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सरकार ने बाजार के हवाले छोड़ा हुआ है अभिभावकों को

Sat, 08 Apr 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
ब्यूरो कैथ्ाल Updated Sat, 08 Apr 2017 12:19 AM IST
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government to free parents bazar
बुक स्‍टाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
केंद्र हो या राज्य सरकार, प्रदेश में स्कूली पाठ्य पुस्तकों के मामले में लोगों को बाजार के हवाले किया हुआ है। निजी प्रकाशकों के साथ मिलीभगत से चल रही खुली लूट के बीच सरकार की कोई ऐसी कारगर नीति नहीं है। जिससे पुस्तकों की कीमतें नियंत्रित हो सकें या फिर सरकारी स्तर पर पुस्तकों का प्रबंध हो सके। एक तरह से निजी स्कूल संचालकों के सामने घुटने टेक चुकी सरकारें अभी भी इस मामले में कुछ करने को तैयार नहीं लग रही हैं।
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सांठ-गांठ से मनमानी कीमतों पर बिक रही हैं किताबें:-
स्कूलों में दाखिले के समय अब अभिभावक अपने बच्चों के लिए पुस्तकें खरीद रहे हैं। जिसके तहत अधिकतर निजी स्कूल संचालकों ने दुकानें निर्धारित कर दी हैं। संबंधित दुकान पर जाते ही दुकानदार अभिभावक को स्कूल का नाम लेते ही पूरा सैट उठाकर कीमतों की पर्ची के अनुसार कच्ची रसीद पर थमा देता है। कीमतें सामान्य कीमतों की तुलना में 3 से 4 गुणा ज्यादा होती है।
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सरकार की नहीं है कोई नीति, तो स्कूल संचालकों का क्या कुसूर:-
व्यवसायिकता के दौर में सरकार की पुस्तकों की कीमतों को लेकर कोई स्पष्ट एवं कारगर नीति नहीं हैं। इसमें स्कूल संचालकों का शायद कोई कुसूर नहीं है। जब सरकार छूट दे रही है तो बाजार का फायदा हर कोई उठाना चाहेगा। क्योंकि एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी कम मिल रही हैं। उसकी हालत इतनी खराब है कि पिछले पूरे साल में 2 बार पुस्तकों के इंडेंट निकलें। जिसमें कुछ सैकड़ों पुस्तकें विक्रेताओं को मिलीं। कैथल में उनके 3 पुस्तक विक्रेता हैं। उन्हें 100-100 पुस्तकें तीन-चार विषयों की मिलीं। अब एनसीईआरटी से अभिभावक पूछ रहे हैं कि इन पुस्तकों से काम चल जाएगा?
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रही बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की तो अब बताया जा रहा है कि पांचवीं कक्षा को भी बोर्ड की बनाया जाएगा, लेकिन कक्षा एक से पांच तक बोर्ड द्वारा बाजार में कोई भी पुस्तक उपलब्ध नहीं करवाई जाती। कहने को 6 से 12 तक पुस्तकें पुस्तक विक्रेताओं को दी जा रही हैं। लेकिन ना तो स्कूल संचालक और ना ही पुस्तक विक्रेता इनमें रुचि लेते। जिसका नतीजा है कि अभिभावक प्रकाशक, स्कूल संचालक व पुस्तक विक्रेता के गठजोड़ के हाथों लूट का शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा लूट प्राथमिक कक्षाओं की पुस्तकों के लिए हो रही है।
एक पुस्तक विक्रेता से हासिल जानकारी के अनुसार सामान्य कीमतों और वसूली जा रही कीमतों में भारी अंतर है।
कक्षा          सामान्य कीमतें                       वसूली जा रही कीमतें
प्रथम           300 से 400                       1200 से 1300
द्वितीय         500 से 700                        1400 से 1500
तृतीय         700 से 800                         1500 से 1700
चतुर्थ        900                                    1800 से 2000
पांचवीं       800 से 900                          2200 से 2300 रुपये।

भाई जड़ै सी सस्ती मिलदी हो..वा जगह बी बता दो..:-
एक दुकान पर पुस्तकें खरीद रहे अभिभावक रमेश ने कहा कि याऐ दुकान बताई है...स्कूल आलयां नै...जड़े सी सस्ती मिलदी हो..वाह जगह बी बता दो...। इसी प्रकार से अभिभावकों रमेश, सुनीता, संजय व छात्रा ज्योति का कहना है कि पुस्तकों की कीमतें निर्धारित करने के लिए नीति होनी चाहिए। एनसीईआरटी या दूसरी किसी सरकारी संस्था से पुस्तकें प्रकाशित करवाकर बेची जाएं।

हर साल पुस्तकें ना बदलीं जाएं पुस्तकें:-
जिस तरह से पहले एक कक्षा में पिछली साल के छात्रों की पुस्तकें पढ़ी जा सकती थीं, उसी प्रकार से ऐसी कोई नीति हो कि पिछले साल की पुस्तकें भी काम आ सकें। हर साल पुस्तकें ना बदली जाएं।

तेलंगाना राज्य की तर्ज पर हो नियंत्रित कीमतें:-
एक अभिभावक संजय कुमार ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि तेलंगाना राज्य में सभी प्रकार की पुस्तकों की कीमतें निर्धारित हैं। उस कीमत से ज्यादा दामों पर पुस्तकें नहीं बेच सकते। कुछ इसी तरह की नीति यहां भी अपनाई जाए।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की करनाल रिजनल की इंचार्ज सुनीता का कहना है कि जो भी पुस्तक विक्रेता पुस्तकों के लिए आता है। उसे दी जाती हैं। प्राथमिक तक बोर्ड पुस्तकें नहीं बेचता। 6 से 12वीं तक दी जाती हैं। कुछेक विषयों की पुस्तकें अभी नहीं आई हैं।
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