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निगम के प्रयासों के बाद भी जिले के पांच गांव नहीं हो रहे जगमग योजना में शामिल
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बिजली निगम के प्रयास के बावजूद जिले के पांच गांव म्हारा गांव जगमग गांव योजना में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इन गांवों के ग्रामीणों ने योजना का विरोध किया है। कई बार निगम की टीम इन गांवों में घरों से बाहर मीटर लगाने के लिए जा चुकी है लेकिन विरोध के कारण बिना मीटर लगाए टीम को वापस लौटना पड़ा। पांचों गांवों के ग्रामीण बिजली के मीटर बाहर लगाने को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं।
ग्रामीण राजेंद्र, रामनिवास, राजाराम ने कहा कि जगमग योजना के बहाने सरकार ने एक कंपनी के साथ करार कर जो मीटर बनवाए हैं, वे क्षमता से ज्यादा रीडिंग निकाल रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को भारी चूना लगने की आशंका है। बिजली विभाग मोटा मुनाफा कमाना चाह रहा है। जिस गांव में मीटर बाहर लगाए गए हैं वहां के बिल ज्यादा आ रहे हैं। निगम और पुलिस प्रशासन के बीच कई बार बाहर मीटर लगाने को लेकर विवाद हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी ग्रामीणों और निगम के बीच कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2015 में म्हारा गांव जगमग गांव योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत प्रत्येक गांव में 24 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था। 2017 में योजना पर काम शुरू हुआ था। 2018 में काम ने गति पकड़ी।
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बिजली के मीटर बाहर लगवाने को लेकर मूंदड़ी के ग्रामीणों ने 30 सितंबर को मीटर बाहर लगाने का सबसे पहले विरोध किया था। घरों से बाहर मीटर लगाने पहुंची टीम के विरोध में करनाल रोड पर भी जाम लगा चुके हैं। इसके बाद खुराना गांव में भी ग्रामीणों ने 22 नवंबर को टीम का विरोध किया था, यहां पर टीम के साथ झड़प भी हुई थी। 25 मई 2021 को पबनावा में ग्रामीणों ने बैठक कर इस योजना में शामिल न होने का फैसला लिया था। इसके अलावा शिमला, ढुंढवा के ग्रामीण भी घरों के बाहर बिजली मीटर लगाने को लेकर विरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि शिमला, ढूंढवा, पबनावा, मूंदड़ी और खुराना गांव में अब तक घरों से बाहर मीटर नहीं लगे हैं। इस कारण इन पांच गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति अभी शुरू नहीं हो सकेगी। बिजली मीटर बाहर न लगने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। बिजली निगम के एक्सईन प्रदीप गोयत का कहना है कि बिजली निगम इन गांव को भी योजना में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। जल्द इन गांवों के लोगों से बातचीत कर जगमग योजना में शामिल किया जाएगा। अब तक जिले में 278 गांव जगमग योजना में शामिल हो चुके हैं। 10 गांव इसी माह शामिल हो जाएंगे।
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ग्रामीण राजेंद्र, रामनिवास, राजाराम ने कहा कि जगमग योजना के बहाने सरकार ने एक कंपनी के साथ करार कर जो मीटर बनवाए हैं, वे क्षमता से ज्यादा रीडिंग निकाल रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को भारी चूना लगने की आशंका है। बिजली विभाग मोटा मुनाफा कमाना चाह रहा है। जिस गांव में मीटर बाहर लगाए गए हैं वहां के बिल ज्यादा आ रहे हैं। निगम और पुलिस प्रशासन के बीच कई बार बाहर मीटर लगाने को लेकर विवाद हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी ग्रामीणों और निगम के बीच कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2015 में म्हारा गांव जगमग गांव योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत प्रत्येक गांव में 24 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था। 2017 में योजना पर काम शुरू हुआ था। 2018 में काम ने गति पकड़ी।
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बिजली के मीटर बाहर लगवाने को लेकर मूंदड़ी के ग्रामीणों ने 30 सितंबर को मीटर बाहर लगाने का सबसे पहले विरोध किया था। घरों से बाहर मीटर लगाने पहुंची टीम के विरोध में करनाल रोड पर भी जाम लगा चुके हैं। इसके बाद खुराना गांव में भी ग्रामीणों ने 22 नवंबर को टीम का विरोध किया था, यहां पर टीम के साथ झड़प भी हुई थी। 25 मई 2021 को पबनावा में ग्रामीणों ने बैठक कर इस योजना में शामिल न होने का फैसला लिया था। इसके अलावा शिमला, ढुंढवा के ग्रामीण भी घरों के बाहर बिजली मीटर लगाने को लेकर विरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि शिमला, ढूंढवा, पबनावा, मूंदड़ी और खुराना गांव में अब तक घरों से बाहर मीटर नहीं लगे हैं। इस कारण इन पांच गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति अभी शुरू नहीं हो सकेगी। बिजली मीटर बाहर न लगने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। बिजली निगम के एक्सईन प्रदीप गोयत का कहना है कि बिजली निगम इन गांव को भी योजना में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। जल्द इन गांवों के लोगों से बातचीत कर जगमग योजना में शामिल किया जाएगा। अब तक जिले में 278 गांव जगमग योजना में शामिल हो चुके हैं। 10 गांव इसी माह शामिल हो जाएंगे।