{"_id":"6acbecf3a2f77f89de07a10f","slug":"farmers-grain-heaps-submerged-in-rainwater-at-dhand-grain-market-due-to-lack-of-lifting-kaithal-news-c-245-1-kht1007-156396-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: ढांड अनाज मंडी में निकासी नहीं होने से बारिश के पानी में डूबी किसानों की ढेरियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: ढांड अनाज मंडी में निकासी नहीं होने से बारिश के पानी में डूबी किसानों की ढेरियां
विज्ञापन
11 ढांड 01 विस्तार अनाज मंडी में पानी में डूबी हुई बोरियां तथा धान की ढेरियां।
ढांड। ढांड और आसपास के क्षेत्र में हुई बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई, वहीं अनाज मंडियों में खुले में पड़ी धान की ढेरियां पानी में डूब गईं। विस्तार अनाज मंडी में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गेट पर करीब डेढ़ फीट तक पानी जमा हो गया है। ऐसे में किसानों को फसल खराब होने से भारी आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है। किसानों का कहना है कि पानी में भीगने से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। इससे उन्हें फसल बेचने में परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
नई खरीद नीति पर उठाए सवाल
किसान नरेश कुमार, दिनेश कुमार, बलजीत, मदन और प्रदीप ने आरोप लगाया कि सरकार की नई खरीद नीति के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद कर ली जाती, तो उन्हें इस तरह खुले में फसल रखने की नौबत नहीं आती और बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बारिश से खराब हुई धान की फसल का उचित आंकलन करवाया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए। साथ ही मंडियों में पानी निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें।
जगह नहीं होने पर खेतों में डाला गया था धान
अनाज मंडियों में जगह न मिलने के कारण किसानों ने बिक्री के लिए धान को ढांड अनाज मंडी के चारों ओर खेतों में डाला हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है जिनकी धान की ढेरियां खेतों में पड़ी हुई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नई खरीद नीति पर उठाए सवाल
किसान नरेश कुमार, दिनेश कुमार, बलजीत, मदन और प्रदीप ने आरोप लगाया कि सरकार की नई खरीद नीति के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद कर ली जाती, तो उन्हें इस तरह खुले में फसल रखने की नौबत नहीं आती और बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बारिश से खराब हुई धान की फसल का उचित आंकलन करवाया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए। साथ ही मंडियों में पानी निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें।
विज्ञापन
जगह नहीं होने पर खेतों में डाला गया था धान
अनाज मंडियों में जगह न मिलने के कारण किसानों ने बिक्री के लिए धान को ढांड अनाज मंडी के चारों ओर खेतों में डाला हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है जिनकी धान की ढेरियां खेतों में पड़ी हुई हैं।

11 ढांड 01 विस्तार अनाज मंडी में पानी में डूबी हुई बोरियां तथा धान की ढेरियां।
विज्ञापन