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तनाव में काम कर रहे हैं बिजली कर्मचारी

Tue, 24 Jan 2017 11:40 PM IST
ब्यूरो कैथल
ब्यूरो कैथल Updated Tue, 24 Jan 2017 11:40 PM IST
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electricity department, worker sorts, tension, kaithal
electricity price increases - फोटो : Demo Pic
बिजली कर्मचारियों व अधिकारियों को तनाव में काम करना पड़ रहा है। जिले में करीब 933 पद खाली पड़े हुए हैं। इनकी जगह कच्चे कर्मचारियों से काम लेना पड़ रहा है। वहीं कई कर्मचारियों को कई-कई शिफ्टों में काम करना पड़ता है। जिले में एक जेई ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है।
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पानीपत में एक एसडीओ ने काम के तनाव के कारण नौकरी छोड़ने की पेशकश के बाद अचानक इस ओर ध्यान गया। विभाग में लंबे समय से नियमित भर्तियां नहीं हुई हैं। जिस कारण एक कर्मचारी के पास कई-कई तरह के चार्ज हैं। विभाग के अधीक्षक अभियंता कार्यालय से कर्मचारियों की संख्या पता की गई तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए।
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933 पद खाली हैं कैथल सर्कल में
बिजली निगम के कैथल सर्कल में कुल 1809 कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 933 पद खाली पड़े हुए हैं। सर्कल में 58 जेई के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 12 खाली हैं। तकनीकी स्टाफ के 1478 में से महज 698 कर्मचारी नियुक्त हैं। शेष 780 पद खाली पड़े हुए हैं। इसी प्रकार से क्लर्कियल में 373 में से 132 कर्मचारी हैं। शेष 271 कर्मचारियों के पद खाली हैं। इस कारण विभाग को कच्चे कर्मचारियों से काम लेना पड़ रहा है। इस समय स्थिति यह है कि विभाग में करीब 830 कच्चे कर्मचारियों में डीसी, ठेकेदारी प्रथा के हिसाब से कच्चे कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है।
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स्टोर व वर्कशॉप में स्टाफ की भारी कमी
कई सर्कल में डिविजन स्तर पर स्टोर व वर्कशॉप हैं। लेकिन यहां केवल अधीक्षक अभियंता स्तर पर एक ही स्टोर व वर्कशॉप है। जिसमें स्टाफ की भारी कमी है। यहां ना स्टोरकीपर, ना डाटा इंट्री ऑपरेटर और ना ही एसडीओ की तैनाती है। यहां अधिकतर कार्य महज एक जेई के कंधों पर है।

कई-कई शिफ्टों में काम करना पड़ता है
विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें कई-कई शिफ्टों में काम करना पड़ता है। एक तो बिजली आपूर्ति सुचारु रखना काम है। इसके साथ-साथ चोरी पकड़ने के लिए लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है।

सरकार को देना चाहिए ध्यान
बिजली कर्मचारी एसोसिएशन के राज्य महासचिव नरेश कुमार ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण कई कर्मचारियों को 24 घंटे की ड्यूटी देनी पड़ती है। कर्मचारियों पर काम का इतना दबाव है कि वे मानसिक रूप से परेशानी में हैं। कच्चे कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करवाकर उनका शोषण किया जा रहा है। अभी पता चला है कि करीब 4800 पद को खत्म करने की योजना चल रही है। जबकि इतना दबाव होने के बाद पद बढ़ाए जाने चाहिए, ना कि कम करने चाहिए। सरकार कर्मचारियों की ओर ध्यान दे।


कर्मचारियों को परेशानी है तो मुझसे मिले
वहीं बिजली विभाग के अधीक्षक अभियंता आरके तेवतिया का कहना है कि स्टाफ की कमी तो है। लेकिन विभाग द्वारा डीसी रेट व कांट्रेक्ट आधार पर भी कर्मचारी लगाए गए हैं। किसी कर्मचारी को परेशानी है तो वह उनसे मिल सकता है। कैथल में कर्मचारियों की लगातार सुनवाई की जाती है।
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