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Kaithal News: श्रद्धालुओं ने मां कालरात्रि से मांगी सुख-समृद्धि

Tue, 16 Apr 2024 05:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 16 Apr 2024 05:55 AM IST
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Devotees asked for happiness and prosperity from Mother Kalratri
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। नवरात्र में सप्तमी पर सोमवार को मां के जयकारे लगाए गए। साथ ही श्रद्धालुओं ने मां कालरात्रि से सुख-समृद्धि मांगी। मंगलवार को अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। बाजार में पूजा सामग्री की खरीदारी करने के लिए भीड़ उमड़ी और शहर में दिनभर जाम की स्थिति बनी रही।

अल सुबह ही श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे थी। मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के चलते कतार में लगकर दर्शन करने पड़े। बड़ी देवी मंदिर व कोठी देवी मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं ने माता रानी की पूजा अर्चना की।
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बड़ी देवी मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने कहा कि माना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है। इसी वजह से मां के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है। असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था। इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण माता को शुभंकारी भी कहते हैं।
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सोमवार को शहर के मंदिरों सहित आसपास के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने सुबह से पूजा-अर्चना शुरु कर दी। इस दौरान मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी नजर आई। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विद्युत की माला है। इनके चार हाथ है, जिसमें इन्होंने एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में लोहे कांटा धारण किया हुआ है। इसके अलावा इनके दो हाथ वर मुद्रा और अभय मुद्रा में है। इनके तीन नेत्र है और इनके श्वास से अग्नि निकलती है। कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है। मंगलवार को मां के आठवें स्वरूप महागौरी की आराधना व पूजा-अर्चना की जाएगी। बुधवार को रामनवमी है। रामनवमी के दिन मां के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की आराधना एवं पूजा-अर्चना की जाएगी।


अष्टमी पर्व को लेकर सजे बाजार-

मंगलवार को अष्टमी का पर्व है। सुबह से ही बाजार सज गए थे। दिनभर लोगों ने अष्टमी का पर्व मनाने के लिए सामान की खरीदारी की। नारियल, चुनरी, घी, धूप सहित माता रानी के श्रृंगार के सामान की जमकर खरीदारी की। अष्टमी के दिन सभी श्रद्धालु अपने घरों में हलवा, पूरी, खीर सहित अन्य पकवान बनाकर कंजकों की पूजा करते हैं और उनको भोजन करवाते है। इसके बाद सभी कंजकों को प्रसाद वितरित किया जाता है और कुछ पैसे देकर उनका सम्मान किया जाता है। कंजक भी इसके बदल में श्रद्धालुओं का आशीर्वाद देती हैं।
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