{"_id":"676084a5e4a248fd0c0f3aa6","slug":"demand-to-increase-the-limit-of-stamp-sellers-kaithal-news-c-18-1-knl1004-541218-2024-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: स्टांप विक्रेताओं की लिमिट बढ़ाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: स्टांप विक्रेताओं की लिमिट बढ़ाने की मांग
Tue, 17 Dec 2024 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 17 Dec 2024 01:21 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। ऑल हरियाणा स्टांप विक्रेता एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष शर्मा ने सीवन में स्टांप विक्रेताओं के साथ बैठक की। इस मौके पर उनसे बातचीत कर स्टांप विक्रेताओं के समक्ष आ रही समस्याओं पर चर्चा की।
सुभाष शर्मा ने बताया कि प्रदेश में स्टांप विक्रेता सरकार के लिए राजस्व एकत्र करने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। स्टांप विक्रेताओं की लिमिट काफी लंबे समय से एक लाख रुपये का स्टांप पेपर निकालने की है, लेकिन इस सीमा के कारण उनका रोजगार भी नहीं चल पा रहा है।
उनका कहा है कि आज महंगाई अधिक हो गई है और स्टांप विक्रेताओं का कमीशन नहीं बढ़ाया गया है। अब तो निजी केंद्र वाले भी स्टांप पेपर निकाल कर बेच रहे हैं जिसके कारण स्टांप विक्रेताओं को रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि स्टांप विक्रेताओं की समस्या की ओर ध्यान दें और इस लिमिट को बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी जाए, ताकि स्टांप विक्रेताओं का रोजगार भी चलता रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि निजी दुकानों से स्टांप लेने वाले लोग एक ही स्टांप का प्रयोग कई जगह कर सकते हैं क्योंकि वह उसकी फोटो कॉपी निकाल लेते हैं परंतु स्टांप विक्रेताओं की ओर से बेचे गए स्टांप का रिकॉर्ड रखा जाता है और स्टांप विक्रेता उस पर अपनी मोहर लगाकर देता है जिससे उसका दूसरे स्थान पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि ऐसे में सरकार को चाहिए कि स्थान निकालने की अनुमति केवल स्टांप विक्रेता को ही दी जाए। इससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और धोखाधड़ी के मामले समाप्त होंगे।
सीवन। ऑल हरियाणा स्टांप विक्रेता एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष शर्मा ने सीवन में स्टांप विक्रेताओं के साथ बैठक की। इस मौके पर उनसे बातचीत कर स्टांप विक्रेताओं के समक्ष आ रही समस्याओं पर चर्चा की।
सुभाष शर्मा ने बताया कि प्रदेश में स्टांप विक्रेता सरकार के लिए राजस्व एकत्र करने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। स्टांप विक्रेताओं की लिमिट काफी लंबे समय से एक लाख रुपये का स्टांप पेपर निकालने की है, लेकिन इस सीमा के कारण उनका रोजगार भी नहीं चल पा रहा है।
विज्ञापन
उनका कहा है कि आज महंगाई अधिक हो गई है और स्टांप विक्रेताओं का कमीशन नहीं बढ़ाया गया है। अब तो निजी केंद्र वाले भी स्टांप पेपर निकाल कर बेच रहे हैं जिसके कारण स्टांप विक्रेताओं को रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि स्टांप विक्रेताओं की समस्या की ओर ध्यान दें और इस लिमिट को बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी जाए, ताकि स्टांप विक्रेताओं का रोजगार भी चलता रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि निजी दुकानों से स्टांप लेने वाले लोग एक ही स्टांप का प्रयोग कई जगह कर सकते हैं क्योंकि वह उसकी फोटो कॉपी निकाल लेते हैं परंतु स्टांप विक्रेताओं की ओर से बेचे गए स्टांप का रिकॉर्ड रखा जाता है और स्टांप विक्रेता उस पर अपनी मोहर लगाकर देता है जिससे उसका दूसरे स्थान पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि ऐसे में सरकार को चाहिए कि स्थान निकालने की अनुमति केवल स्टांप विक्रेता को ही दी जाए। इससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और धोखाधड़ी के मामले समाप्त होंगे।