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Kaithal News: दूसरों की संपत्ति को खुर्दबुर्द करने वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें
Sun, 15 Jun 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 15 Jun 2025 12:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रदेश सरकार अब लाल डोरा क्षेत्र और उसके बाहर प्रॉपर्टी आईडी में हेराफेरी कर दूसरों की जमीनों को खुर्द-बुर्द करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने जा रही है। इसके तहत नगर पालिका प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन नागरिकों से संपत्ति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन मांगे, जो अब तक लाल डोरा नीति के तहत आवेदन नहीं कर पाए थे।
नगर पालिका सचिव पवन कुमार और पालिका अभियंता राजेश प्रजापति के अनुसार, कलायत के लाल डोरा क्षेत्र में लगभग 1500 संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 100 संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी और प्रमाणपत्र बने हैं।
योजना के अनुसार, कलायत लाल डोरा में निवास करने वाले सभी परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें अपनी असेसमेंट, आधार कार्ड, परिवार आईडी एवं अन्य संबंधित दस्तावेज कमरा नंबर 9, नगर पालिका कार्यालय में जमा करवाने होंगे।
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प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट बनने के बाद लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना हक मिलेगा। यह योजना संपत्तियों को वैध बनाने और निवासियों को अधिकार दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
कलायत में लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों पर गैरकानूनी हेराफेरी और जालसाजी के आरोप बढ़ते जा रहे हैं। शिकायतों में सामने आया है कि कुछ लोग नगर पालिका अधिकारियों से मिलीभगत कर दूसरों की जमीनें बेचने का नेटवर्क चला रहे हैं। कई मामलों में जमीन मालिकाना हक के बिना ही बेची जा रही है। साथ ही, लाल डोरा क्षेत्र के बाहर भी सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर आईडी बनाकर जमीन की नकली स्थिति दर्शाई जा रही है।
हालांकि, अब तक इस तरह के भ्रष्टाचार की जांच या कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जबकि कई गंभीर शिकायतें नगर पालिका में लंबित हैं। ये मामले अधिकारियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों से जुड़ी जमीन के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़
पार्षद प्रीति जगदेवा और अन्य शिकायतकर्ताओं ने बताया कि खाली जमीन के साथ-साथ दुकान-मकानों के जमीनी रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ का खेल चल रहा है। इनमें कई मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं, बावजूद इसके उनके रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की गई है। शिकायतकर्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, निकाय निदेशक, एंटी करप्शन ब्यूरो, जिला कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं। जांच में कई चौकाने वाले पहलू सामने आ सकते हैं।
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कलायत। प्रदेश सरकार अब लाल डोरा क्षेत्र और उसके बाहर प्रॉपर्टी आईडी में हेराफेरी कर दूसरों की जमीनों को खुर्द-बुर्द करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने जा रही है। इसके तहत नगर पालिका प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन नागरिकों से संपत्ति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन मांगे, जो अब तक लाल डोरा नीति के तहत आवेदन नहीं कर पाए थे।
नगर पालिका सचिव पवन कुमार और पालिका अभियंता राजेश प्रजापति के अनुसार, कलायत के लाल डोरा क्षेत्र में लगभग 1500 संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 100 संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी और प्रमाणपत्र बने हैं।
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योजना के अनुसार, कलायत लाल डोरा में निवास करने वाले सभी परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें अपनी असेसमेंट, आधार कार्ड, परिवार आईडी एवं अन्य संबंधित दस्तावेज कमरा नंबर 9, नगर पालिका कार्यालय में जमा करवाने होंगे।
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प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट बनने के बाद लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना हक मिलेगा। यह योजना संपत्तियों को वैध बनाने और निवासियों को अधिकार दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
कलायत में लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों पर गैरकानूनी हेराफेरी और जालसाजी के आरोप बढ़ते जा रहे हैं। शिकायतों में सामने आया है कि कुछ लोग नगर पालिका अधिकारियों से मिलीभगत कर दूसरों की जमीनें बेचने का नेटवर्क चला रहे हैं। कई मामलों में जमीन मालिकाना हक के बिना ही बेची जा रही है। साथ ही, लाल डोरा क्षेत्र के बाहर भी सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर आईडी बनाकर जमीन की नकली स्थिति दर्शाई जा रही है।
हालांकि, अब तक इस तरह के भ्रष्टाचार की जांच या कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जबकि कई गंभीर शिकायतें नगर पालिका में लंबित हैं। ये मामले अधिकारियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों से जुड़ी जमीन के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़
पार्षद प्रीति जगदेवा और अन्य शिकायतकर्ताओं ने बताया कि खाली जमीन के साथ-साथ दुकान-मकानों के जमीनी रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ का खेल चल रहा है। इनमें कई मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं, बावजूद इसके उनके रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की गई है। शिकायतकर्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, निकाय निदेशक, एंटी करप्शन ब्यूरो, जिला कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं। जांच में कई चौकाने वाले पहलू सामने आ सकते हैं।