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Kaithal News: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का प्रदर्शन
Fri, 01 May 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 01 May 2026 12:52 AM IST
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मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते किसान। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) की जिलास्तरीय बैठक जिला सचिवालय पार्क में जिला अध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसमें सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। बैठक के बाद किसानों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रस्तावित डील को रद्द करने की मांग उठाई।
युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना एडवोकेट, प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर चहल नरड और प्रदेश उपाध्यक्ष चमकौर सिंह चीका के नेतृत्व में किसानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बैठक का संचालन युवा जिलाध्यक्ष विक्रम दुसैण और नरेंद्र मागो माजरी ने किया।
विक्रम कसाना एडवोकेट ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील देश के किसानों और खेत मजदूरों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में जीरो कस्टम ड्यूटी पर लाने की तैयारी है, जिससे भारतीय किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था, और यह डील अमेरिकी किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई प्रतीत होती है।
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किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले तीन कृषि कानूनों के जरिए खेती को कॉर्पोरेट के हवाले करने की कोशिश की गई थी और अब इस तरह की डील के माध्यम से किसानों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया।
जिला अध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल और प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर चहल नरड ने कहा कि संगठन लंबे समय से किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के संभावित दुष्प्रभावों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई जाएगी, क्योंकि इससे भारतीय कृषि व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में खेती परिवार का आधार है, जबकि अमेरिका में यह व्यवसाय है। उनका कहना था कि बीज बिल लागू होने से बड़ी कंपनियों का एकाधिकार बढ़ेगा और किसान महंगे बीजों पर निर्भर हो जाएंगे।
इस अवसर पर सुभाष भागल, केवल सिंह सिद्ध, रणधीर बरसाना, पिरथी कौल, भीम खनौदा, सुभाष मास्टर, मोनी सिकंदरखेड़ी, किदनर ठेकेदार, गुरमुख फरल, कृष्ण मालखेड़ी, बहादुर गोरसी, सतबीर मुदडी और ओमप्रकाश बरसाना सहित आदि किसान उपस्थित रहे।
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कैथल। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) की जिलास्तरीय बैठक जिला सचिवालय पार्क में जिला अध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसमें सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। बैठक के बाद किसानों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रस्तावित डील को रद्द करने की मांग उठाई।
युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना एडवोकेट, प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर चहल नरड और प्रदेश उपाध्यक्ष चमकौर सिंह चीका के नेतृत्व में किसानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बैठक का संचालन युवा जिलाध्यक्ष विक्रम दुसैण और नरेंद्र मागो माजरी ने किया।
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विक्रम कसाना एडवोकेट ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील देश के किसानों और खेत मजदूरों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में जीरो कस्टम ड्यूटी पर लाने की तैयारी है, जिससे भारतीय किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था, और यह डील अमेरिकी किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई प्रतीत होती है।
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किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले तीन कृषि कानूनों के जरिए खेती को कॉर्पोरेट के हवाले करने की कोशिश की गई थी और अब इस तरह की डील के माध्यम से किसानों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया।
जिला अध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल और प्रदेश उपाध्यक्ष महावीर चहल नरड ने कहा कि संगठन लंबे समय से किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के संभावित दुष्प्रभावों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई जाएगी, क्योंकि इससे भारतीय कृषि व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में खेती परिवार का आधार है, जबकि अमेरिका में यह व्यवसाय है। उनका कहना था कि बीज बिल लागू होने से बड़ी कंपनियों का एकाधिकार बढ़ेगा और किसान महंगे बीजों पर निर्भर हो जाएंगे।
इस अवसर पर सुभाष भागल, केवल सिंह सिद्ध, रणधीर बरसाना, पिरथी कौल, भीम खनौदा, सुभाष मास्टर, मोनी सिकंदरखेड़ी, किदनर ठेकेदार, गुरमुख फरल, कृष्ण मालखेड़ी, बहादुर गोरसी, सतबीर मुदडी और ओमप्रकाश बरसाना सहित आदि किसान उपस्थित रहे।