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Kaithal News: मां स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा-अर्चना, भक्ति में डूबे श्रद्धालु

Wed, 09 Oct 2024 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 09 Oct 2024 03:54 AM IST
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Devotees immersed in devotion, worshiping the form of Mother Skandamata
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल, सीवन, राजौंद। जिले में शारदीय नवरात्र पर्व पर मंगलवार को मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर प्राचीन बड़ी देवी, कोठी देवी स्थित छोटी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में मां श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है।

नवरात्र पर्व के चलते श्रद्धालुओं की ओर से उपवास भी रखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में सीवन में महंत बंसी पुरी ने अपने आश्रम में एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर महंत बंसी पुरी ने कहा कि नवरात्र के पांचवे दिन मां स्कंद माता की पूजा की जाती है, जो शक्ति का पांचवां रूप हैं। इनका नाम उनके पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) के कारण पड़ा, जो देवताओं के सेनापति माने जाते हैं। स्कंद माता की चार भुजाएं हैं, जिनमें वे अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए रहती हैं। एक हाथ में कमल पुष्प धारण करती हैं और दूसरे हाथ से आशीर्वाद देती हैं। उनका वाहन सिंह है और वे कमल के फूल पर विराजमान होती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। कहा कि स्कंद माता का स्वरूप मातृत्व का प्रतीक है। उनकी पूजा करने से भक्तों को माता के समान स्नेह, सुरक्षा और शांति की अनुभूति होती है। माता की कृपा से भक्तों को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और धैर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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उनके पूजन से न केवल घर में शांति आती है, बल्कि जीवन में उन्नति भी होती है। स्कंद माता संतान सुख प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। माता की पूजा करने से भक्त की आध्यात्मिक शक्ति और चेतना जागृत होती है। यह भौतिक सुख-सुविधाओं से परे, आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग में सहायक होती है। जिन व्यक्तियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं, उन्हें स्कंद माता की आराधना करने से स्वास्थ्य में सुधार और रोगों से मुक्ति मिलती है।
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उधर, राजौंद में पावन नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों में मां के श्रद्धालुओं ने मां भगवती स्कंदमाता के स्वरूप में मां के चरणों की पूजा अर्चना कर मंगल की कामना की। वैसे तो श्रद्धालु प्रथम नवरात्रे से ही मंदिरों में सुबह व सांय पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।

आचार्य बृज भूषण ने बताया कि नवरात्रों के दौरान नौ देवियों की पूजा करनी चाहिए तथा घर में अखंड जोत जागृत करनी चाहिए। मां आदि शक्ति के ये नौ रूप सारे ब्रह्मांड को शक्ति देती है। इसलिए संपूर्ण नवरात्र में पूर्ण शुद्धि में रहकर पूजा करनी चाहिए। मां मुरादे पूरी करती हैं।




उन्होंने बताया कि प्रत्येक नवरात्रे पर कन्या पूजन का पाठ करना चाहिए तथा नवरात्रों में कन्याओं की पूजा करने से मन को शांति व शुद्धि मिलती है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्र उपवास रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी को कंजक पूजन के साथ अपना उपवास खोलते हैं, जबकि कई श्रद्धालु नवमी को उपवास खोलते हैं। वैसे तो मंदिरों में पूजा अर्चना हर रोज होती है, परंतु नवरात्रे पर्व के दौरान मंदिरों में पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में दर्शाया गया है, जिस पर कायम रहते हुए महिला श्रद्धालु टोलियों के साथ मंदिरों में गीत गाते हुए पहुंच रही हैं।
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