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सभ्य समाज में दोषी का अपराध माफी के लायक नहीं... कोर्ट ने मासूम के दुष्कर्मी एवं हत्यारे को सुनाई फांसी की सजा
Sun, 17 Sep 2023 03:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 17 Sep 2023 03:00 AM IST
सार
फांसी की सजा सुनाने के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी की है। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 34 गवाहों का परीक्षण हुआ, फिर 100 पन्नों में फैसला आया है। दोषी पवन न्यायाधीश के सामने रहम की भीख मांगता रहा।
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- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा के कैथल में सात साल की बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने के मामले में फांसी की सजा सुनाने के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर ने कहा कि दोषी का अपराध सभ्य समाज में माफी के लायक नहीं है। मैं सख्त फैसला गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर कर रही हूं ताकि ऐसा जघन्य अपराध दोबारा न हो।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 34 गवाहों का परीक्षण करने के बाद 100 पेज के फैसले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। फैसले के दौरान दोषी पवन कुमार न्यायाधीश के सामने रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन अदालत ने सख्त टिप्पणी कर उसकी याचिका को दरकिनार कर दिया।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त वकील अरविंद खुरानियां और जिला न्यायवादी जेबी गोयल ने बताया कि पीड़ित परिवार को कोर्ट के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 30 लाख रुपये मिलेंगे। इसके अतिरिक्त अलग-अलग अपराधों में दोषी पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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पीड़ित बच्ची के पिता बोले-अदालत से मिला न्याय
पीड़ित बच्ची के पिता ने न्यायालय के फैसले का स्वागत कर आभार जताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दोषी ने बच्ची के साथ दरिंदगी की थी। अदालत ने उसका न्याय किया है। उन्हें कोर्ट से न्याय की आस थी और वह पूरा हुआ है। जघन्य अपराध के दोषी काे फांसी की सजा मिलने के बाद समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगेगा। वहीं, ग्रामीणों ने भी एक साल से कम समय में फैसला सुनाने पर प्रसन्नता जताई है।
यह था पूरा मामला
जिला न्यायवादी जेबी गोयल ने बताया कि कलायत थाने में बच्ची के पिता की शिकायत पर धारा 365, 366, 376-ए बी 302, 201 आईपीसी और धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत केस नंबर-395 दर्ज किया गया था। बाद में जांच के बाद केस में आईपीसी की धारा 376 (3) भी जोड़ी गई थी। केस की विशेष बात यह रही कि पुलिस ने मात्र पांच दिन में चालान तैयार करके अदालत में पेश कर दिया था। शिकायत पक्ष की ओर से केस की पैरवी उप जिला न्यायवादी जय भगवान गोयल ने की। उन्हें जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा नियुक्त वकील अरविंद खुरानिया ने सहयोग दिया।
जय भगवान गोयल ने बताया कि दोषी पवन ने दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली सात साल की बच्ची को बहला फुसला कर दुष्कर्म किया था। फिर उसकी हत्या कर साक्ष्य छिपाने के लिए पेट्रोल डाल आग लगा दी थी। अगले दिन दोपहर तीन बजे बच्ची का अधजला शव निकट के जंगलों में मिला। पुलिस ने मौके पर फॉरेसिंग टीम को बुलाया। इस संबंध में पवन को हिरासत में लिया गया, क्योंकि वह सीसीटीवी की फुटेज में शनिवार को बच्ची को साथ लेकर जाते हुए नजर आ रहा था।
अगली सुबह ही तत्कालीन एसपी मकसूद अहमद, डीएसपी सज्जन कुमार, थाना कलायत के कार्यकारी एसएचओ महावीर सिंह, सीआईए वन और रिजर्व टीम गांव में पहुंची। आशंका जताई जा रही थी कि बच्ची के साथ हैवानियत कर उसके शव को आग के हवाले किया गया है। पूछताछ में पवन ने सारी वारदात का खुलासा किया। उसने बताया कि बच्ची से रेप करने के बाद उसकी हत्या की है। वारदात के बाद सबूत मिटाने के मकसद से बच्ची के शव को तेल छिड़क जला दिया था।
पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम सुनेजा की अदालत में हुई थी सुनवाई
केस की सुनवाई तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम सुनेजा की अदालत में शुरू हुई। उनके तबादले के बाद यह सुनवाई एडीजे डॉ. गगनदीप कौर की अदालत में हुई। इस केस में दो नवंबर को चार्जशीट दाखिल की गई था।
जिले के इतिहास में पहली बार किसी मामले में दोषी को हुई फांसी
कैथल जिले के एक गांव में सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 11 माह में इसकी सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुनाया गया है। वहीं कैथल जिले के इतिहास में पहली बार किसी मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है।
पीड़ित माता-पिता को 30 लाख देने के आदेश
फैसले के तहत कोर्ट ने पीड़ित परिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है। इसमें 15 लाख रुपये पिता और 15 लाख रुपये ही माता को दिए जाएंगे।