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Kaithal News: एक किडनी के बावजूद सीमा कर रहीं मोटर वाइंडिंग का काम
Fri, 31 Oct 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:42 AM IST
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दुकान पर मोटर वाइंडिंग का काम करती सीमा मलिक।
कपिल तंवर
कैथल। आधुनिक युग में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। गांव रसीना की सीमा मलिक उन्हीं में से एक हैं, जो शरीर में केवल एक किडनी होने के बावजूद हिम्मत और मेहनत के दम पर न केवल अपने परिवार का सहारा बनीं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। सीमा मोटर वाइंडिंग और बोरवेल सबमर्सिबल पंप रिपेयरिंग जैसे तकनीकी काम करती हैं, जो परंपरागत रूप से पुरुषों के लिए माने जाते हैं। उनके साहस और हुनर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें उद्यमी अवार्ड से सम्मानित किया है।
सीमा पिछले छह सालों से यह काम कर रही हैं। मोटर वाइंडिंग के अलावा वे इलेक्ट्रीशियन और खेतीबाड़ी से जुड़े कार्य भी करती हैं। सीमा बताती हैं कि उनके पति संजीव कुमार पिछले 20 सालों से इसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उन्होंने ही उन्हें इस क्षेत्र से जोड़ा। शुरुआत में उन्होंने कढ़ाई-बुनाई जैसे पारंपरिक काम किए, लेकिन मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने मोटर वाइंडिंग सीखने का निर्णय लिया। शुरू में छोटे पंखों की मोटर वाइंडिंग की, धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ा और आज वे बड़े ट्यूबवेल मोटर तक खुद रिपेयर करती हैं।
सीमा के पति संजीव कुमार बताते हैं कि शादी के बाद जब उन्होंने पत्नी को काम सिखाना शुरू किया, तो समाज के कुछ लोगों ने ताने कसे— “अब पत्नी कमाएगी और ये खाएगा” लेकिन उन्होंने इन बातों को अनसुना कर दिया। उन्होंने दुकान के पास ही एक घर किराए पर लेकर सीमा को मोटर वाइंडिंग सिखाना शुरू किया। धीरे-धीरे सीमा ने हुनर से सबकी सोच बदल दी।
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हालांकि सीमा एक किडनी के साथ जी रही हैं, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतें रहती हैं और भारी वजन नहीं उठा पातीं, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। संजीव बताते हैं कि आज सीमा अपने आत्मविश्वास और लगन से इस क्षेत्र में पुरुषों के समान कार्य कर रही हैं।
पुरस्कार से बढ़ा आत्मविश्वास ः सीमा मलिक को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए 26 जनवरी के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से उद्यमी पुरस्कार और 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा बना। सीमा कहती हैं कि अब उनका लक्ष्य है कि और महिलाएं भी इस काम को सीखें ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। संवाद
पति के प्रोत्साहन से मिला आत्मविश्वास, आईटीआई से ली तकनीकी शिक्षा
सीमा ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। उन्होंने 2018 में अपने पति के प्रोत्साहन से आईटीआई पुंडरी में विद्युतकार (इलेक्ट्रीशियन) ट्रेड में दाखिला लिया और 2019 में कोर्स पूरा किया। इसके बाद उन्होंने सबमर्सिबल ट्यूबवेल मोटर वाइंडिंग में महारत हासिल कर ली। यह काम बिजली से जुड़ा होने के कारण जोखिम भरा है, लेकिन सीमा ने इसे निपुणता से सीख लिया। अब वे हर तरह का रिपेयर खुद करती हैं। उनका कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई ने उन्हें इस काम की बारीकियों को समझने में बहुत मदद की।
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कैथल। आधुनिक युग में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। गांव रसीना की सीमा मलिक उन्हीं में से एक हैं, जो शरीर में केवल एक किडनी होने के बावजूद हिम्मत और मेहनत के दम पर न केवल अपने परिवार का सहारा बनीं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। सीमा मोटर वाइंडिंग और बोरवेल सबमर्सिबल पंप रिपेयरिंग जैसे तकनीकी काम करती हैं, जो परंपरागत रूप से पुरुषों के लिए माने जाते हैं। उनके साहस और हुनर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें उद्यमी अवार्ड से सम्मानित किया है।
सीमा पिछले छह सालों से यह काम कर रही हैं। मोटर वाइंडिंग के अलावा वे इलेक्ट्रीशियन और खेतीबाड़ी से जुड़े कार्य भी करती हैं। सीमा बताती हैं कि उनके पति संजीव कुमार पिछले 20 सालों से इसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उन्होंने ही उन्हें इस क्षेत्र से जोड़ा। शुरुआत में उन्होंने कढ़ाई-बुनाई जैसे पारंपरिक काम किए, लेकिन मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने मोटर वाइंडिंग सीखने का निर्णय लिया। शुरू में छोटे पंखों की मोटर वाइंडिंग की, धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ा और आज वे बड़े ट्यूबवेल मोटर तक खुद रिपेयर करती हैं।
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सीमा के पति संजीव कुमार बताते हैं कि शादी के बाद जब उन्होंने पत्नी को काम सिखाना शुरू किया, तो समाज के कुछ लोगों ने ताने कसे— “अब पत्नी कमाएगी और ये खाएगा” लेकिन उन्होंने इन बातों को अनसुना कर दिया। उन्होंने दुकान के पास ही एक घर किराए पर लेकर सीमा को मोटर वाइंडिंग सिखाना शुरू किया। धीरे-धीरे सीमा ने हुनर से सबकी सोच बदल दी।
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हालांकि सीमा एक किडनी के साथ जी रही हैं, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतें रहती हैं और भारी वजन नहीं उठा पातीं, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। संजीव बताते हैं कि आज सीमा अपने आत्मविश्वास और लगन से इस क्षेत्र में पुरुषों के समान कार्य कर रही हैं।
पुरस्कार से बढ़ा आत्मविश्वास ः सीमा मलिक को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए 26 जनवरी के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से उद्यमी पुरस्कार और 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा बना। सीमा कहती हैं कि अब उनका लक्ष्य है कि और महिलाएं भी इस काम को सीखें ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। संवाद
पति के प्रोत्साहन से मिला आत्मविश्वास, आईटीआई से ली तकनीकी शिक्षा
सीमा ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। उन्होंने 2018 में अपने पति के प्रोत्साहन से आईटीआई पुंडरी में विद्युतकार (इलेक्ट्रीशियन) ट्रेड में दाखिला लिया और 2019 में कोर्स पूरा किया। इसके बाद उन्होंने सबमर्सिबल ट्यूबवेल मोटर वाइंडिंग में महारत हासिल कर ली। यह काम बिजली से जुड़ा होने के कारण जोखिम भरा है, लेकिन सीमा ने इसे निपुणता से सीख लिया। अब वे हर तरह का रिपेयर खुद करती हैं। उनका कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई ने उन्हें इस काम की बारीकियों को समझने में बहुत मदद की।

दुकान पर मोटर वाइंडिंग का काम करती सीमा मलिक।