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छह करोड़ में शहर से डोर टू डोर कूड़ा एकत्रित करने का मसौदा तैयार
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कैथल। शहर को कूड़े से मुक्ति मिलने की उम्मीद जग गई है। शहर में करीब पांच माह पहले रद्द किए गए डोर टू डोर कूड़ा एकत्रित करने के टेंडर का मसौदा तैयार हो गया है। एनजीटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए कचरा एकत्रीकरण व निपटारे पर सालाना करीब छह करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। इसके लिए नगर परिषद ने पूरी रिपोर्ट तैयार करते हुए डीएमसी कार्यालय में भेज दिया है। सर्वे में शहर से एक दिन में 80 से 90 टन कचरा निकालने का अनुमान लगाया गया है। मसौदा पास होने और टेंडर प्रक्रिया के बाद कई इलाकों से नियमित रूप से कचरा उठान में मदद मिलेगी।
पांच माह पूर्व शहर में डोर टू डोर का काम करने वाली एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया गया था। एजेंसी एनजीटी के काम में नियमानुसार कचरा उठान व उसके निस्तारण में खामियां बताकर इसे रद्द किया गया था। इसके बाद नगर परिषद द्वारा ही शहर से कचरे के उठान का काम किया जा रहा है। लेकिन डंपिंग यार्ड पर इसका नियमानुसार निस्तारण नहीं हो पा रहा है। साथ ही शहर में कई इलाकों से नियमित रूप से कचरे का उठान नहीं हो पा रहा है। जिस कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नगर परिषद द्वारा करीब एक माह से एनजीटी की नई गाइडलाइंस के अनुसार डोर टू डोर के टेंडर के तौर-तरीके व अनुमानित लागत की रिपोर्ट तैयार की जा रही थी। इस दौरान हुए सर्वे में शहर से एक दिन में 80 से 90 टन कचरा निकालने का अनुमान लगाया गया है। इसके हिसाब से एक साल में हर रोज शहर से कचरा एकत्रित करके उसे शून्य किए जाने पर लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।
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नगर परिषद ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि एनजीटी की गाइडलाइंस के अनुसार डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने पर सालना लगभग छह करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की रिपोर्ट तैयार करते हुए डीएमसी कार्यालय में रिपोर्ट भेजी गई है। वहां से विभाग मुख्यालय में भेजकर इसकी प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति ली जाएगी। यदि यह मसौदा पास हो जाता है तो डोर टू डोर का टेंडर लगाया जाएगा। फिलहाल नगर परिषद द्वारा ही यह कार्य किया जा रहा है।
रात्रि सफाई का टेंडर भी चार माह की बजाए एक साल का होगा
कैथल। नगर परिषद द्वारा पिछले सप्ताह लगाए गए रात्रिकालीन सफाई के टेंडर को चार माह के लिए छोड़ने पर भी तकनीकी दिक्कत आ गई है। अब यह टेंडर भी एक साल के लिए लगाया जाएगा। इसके लिए भी विभागीय अधिकारियों ने प्रशासनिक स्वीकृति मांगी है। यह लगभग 50 लाख रुपये से अधिक का टेंडर बनता है। करीब 27 किलोमीटर के एरिया में रात को सफाई की जानी है। इस टेंडर के लगने से शहर में 65 कर्मचारियों को रोजगार मिलेगा। ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि पहले यह टेंडर 4 माह के लिए देने का अनुमान लगाया गया था। जिसमें तकनीकी दिक्कत आई है। अब विभाग मुख्यालय को पत्र लिखकर इसे एक साल के लिए लगाने की अनुमति मांगी गई है। जैसे ही अनुमति मिल जाएगी, रात्रिकालीन सफाई का फिर से एक साल के लिए टेंडर लगाया जाएगा।
शहर के 44 पार्कों के रखरखाव के लिए तकनीकी बिड खोली
कैथल। शहर के 44 पार्कों के लिए लगाए गए टेंडर की सोमवार को तकनीकी बिड खोल दी गई। अब अधिकारी टेंडर के लिए दिए गए एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच कर रहे हैं। दो दिन में यह टेंडर खोल दिया जाएगा। करीब 28 लाख रुपये की अनुमानित लागत के तहत यह टेंडर लगाए गए थे। शहर के 44 पार्कों को तीन हिस्सों में बांटकर तीन टेंडर लगाए गए हैं। अभी 44 पार्कों के लिए लगे टेंडर की तकनीकी बिड खोल दी गई है। चिल्ड्रन व जवाहर पार्क के लिए तकनीकी बिड अभी खोली जानी शेष है।
44 पार्कों की देखरेख व व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 28 लाख रुपये का टेंडर पिछले सप्ताह लगाए गए थे। इनमें सेक्टर 19 व 20, मॉडल टाऊन सहित अन्य हिस्सों में लगभग 44 लाख रुपये सालाना खर्च होंगे। एक्सईएन हिमांशु लाटका ने बताया कि 44 पार्कों के रखरखाव के लिए लगाए गए टेंडर की सोमवार को तकनीकी बिड खोल दी गई है। इनके पत्रावलियों की जांच की जा रही है। मंगलवार को फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। इसके बाद पात्र एजेंसी को यह काम अलॉट कर दिया जाएगा। अभी चिल्ड्रन पार्क व जवाहर पार्क की तकनीकी बिड खोली जानी है।
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पांच माह पूर्व शहर में डोर टू डोर का काम करने वाली एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया गया था। एजेंसी एनजीटी के काम में नियमानुसार कचरा उठान व उसके निस्तारण में खामियां बताकर इसे रद्द किया गया था। इसके बाद नगर परिषद द्वारा ही शहर से कचरे के उठान का काम किया जा रहा है। लेकिन डंपिंग यार्ड पर इसका नियमानुसार निस्तारण नहीं हो पा रहा है। साथ ही शहर में कई इलाकों से नियमित रूप से कचरे का उठान नहीं हो पा रहा है। जिस कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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नगर परिषद द्वारा करीब एक माह से एनजीटी की नई गाइडलाइंस के अनुसार डोर टू डोर के टेंडर के तौर-तरीके व अनुमानित लागत की रिपोर्ट तैयार की जा रही थी। इस दौरान हुए सर्वे में शहर से एक दिन में 80 से 90 टन कचरा निकालने का अनुमान लगाया गया है। इसके हिसाब से एक साल में हर रोज शहर से कचरा एकत्रित करके उसे शून्य किए जाने पर लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।
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नगर परिषद ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि एनजीटी की गाइडलाइंस के अनुसार डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने पर सालना लगभग छह करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की रिपोर्ट तैयार करते हुए डीएमसी कार्यालय में रिपोर्ट भेजी गई है। वहां से विभाग मुख्यालय में भेजकर इसकी प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति ली जाएगी। यदि यह मसौदा पास हो जाता है तो डोर टू डोर का टेंडर लगाया जाएगा। फिलहाल नगर परिषद द्वारा ही यह कार्य किया जा रहा है।
रात्रि सफाई का टेंडर भी चार माह की बजाए एक साल का होगा
कैथल। नगर परिषद द्वारा पिछले सप्ताह लगाए गए रात्रिकालीन सफाई के टेंडर को चार माह के लिए छोड़ने पर भी तकनीकी दिक्कत आ गई है। अब यह टेंडर भी एक साल के लिए लगाया जाएगा। इसके लिए भी विभागीय अधिकारियों ने प्रशासनिक स्वीकृति मांगी है। यह लगभग 50 लाख रुपये से अधिक का टेंडर बनता है। करीब 27 किलोमीटर के एरिया में रात को सफाई की जानी है। इस टेंडर के लगने से शहर में 65 कर्मचारियों को रोजगार मिलेगा। ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि पहले यह टेंडर 4 माह के लिए देने का अनुमान लगाया गया था। जिसमें तकनीकी दिक्कत आई है। अब विभाग मुख्यालय को पत्र लिखकर इसे एक साल के लिए लगाने की अनुमति मांगी गई है। जैसे ही अनुमति मिल जाएगी, रात्रिकालीन सफाई का फिर से एक साल के लिए टेंडर लगाया जाएगा।
शहर के 44 पार्कों के रखरखाव के लिए तकनीकी बिड खोली
कैथल। शहर के 44 पार्कों के लिए लगाए गए टेंडर की सोमवार को तकनीकी बिड खोल दी गई। अब अधिकारी टेंडर के लिए दिए गए एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच कर रहे हैं। दो दिन में यह टेंडर खोल दिया जाएगा। करीब 28 लाख रुपये की अनुमानित लागत के तहत यह टेंडर लगाए गए थे। शहर के 44 पार्कों को तीन हिस्सों में बांटकर तीन टेंडर लगाए गए हैं। अभी 44 पार्कों के लिए लगे टेंडर की तकनीकी बिड खोल दी गई है। चिल्ड्रन व जवाहर पार्क के लिए तकनीकी बिड अभी खोली जानी शेष है।
44 पार्कों की देखरेख व व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 28 लाख रुपये का टेंडर पिछले सप्ताह लगाए गए थे। इनमें सेक्टर 19 व 20, मॉडल टाऊन सहित अन्य हिस्सों में लगभग 44 लाख रुपये सालाना खर्च होंगे। एक्सईएन हिमांशु लाटका ने बताया कि 44 पार्कों के रखरखाव के लिए लगाए गए टेंडर की सोमवार को तकनीकी बिड खोल दी गई है। इनके पत्रावलियों की जांच की जा रही है। मंगलवार को फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। इसके बाद पात्र एजेंसी को यह काम अलॉट कर दिया जाएगा। अभी चिल्ड्रन पार्क व जवाहर पार्क की तकनीकी बिड खोली जानी है।