{"_id":"687549fa08795ace3c0810b1","slug":"describe-the-story-of-the-origin-of-the-universe-kaithal-news-c-18-1-knl1004-692198-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंग का किया वर्णन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंग का किया वर्णन
Mon, 14 Jul 2025 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 14 Jul 2025 11:48 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन सोमवार को पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि तीसरे दिन सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शिव महापुराण में भगवान शिव की महिमा, उनके विभिन्न अवतारों, लीलाओं, भक्ति मार्ग की महत्ता और ब्रह्मांड की रचना की अद्वितीय व्याख्या मिलती है।
पंडित शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में केवल परब्रह्म “शिव” ही विद्यमान थे — जो न पुरुष थे, न स्त्री; न सगुण, न ही निराकार। वे निर्गुण, निराकार, अजन्मा और सर्वव्यापी थे। उन्हें ही “महाशून्य” कहा गया है।
विज्ञापन
जब परब्रह्म शिव में सृजन की इच्छा जागृत हुई, तो उनकी इच्छाशक्ति के रूप में आदिशक्ति (शिवा) प्रकट हुई। इसके बाद सदाशिव के रूप में सगुण ब्रह्म की उत्पत्ति हुई, जिनसे त्रिदेव — ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालनकर्ता) और रुद्र (संहारकर्ता) प्रकट हुए।
शिव महापुराण की सृष्टि-रचना प्रक्रिया में द्वैत और अद्वैत दोनों दर्शन की झलक मिलती है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शक्ति के बिना शिव भी निष्क्रिय हैं, इसीलिए शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना को सर्वोच्च माना गया है।
इस अवसर पर लक्की, बोती, धन्नो देवी, बलवंत, रिंकू, योगेश, कमला, नरेश, प्रवीण, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन सोमवार को पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि तीसरे दिन सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शिव महापुराण में भगवान शिव की महिमा, उनके विभिन्न अवतारों, लीलाओं, भक्ति मार्ग की महत्ता और ब्रह्मांड की रचना की अद्वितीय व्याख्या मिलती है।
विज्ञापन
पंडित शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में केवल परब्रह्म “शिव” ही विद्यमान थे — जो न पुरुष थे, न स्त्री
विज्ञापन
जब परब्रह्म शिव में सृजन की इच्छा जागृत हुई, तो उनकी इच्छाशक्ति के रूप में आदिशक्ति (शिवा) प्रकट हुई। इसके बाद सदाशिव के रूप में सगुण ब्रह्म की उत्पत्ति हुई, जिनसे त्रिदेव — ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालनकर्ता) और रुद्र (संहारकर्ता) प्रकट हुए।
शिव महापुराण की सृष्टि-रचना प्रक्रिया में द्वैत और अद्वैत दोनों दर्शन की झलक मिलती है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शक्ति के बिना शिव भी निष्क्रिय हैं, इसीलिए शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना को सर्वोच्च माना गया है।
इस अवसर पर लक्की, बोती, धन्नो देवी, बलवंत, रिंकू, योगेश, कमला, नरेश, प्रवीण, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।