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गर्ल्स स्कूल में आया ‘भूकंप’, छात्राओं ने दिखाया साहस
कैथल
Updated Sat, 24 May 2014 12:05 AM IST
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कैथल। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित मॉक ड्रील में शुक्रवार को जाखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भूकंप एवं आगजनी की स्थिति पर काबू पाने के लिए लड़कियों ने खूब संघर्ष किया।
स्कूल की घंटी बजते ही भूकंप आने की घोषणा प्रिंसिपल शशि गुलाटी द्वारा जैसे ही की गई, उसके साथ ही अपने-अपने क्लास रूम में बैठी छात्राएं अपने सिर पर बैग रखकर अपनी अध्यापिका सहित आनन-फानन स्कूल से बाहर भागीं। डीसी सोलंकी सहित जिला के अन्य अधिकारियों ने भी भूकंप और आगजनी का यह दृश्य देखा और जिस प्रकार से लड़कियों ने स्कूल भवन से बाहर निकलकर खूले मैदान में पहुंचकर एक-दूसरे को बचाने और जख्मी छात्राओं को उठाकर बाहर लाने की तेजी दिखाई और उसे देखकर डीसी भी अचंभित रह गए। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो वास्तव में इस स्कूल परिसर में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए हों और रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता को आंककर यह कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
स्कूल प्राचार्या द्वारा दूरभाष पर एंबुलेंस व फायर ब्र्रिगेड को सूचना देने के कुछ ही मिनटों के अंतराल में अगिभनशमन वाहन व सायरन बजाती हुई पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस स्कूल में पहुंच गई। इसके बाद जख्मी बच्चों को मरहम पट्टी करती हुई दूसरी छात्राएं व अध्यापिकाओं ने उन लड़कियों को एंबुलेंस में डाला और फायर ब्रिगेड की गाड़ी के कर्मियों ने तेजी दिखाते हुए स्कूल के दोनों भवनों के बीच लगी आग को बुझाया।
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उनके इस कार्य में स्कूली बच्चियां भी स्कूल के ट्यूबवेल से पाइप खिंचकर ले आई और उन्होंने भी आग को बुझाने में अपना यथा संभव योगदान दिया।
इसके बाद जब मॉक ड्रील की सारी प्रक्रिया पूरी हो गई तो उपायुक्त ने स्कूल के मैदान में एकत्रित छात्राओं को उनके द्वारा दिखाए गए साहस के लिए उनकी सराहना की और यह भी कहा कि यदि वास्तव में उनके सामने इस तरह की परिस्थितियां बनती हैं तो वे अपना संयम न खोएं और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जो हिदायतें उन्हें दी गई हैं। उसे जहन में लाते हुए त्वरित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।
इस मौके पर जिला राजस्व अधिकारी सुभाष महत्ता, जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद आंतिल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी रणधीर सिंह शर्मा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रवीण कुमार व अरविंद खुरानिया एडवोकेट मौजूद रहे।
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स्कूल की घंटी बजते ही भूकंप आने की घोषणा प्रिंसिपल शशि गुलाटी द्वारा जैसे ही की गई, उसके साथ ही अपने-अपने क्लास रूम में बैठी छात्राएं अपने सिर पर बैग रखकर अपनी अध्यापिका सहित आनन-फानन स्कूल से बाहर भागीं। डीसी सोलंकी सहित जिला के अन्य अधिकारियों ने भी भूकंप और आगजनी का यह दृश्य देखा और जिस प्रकार से लड़कियों ने स्कूल भवन से बाहर निकलकर खूले मैदान में पहुंचकर एक-दूसरे को बचाने और जख्मी छात्राओं को उठाकर बाहर लाने की तेजी दिखाई और उसे देखकर डीसी भी अचंभित रह गए। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो वास्तव में इस स्कूल परिसर में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए हों और रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता को आंककर यह कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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स्कूल प्राचार्या द्वारा दूरभाष पर एंबुलेंस व फायर ब्र्रिगेड को सूचना देने के कुछ ही मिनटों के अंतराल में अगिभनशमन वाहन व सायरन बजाती हुई पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस स्कूल में पहुंच गई। इसके बाद जख्मी बच्चों को मरहम पट्टी करती हुई दूसरी छात्राएं व अध्यापिकाओं ने उन लड़कियों को एंबुलेंस में डाला और फायर ब्रिगेड की गाड़ी के कर्मियों ने तेजी दिखाते हुए स्कूल के दोनों भवनों के बीच लगी आग को बुझाया।
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उनके इस कार्य में स्कूली बच्चियां भी स्कूल के ट्यूबवेल से पाइप खिंचकर ले आई और उन्होंने भी आग को बुझाने में अपना यथा संभव योगदान दिया।
इसके बाद जब मॉक ड्रील की सारी प्रक्रिया पूरी हो गई तो उपायुक्त ने स्कूल के मैदान में एकत्रित छात्राओं को उनके द्वारा दिखाए गए साहस के लिए उनकी सराहना की और यह भी कहा कि यदि वास्तव में उनके सामने इस तरह की परिस्थितियां बनती हैं तो वे अपना संयम न खोएं और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जो हिदायतें उन्हें दी गई हैं। उसे जहन में लाते हुए त्वरित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।
इस मौके पर जिला राजस्व अधिकारी सुभाष महत्ता, जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद आंतिल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी रणधीर सिंह शर्मा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रवीण कुमार व अरविंद खुरानिया एडवोकेट मौजूद रहे।