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Kaithal News: सीवन में स्वर्गद्वार तीर्थ का भी नहीं हो पाया है जीर्णोद्धार
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अमित तनेजा
सीवन, कैथल। नगर का स्वर्गद्वार मंदिर एवं तीर्थ लोगों की आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद स्वर्गद्वार तीर्थ का भी जीर्णोद्धार नहीं हो पाया है। तीर्थ का काफी महत्व होने के बावजूद इसकी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। स्वर्गद्वार मंदिर के तालाब पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां पर रोजाना ही भक्त आ कर पूजा अर्चना करते हैं और माथा टेकते हैं। नगर का यह मंदिर 111 वर्ष पुराना है। यह मंदिर कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि के अंदर आता है। कुरुक्षेत्र का अपना महत्व है। कहा गया है कि यदि कुरुक्षेत्र की वायु द्वारा उड़ाया गया धूल का कण यदि किसी महापातकी को भी छू जाए तो वह परम गति को प्राप्त हो जाता है। वामन पुराण में कुरुक्षेत्र के सात वनों का स्पष्ट वर्णन उपलब्ध है।
ऐसा प्रतीत होता है कि यही शीतवन से हो कर परवर्ती काल में सीतवन और आज का सीवन के नाम से विख्यात हो गया। वामन पुराण में इस तीर्थ को मातृ तीर्थ के पश्चात रखा गया है। लोक प्रचलित परंपरा इसे माता सीता से संबंधित मानती है। प्रचलित विश्वास के अनुसार माता सीता इसी स्थान पर धरती में समा गई थी इसलिए इस तीर्थ को स्वर्ग द्वार के नाम से भी जाना जाता है।
इस तीर्थ का उल्लेख महाभारत एवं वामन पुराण के अतिरिक्त पद्म पुराण, ब्रह्म पुराण, कूर्म पुराण, नारद पुराण तथा अग्नि पुराण में भी पाया जाता है। महाभारत के अनुसार नियताहारी एवं जितेन्द्रिय मनुष्य को स्वर्गद्वार में जाना चाहिए जहां जा कर वह स्वर्ग लोक होते हुए ब्रह्मलोक को जाता है। नारद पुराण के अनुसार चैत्र मास की चतुर्दशी को इस तीर्थ में स्नान करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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यह बोले श्रद्धालु
महंत विनोद नौटियाल ने बताया कि नगर का यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। यहां पर रोजाना श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं। साल में कई बार यहां पर भंडारे आदि का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता के दरबार की मान्यता तो दूर दूर तक है और यहां मन्दिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से सीस नवा कर मन्नत मांगते हैं उनकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। मन्दिर के अन्दर माता रानी के दरबार के साथ साथ श्री राम दरबार और शिवाला भी स्थित है। यहां पर भक्त बड़े श्रद्धा भाव से आते हैं। मन्दिर की याती दूर दूर तक फैली है।
मंदिर के भक्त ऋषिकेश शर्मा ने बताया कि वह रोजाना मन्दिर में आते हैं। यहां पर जो भी भक्त सच्चे मन से मुराद मांगते हैं उनकी वह मुराद अवश्य पूरी होती है। नवरात्र में तो भक्तों की सं या बहुत ही बढ़ जाती है। माता रानी सबकी मनोकामना पुरी करती है।
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सीवन, कैथल। नगर का स्वर्गद्वार मंदिर एवं तीर्थ लोगों की आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद स्वर्गद्वार तीर्थ का भी जीर्णोद्धार नहीं हो पाया है। तीर्थ का काफी महत्व होने के बावजूद इसकी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। स्वर्गद्वार मंदिर के तालाब पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां पर रोजाना ही भक्त आ कर पूजा अर्चना करते हैं और माथा टेकते हैं। नगर का यह मंदिर 111 वर्ष पुराना है। यह मंदिर कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि के अंदर आता है। कुरुक्षेत्र का अपना महत्व है। कहा गया है कि यदि कुरुक्षेत्र की वायु द्वारा उड़ाया गया धूल का कण यदि किसी महापातकी को भी छू जाए तो वह परम गति को प्राप्त हो जाता है। वामन पुराण में कुरुक्षेत्र के सात वनों का स्पष्ट वर्णन उपलब्ध है।
ऐसा प्रतीत होता है कि यही शीतवन से हो कर परवर्ती काल में सीतवन और आज का सीवन के नाम से विख्यात हो गया। वामन पुराण में इस तीर्थ को मातृ तीर्थ के पश्चात रखा गया है। लोक प्रचलित परंपरा इसे माता सीता से संबंधित मानती है। प्रचलित विश्वास के अनुसार माता सीता इसी स्थान पर धरती में समा गई थी इसलिए इस तीर्थ को स्वर्ग द्वार के नाम से भी जाना जाता है।
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इस तीर्थ का उल्लेख महाभारत एवं वामन पुराण के अतिरिक्त पद्म पुराण, ब्रह्म पुराण, कूर्म पुराण, नारद पुराण तथा अग्नि पुराण में भी पाया जाता है। महाभारत के अनुसार नियताहारी एवं जितेन्द्रिय मनुष्य को स्वर्गद्वार में जाना चाहिए जहां जा कर वह स्वर्ग लोक होते हुए ब्रह्मलोक को जाता है। नारद पुराण के अनुसार चैत्र मास की चतुर्दशी को इस तीर्थ में स्नान करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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यह बोले श्रद्धालु
महंत विनोद नौटियाल ने बताया कि नगर का यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। यहां पर रोजाना श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं। साल में कई बार यहां पर भंडारे आदि का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता के दरबार की मान्यता तो दूर दूर तक है और यहां मन्दिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से सीस नवा कर मन्नत मांगते हैं उनकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। मन्दिर के अन्दर माता रानी के दरबार के साथ साथ श्री राम दरबार और शिवाला भी स्थित है। यहां पर भक्त बड़े श्रद्धा भाव से आते हैं। मन्दिर की याती दूर दूर तक फैली है।
मंदिर के भक्त ऋषिकेश शर्मा ने बताया कि वह रोजाना मन्दिर में आते हैं। यहां पर जो भी भक्त सच्चे मन से मुराद मांगते हैं उनकी वह मुराद अवश्य पूरी होती है। नवरात्र में तो भक्तों की सं या बहुत ही बढ़ जाती है। माता रानी सबकी मनोकामना पुरी करती है।