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Kaithal News: सरकारी खरीद में देरी और भाव गिरने से किसान नाराज

Mon, 23 Sep 2024 08:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 23 Sep 2024 08:04 AM IST
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Farmers angry due to delay in government procurement and fall in prices
कैथल। सरकारी खरीद में देरी के चलते अब किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा किसानों को पिछले वर्ष की अपेक्षा बेहद कम दाम मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों में काफी रोष है। रविवार को 1509 किस्म के धान का भाव फिर से घट गया और पीआर किस्म के धान की निजी खरीद भी महज 1800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से हो पाई है। वहीं 1509 किस्म के धान का भाव 2965 रुपये प्रति क्विंटल से 2700 रुपये पर पहुंच गया है। ऐसे में किसानों को 1509 किस्म के धान में 700 तो पीआर किस्म के धान में 500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।
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किसानों के अनुसार पिछले साल पीआर किस्म का सरकारी भाव 2350 और 1509 का 3500 रुपये प्रति क्विंटल रहा था। बता दें कि सरकारी खरीद शुरू न होने के चलते इस समय धान की निजी खरीद ही हो पा रही है। वहीं, शुरूआत में इस किस्म के धान का भाव 3115 रुपये प्रति क्विंटल मिला था, लेकिन अब लगातार इस भाव गिर रहा है। जिससे नई अनाज मंडी में आने वाले किसानों को मायूस होना पड़ रहा है।
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यह बोले किसान नेता-
धान की सरकारी खरीद शुरू करवाने की मांग पर दो दिन पहले ही डीसी को सीएम के नाम एक ज्ञापन सौंपा था। उम्मीद थी कि संबंधित विभाग 23 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। ऐसे में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि सरकार ने अपने फैसले को जल्द ही नहीं बदला तो अगले दो से तीन दिन में बैठक कर बड़ा निर्णय लिया जाएगा। हड़ताल पर जाना पड़ा तो भी पीछे नहीं हटेंगे।
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- सतपाल दिल्लोवाली, किसान नेता, भारतीय किसान यूनियन, टिकैत गुट, कैथल।

किसान हो रहा हताश व परेशान-
नई अनाज मंडी में 1509 व पीआर किस्म का धान बेचने आए कपिल, बनी सिंह राणा, सुरेश व महेंद्र ने बताया कि वह रविवार को अनाज मंडी में धान बेचने के लिए आए थे, लेकिन यहां पर भाव काफी कम मिल रहे है। किसानों को इस बार धान के भाव में 1200 से 1500 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समय चुनाव है तो इसका मतलब यह नहीं की सरकार प्रक्रिया में ही बदलाव किया जाए। ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। संबंधित विभाग को जल्द ही धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया को शुरू करना चाहिए। नहीं तो किसान एक बड़ा निर्णय लेने के लिए मजबूर होंगे।

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