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गंदगी की समस्या को लेकर न्यायालय में याचिका दाखिल करने का निर्णय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:18 AM IST
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Decision to file a petition in the court regarding the problem of dirt
गांव चंदाना में सफाई और पानी निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर 90 वर्षीय महिला रामप्यारी ने ग्रामीणों को सुविधाएं प्रदान करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए बुजुर्ग महिला कानूनी संघर्ष की राह पर चलने को तैयार हो गई है। समस्याओं के निराकरण को लेकर बुजुर्ग महिला ने शासन-प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। इस समय अवधि में यदि शिकायत का निवारण नहीं होता तो न्यायालय में याचिका दाखिल की जाएगी। इस कानूनी लड़ाई में बुजुर्ग महिला के साथ गांव की अन्य महिलाओं ने भी कदम से कदम मिलाकर चलने का फैसला लिया है। सुविधाओं के अभाव को लेकर गांव में महिलाओं ने आयोजित पंचायत में सर्व सम्मति से आवाज बुलंद करने का ऐलान किया है। बुजुर्ग रामप्यारी, रेखा देवी, बाला, दर्शना, सुमन और अन्य महिलाओं ने कहा कि लंबे समय से वे गंदगी और पानी निकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। हालात इस कदर खराब है कि 12 माह गलियों में गंदा पानी नाले की तरह जमा रहता है। इन परिस्थितियों में न केवल आने जाने में दिक्कतें आ रही हैं बल्कि मकान धंस रहे हैं। पंचायत घर के आसपास और अन्य स्थानों पर कूड़ा-कर्कट के ढेर प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हैं। बार-बार शिकायत के अधिकारी और राजनेता कोताही कर रहे हैं। इससे परेशान होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
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महिलाओं का कहना है कि चंदाना गांव में सफाई और पानी निकासी के लिए कागजों में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। धरातल पर स्थिति बेहद दयनीय है। मुख्य मार्ग पर पंचायत घर से लेकर विभिन्न स्थानों पर कूड़ा-कर्कट के ढेर और गलियों में जमा गंदा पानी अधिकारियों को हकीकत का आइना दिखा रहा है।
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कलायत विधानसभा के लोग बुनियादी सुविधाओं को लेकर सजगता का परिचय दे रहे हैं। पूर्व में आदर्श गांव बालू में शिक्षा सहित बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्कूली बच्चों ने एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के माध्यम से माननीय पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। कानूनी लड़ाई में विद्यार्थियों की जीत हुई और सरकार ने सुविधाओं के लिए बजट जारी करते हुए जमीनी स्तर पर काम शुरू किया। इसी तरह पर अब चंदाना गांव की महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर कानून लड़ाई लडऩे को मजबूर हो गई हैं।
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