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पेंशन बनी टेंशन, घंटों लाइन में लगकर भी हाथ रहते हैं खाली
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:18 AM IST
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एटीएम पर भीड़ नहीं हो रही कम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सरकार द्वारा बुजुर्गों को सम्मान, विधवाओं को गुजारे के लिए दी जाने वाली सहायता पेंशन इस बार पात्रों के लिए मुसीबत बन गई है। बुजुर्गों को 5 से 6 घंटों तक लाइन में लगने के बावजूद पेंशन नहीं मिल रही है। वहीं धक्का-मुक्की के बीच उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। सम्मान के तौर पर मिलने वाली यह पेंशन अब असम्मानित होने जैसा अनुभव दे रही है।
बैंकों में नकदी जमा करवाने एवं निकलवाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही हैं। लोग सुबह से ही बैंकों के बाहर जमा हो जाते हैं। नकदी जमा करवाने वालों एवं निकासी के लिए आने वालों की भीड़ दिन भर बैंकों के बाहर लाइन लगी रहती है। इस कारण लोगों को काफी परेशानियां हो रही हैं।
पेंशन खातों में, लेने के लिए खाने पड़ रहे हैं धक्के
20 नवंबर के बाद सभी बुजुर्गों, विधवाओं व विकलांगों व अन्य पात्रों की पेंशन भी बैंक खातों में आ गई है। हालांकि बुजुर्गों को उनके गांवों में ही बैंक सहायक पेंशन वितरित करते हैं। लेकिन काफी संख्या में बुजुर्गों को बैंकों में ही पेंशन के लिए आना पड़ता है। बैंक सहायकों के पास भी नोटबंदी के कारण नकदी की कमी के चलते परेशानियां आ रही हैं। ऐसे में बुजुर्ग पेंशन के लिए भटक रहे हैं।
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छह सौ रुपये देने पर ही मिल रही है पेंशन
बैंकों में जहां केवल खाता धारक द्वारा ही नोट बदलवाए जाने के आदेशों के बाद कुछ भीड़ तो कम हुई। लेकिन उससे अधिक भीड़ पेंशन धारकों की बढ़ गई है। अधिक भीड़ के कारण पेंशन लेने आए बुजुर्गों को भी घंटों लाइन में लगने के बावजूद भी पेंशन नहीं मिल रही। जिन बैंकों में पेंशन दी जा रही वहां 600 रुपये थमाने पर ही पेंशन दी जा रही है। ऐसे में जिन लोगों के पास 600 रुपये नहीं है। उन्हें खुले रुपयों की मारामारी के कारण पेंशन नहीं मिल रही। जिससें बुजुर्गों की रुपयों को लेकर समस्याएं और अधिक बढ़ी हैं।
नहीं मिली पेंशन
पेंशन लेने आए गांव पाई के बुजुर्ग --- ने कहा कि पेंशन के लिए पिछले दो दिनों से बैंक में आ रहा हूं। मगर बैंकों में नकदी न होने के कारण पेंशन नहीं मिल रही। स्वास्थ्य कई दिनों से खराब है। इलाज के लिए रुपये चाहिए।
छह सौ रुपये खुले देने के बाद मिला दो हजार का नोट
अंबाला रोड स्थित इलाहाबाद बैंक में पेंशन लेने आई शक्ति नगर निवासी बुजुर्ग महिला फूलमती ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से ही बैंक के बाहर लाइन में लगी थी। जब उसका नंबर आया तो बैंक वालों ने उसे दो हजार रुपये का नोट थमा दिया। लेकिन इसके बदले उन्होंने उससे छह सौ रुपये खुले लिए। इसी प्रकार शिव नगर की बंटो देवी ने बैंक में 600 रुपये खुले दिए। जिसके बाद उसे दो हजार रुपये का नोट दिया। उसने बताया कि अब इससे खुले करवाने में काफी दिक्कत आ रही है।
जिले भर में करीब 18 करोड़ रुपया बंटता है पेंशन के तौर पर
जिले भर में पेंशन के तौर पर करीब 18 करोड़ रुपया बंटता है। इनमें 80936 बुजुर्गों को 1400 रुपये प्रति माह के हिसाब से अक्टूबर तक, 6723 विकलांगों को 1400 के हिसाब से, 36020 विधवाओं को 1400, 8373 विधवाओं के बच्चों को 500 रुपये के हिसाब से, लाडली के पात्र 1254 को 1400 के हिसाब से और स्कूल न जाने वाले 553 बच्चों को 700 रुपये के हिसाब से पेंशन वितरित होती है।
स्टेट बैंक प्रबंधक टीएल बैंस ने बताया कि नकदी की वजह से काफी परेशानी आ रही है। बुजुर्गों की पेंशन में 2000 का नोट प्रयोग नहीं कर सकते हैं। वहीं 100-100 के नोटों की कमी है। जिसके कारण समस्याएं आ रही है।
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बैंकों में नकदी जमा करवाने एवं निकलवाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही हैं। लोग सुबह से ही बैंकों के बाहर जमा हो जाते हैं। नकदी जमा करवाने वालों एवं निकासी के लिए आने वालों की भीड़ दिन भर बैंकों के बाहर लाइन लगी रहती है। इस कारण लोगों को काफी परेशानियां हो रही हैं।
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पेंशन खातों में, लेने के लिए खाने पड़ रहे हैं धक्के
20 नवंबर के बाद सभी बुजुर्गों, विधवाओं व विकलांगों व अन्य पात्रों की पेंशन भी बैंक खातों में आ गई है। हालांकि बुजुर्गों को उनके गांवों में ही बैंक सहायक पेंशन वितरित करते हैं। लेकिन काफी संख्या में बुजुर्गों को बैंकों में ही पेंशन के लिए आना पड़ता है। बैंक सहायकों के पास भी नोटबंदी के कारण नकदी की कमी के चलते परेशानियां आ रही हैं। ऐसे में बुजुर्ग पेंशन के लिए भटक रहे हैं।
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छह सौ रुपये देने पर ही मिल रही है पेंशन
बैंकों में जहां केवल खाता धारक द्वारा ही नोट बदलवाए जाने के आदेशों के बाद कुछ भीड़ तो कम हुई। लेकिन उससे अधिक भीड़ पेंशन धारकों की बढ़ गई है। अधिक भीड़ के कारण पेंशन लेने आए बुजुर्गों को भी घंटों लाइन में लगने के बावजूद भी पेंशन नहीं मिल रही। जिन बैंकों में पेंशन दी जा रही वहां 600 रुपये थमाने पर ही पेंशन दी जा रही है। ऐसे में जिन लोगों के पास 600 रुपये नहीं है। उन्हें खुले रुपयों की मारामारी के कारण पेंशन नहीं मिल रही। जिससें बुजुर्गों की रुपयों को लेकर समस्याएं और अधिक बढ़ी हैं।
नहीं मिली पेंशन
पेंशन लेने आए गांव पाई के बुजुर्ग --- ने कहा कि पेंशन के लिए पिछले दो दिनों से बैंक में आ रहा हूं। मगर बैंकों में नकदी न होने के कारण पेंशन नहीं मिल रही। स्वास्थ्य कई दिनों से खराब है। इलाज के लिए रुपये चाहिए।
छह सौ रुपये खुले देने के बाद मिला दो हजार का नोट
अंबाला रोड स्थित इलाहाबाद बैंक में पेंशन लेने आई शक्ति नगर निवासी बुजुर्ग महिला फूलमती ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से ही बैंक के बाहर लाइन में लगी थी। जब उसका नंबर आया तो बैंक वालों ने उसे दो हजार रुपये का नोट थमा दिया। लेकिन इसके बदले उन्होंने उससे छह सौ रुपये खुले लिए। इसी प्रकार शिव नगर की बंटो देवी ने बैंक में 600 रुपये खुले दिए। जिसके बाद उसे दो हजार रुपये का नोट दिया। उसने बताया कि अब इससे खुले करवाने में काफी दिक्कत आ रही है।
जिले भर में करीब 18 करोड़ रुपया बंटता है पेंशन के तौर पर
जिले भर में पेंशन के तौर पर करीब 18 करोड़ रुपया बंटता है। इनमें 80936 बुजुर्गों को 1400 रुपये प्रति माह के हिसाब से अक्टूबर तक, 6723 विकलांगों को 1400 के हिसाब से, 36020 विधवाओं को 1400, 8373 विधवाओं के बच्चों को 500 रुपये के हिसाब से, लाडली के पात्र 1254 को 1400 के हिसाब से और स्कूल न जाने वाले 553 बच्चों को 700 रुपये के हिसाब से पेंशन वितरित होती है।
स्टेट बैंक प्रबंधक टीएल बैंस ने बताया कि नकदी की वजह से काफी परेशानी आ रही है। बुजुर्गों की पेंशन में 2000 का नोट प्रयोग नहीं कर सकते हैं। वहीं 100-100 के नोटों की कमी है। जिसके कारण समस्याएं आ रही है।