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Kaithal News: कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
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भागवत कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कस्बे के श्री कपिल मुनि मंदिर में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन कथा स्थल पर कथा सुनने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर वृंदावन से आए कथा वाचक आचार्य बसंत ने ऊषा चरित्र, नृग चरित्र, वासुदेव नारद संवाद, सुदामा प्रसंग, परीक्षित मोक्ष की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को भागवत कथा के प्रसंगों को अपने जीवन में उतारने की बात कही। वहीं उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों को श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्ची दोस्ती की मिसाल बताया। इस दौरान कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है। इस कथा को कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। अंतिम दिन शुकदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णता प्रदान करते हुए कथा में विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। सात दिन की कथा का सारांश बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है और इसे कैसे जीना चाहिए के बारे में भी उपस्थित भक्तों को समझाया। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा। उन्होंने गौ सेवा व परोपकार जैसे कार्य करने पर जोर दिया। कथा के दौरान राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ महिलाएं भजनों पर जम कर नाची। कथा के दौरान सुंदर झांकियां भी निकाली गई। कथा के समापन पर कथा के आयोजकों द्वारा प्रसाद व भंडारे का आयोजन किया गया।
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कलायत। कस्बे के श्री कपिल मुनि मंदिर में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन कथा स्थल पर कथा सुनने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर वृंदावन से आए कथा वाचक आचार्य बसंत ने ऊषा चरित्र, नृग चरित्र, वासुदेव नारद संवाद, सुदामा प्रसंग, परीक्षित मोक्ष की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को भागवत कथा के प्रसंगों को अपने जीवन में उतारने की बात कही। वहीं उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों को श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्ची दोस्ती की मिसाल बताया। इस दौरान कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है। इस कथा को कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। अंतिम दिन शुकदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णता प्रदान करते हुए कथा में विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। सात दिन की कथा का सारांश बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है और इसे कैसे जीना चाहिए के बारे में भी उपस्थित भक्तों को समझाया। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा। उन्होंने गौ सेवा व परोपकार जैसे कार्य करने पर जोर दिया। कथा के दौरान राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ महिलाएं भजनों पर जम कर नाची। कथा के दौरान सुंदर झांकियां भी निकाली गई। कथा के समापन पर कथा के आयोजकों द्वारा प्रसाद व भंडारे का आयोजन किया गया।
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भागवत कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद
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