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कैथल से शुरू होगा किसान आंदोलन
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:12 AM IST
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26 फरवरी से भारतीय किसान यूनियन कैथल के हुडा मैदान से अपने आंदोलन का आगाज करेगी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने सहित किसानों के कर्ज माफी की मांग को लेकर हुडा मैदान में आयोजित होने वाली रैली में किसानों ने करो या मरो आंदोलन शुरू करने का एलान किया है।
यहां मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में किसान नेता प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढुुनी, किसान संघर्ष समिति के प्रधान सुरेश कौथ ने कहा कि किसान 26 फरवरी को दो-दो कंबल और दो-दो जोड़े कपड़े के साथ लेकर आएं। केवल धरना देकर या भाषण देकर घर नहीं जाएंगे जरूरत पड़ी तो रेल व बस भी रोक देंगे।
यह आंदोलन देश के इतिहास में करो या मरो का आंदोलन होगा। किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन की केवल दो मांगें हैं। एक तो स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करना, दूसरा किसानों के कर्ज माफ करना। भारतीय किसान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि जब सरकार डिफाल्टर इंडस्ट्रीज के मालिकों कर्जे माफ कर सकती है, कारपोरेट जगत से इतना निवेश कर रही है, तो किसानों के कर्जे क्यों नहीं माफ किए जा रहे हैं।
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नेताओं ने कहा कि आंदोलन के बारे में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, कृषि मंत्री धनखड़ व प्रधानमंत्री को पत्र लिख दिया है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र व भाषणों में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। विपक्ष में रहते हुए भाजपा नेताओं ने किसानों के पक्ष में प्रदर्शन किया था लेकिन वोट लेने के बाद धोखा दिया।
गिरफ्तारी हुई तो भी धरनास्थल तक जरूर पहुंचे किसान
प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अगर उनके पदाधिकारियों को सरकार गिरफ्तार कर लेती है तो भी वह धरनास्थल पर पहुंचें और सरकार की किसान विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब दें। इस अवसर पर होशियार सिंह प्यौदा, सुलतान ग्योंग, सूरजभान सेगा, सुरजीत नरड़, राजपाल उझाना, जगबीर प्यौदा, चांद प्यौदा मौजूद रहे।
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यहां मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में किसान नेता प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढुुनी, किसान संघर्ष समिति के प्रधान सुरेश कौथ ने कहा कि किसान 26 फरवरी को दो-दो कंबल और दो-दो जोड़े कपड़े के साथ लेकर आएं। केवल धरना देकर या भाषण देकर घर नहीं जाएंगे जरूरत पड़ी तो रेल व बस भी रोक देंगे।
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यह आंदोलन देश के इतिहास में करो या मरो का आंदोलन होगा। किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन की केवल दो मांगें हैं। एक तो स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करना, दूसरा किसानों के कर्ज माफ करना। भारतीय किसान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि जब सरकार डिफाल्टर इंडस्ट्रीज के मालिकों कर्जे माफ कर सकती है, कारपोरेट जगत से इतना निवेश कर रही है, तो किसानों के कर्जे क्यों नहीं माफ किए जा रहे हैं।
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नेताओं ने कहा कि आंदोलन के बारे में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, कृषि मंत्री धनखड़ व प्रधानमंत्री को पत्र लिख दिया है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र व भाषणों में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। विपक्ष में रहते हुए भाजपा नेताओं ने किसानों के पक्ष में प्रदर्शन किया था लेकिन वोट लेने के बाद धोखा दिया।
गिरफ्तारी हुई तो भी धरनास्थल तक जरूर पहुंचे किसान
प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अगर उनके पदाधिकारियों को सरकार गिरफ्तार कर लेती है तो भी वह धरनास्थल पर पहुंचें और सरकार की किसान विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब दें। इस अवसर पर होशियार सिंह प्यौदा, सुलतान ग्योंग, सूरजभान सेगा, सुरजीत नरड़, राजपाल उझाना, जगबीर प्यौदा, चांद प्यौदा मौजूद रहे।