal News: फसल खरीद शुरू न होने से किसान परेशान

Thu, 26 Sep 2024 04:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 26 Sep 2024 04:50 AM IST
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Farmers upset due to crop procurement not starting
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल/कलायत। अनाज मंडियों में धान पहुंचने लगा है लेकिन खरीद शुरू न होने से किसान परेशान हो रहे हैं। दूसरी ओर उनसे धान को सुखाकर लाने के लिए कहा जा रहा है ताकि वे बिक्री के समय किसी भी प्रकार की असुविधा से बच सकें।

कलायत के मार्केट कमेटी सचिव अरविंद श्योकंद ने बताया किबताया की अनाज मंडी में किसानों की सुविधा के लिए बिजली, पानी व बरसाती पानी के निकास आदी की सभी सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने धान को सुखा कर ही लाएं।
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उन्होंने बताया कि अनाज मंडी में सबसे बड़ी समस्या फसल डालने की आती है। सीजन जब पूरे यौवन पर होता है तो किसानों के सामने फसल डालने के लिए स्थान न होना सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।
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इस समस्या के बारे सचिव ने बताया की विभाग की पहली प्राथमिकता पक्की मंडी में फसल डालने की रहेगी। यदि अपेक्षाकृत ज्यादा आवक के कारण मंडी में जगह की दिक्कत आती है तो वैकल्पिक मंडी में फसल डलवाई जाएगी। इससे न केवल फसल को सुरक्षित रखा जा सकेगा बल्कि सीजन के दौरान लगने वाले जाम की समस्या का भी निवारण होगा।

गौरतलब है कि कलायत में लंबे समय से अतिरिक्त मंडी की सुविधा देने की मांग सरकार के समक्ष उठाई जा रही है। सरकार ने 40 एकड़ से अधिक रकबे में अतिरिक्त मंडी काटने का निर्णय पूर्व में लिया था लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़ा मामला न्यायालय में चले जाने के कारण त्वरित तौर से भूमि एक्वायर नहीं हो पाई।

इस प्रकार की पेचिदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त मंडी के निर्णय को वापिस ले लिया। हालांकि कुछ समय पहले किसानों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर डाले गए केसों को भी वापिस ले लिया था। शासन-प्रशासन और किसानों में समय पर तालमेल न होने के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।


गौरतलब है कि किसानों की इस समस्या के दो बड़े कारण हैं, जिनमें सबसे पहला तो एमएसपी पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होना। फिलहाल इन किस्मों में नमी की मात्रा काफी ज्यादा मिल रही है, जिस कारण व्यापारी प्राइवेट खरीद करते समय काफी कम रेट लगा रहा है। प्राइवेट तौर पर व्यापारी नमी का कट लगाकर 1700 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे हैं। कई किसान बेच भी नहीं रहे हैं।
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