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मरीज को ओ-पॉजिटिव की जगह चढ़ाया बी-पॉजिटिव ब्लड, हालत बिगड़ी, पीजीआई रेफर
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कैथल। करनाल रोड स्थित अनाया अस्पताल एंड डायग्रोस्टिक सेंटर में दाखिल एक मरीजों को ओ-पॉजिटिव की जगह बी-पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई। उसे परिजनों के हंगामे के बाद पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा किया और करनाल रोड पर जाम लगाकर लगभग आधे घंटे तक अस्पताल के खिलाफ रोष प्रकट किया। बाद में एसएचओ के समझाने पर लोगों ने जाम खोला और परिजन मरीज को लेकर चंडीगढ़ रवाना हो गए।
गांव टीक निवासी संजीव कुमार ने बताया कि उसके पिता ताराचंद को हृदय संबंधी परेशानी थी। खून चढ़वाने के लिए वह वीरवार को अस्पताल में लेकर आया था, जिसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। एक यूनिट खून तो सही चढ़ाया गया, लेकिन दूसरी यूनिट में डॉक्टरों ने उसे बी पॉजिटिव खून चढ़ा दिया। इससे उसके पिता की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। उसने डॉक्टरों से उसके पिता को चंडीगढ़ रेफर करने के लिए कहा तो डॉक्टरों ने उसे रेफर करने से मना कर दिया।
संजीव ने बताया कि डॉक्टरों ने उसके पिता का शहर के ही किसी निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए कहा, जबकि वे निजी अस्पताल का खर्च उठाने में समर्थ नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शहर के अन्य निजी अस्पतालों में उनके पिता का इलाज करवाने के लिए पूछताछ की तो वे भी इलाज से मना कर गए। अब यहां के डॉक्टर पिछले करीब 10 घंटे से उसके पिता को पीजीआई रेफर नहीं कर रहे। उनके पिता को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। जिस कारण मजबूरन उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा।
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परिजनों ने इसके बाद करनाल रोड पर जाम लगा दिया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसपी से आवास से महज 100 मीटर की दूरी पर जाम की सूचना मिलते ही थाना सिविल लाइन प्रभारी प्रह्लाद राय मौके पर पहुंचे और उन्होंने परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर से बात की। परिजनों ने एसएचओ के आश्वासन के बाद जाम खोल दिया। वहीं मरीज ताराचंद को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
सिविल लाइन थाना एसएचओ प्रह्लाद राय ने बताया कि मरीज के परिजनों ने उसको दूसरा दूसरा ब्लड ग्रुप चढ़ाने की बात कही है। अभी डॉक्टर आए नहीं हैं, वे ही आकर जांच करेंगे।
नाम न छापने की शर्त पर मौके पर मौजूद डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल स्टाफ के ही किसी कर्मचारी की गलती की वजह से खून बदल गया था। दो मरीजों को चढ़ाने के लिए अलग-अलग खून की थैलियां लाकर फ्रिज में रखी गई थीं। संभवत: गलती से एक मरीज का खून दूसरे को चढ़ा है। मरीज को इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को कहा है कि वे किसी भी अस्पताल में उनके पिता का इलाज करवाएं, उनकी तरफ से हर संभव सहायता की जाएगी।
वहीं इस बारे में बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद अस्पताल संचालक डॉ. डार अमीन ने फोन नहीं उठाया। उनसे जब भी बात होगी, उनका पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।
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गांव टीक निवासी संजीव कुमार ने बताया कि उसके पिता ताराचंद को हृदय संबंधी परेशानी थी। खून चढ़वाने के लिए वह वीरवार को अस्पताल में लेकर आया था, जिसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। एक यूनिट खून तो सही चढ़ाया गया, लेकिन दूसरी यूनिट में डॉक्टरों ने उसे बी पॉजिटिव खून चढ़ा दिया। इससे उसके पिता की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। उसने डॉक्टरों से उसके पिता को चंडीगढ़ रेफर करने के लिए कहा तो डॉक्टरों ने उसे रेफर करने से मना कर दिया।
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संजीव ने बताया कि डॉक्टरों ने उसके पिता का शहर के ही किसी निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए कहा, जबकि वे निजी अस्पताल का खर्च उठाने में समर्थ नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शहर के अन्य निजी अस्पतालों में उनके पिता का इलाज करवाने के लिए पूछताछ की तो वे भी इलाज से मना कर गए। अब यहां के डॉक्टर पिछले करीब 10 घंटे से उसके पिता को पीजीआई रेफर नहीं कर रहे। उनके पिता को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। जिस कारण मजबूरन उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा।
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परिजनों ने इसके बाद करनाल रोड पर जाम लगा दिया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसपी से आवास से महज 100 मीटर की दूरी पर जाम की सूचना मिलते ही थाना सिविल लाइन प्रभारी प्रह्लाद राय मौके पर पहुंचे और उन्होंने परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर से बात की। परिजनों ने एसएचओ के आश्वासन के बाद जाम खोल दिया। वहीं मरीज ताराचंद को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
सिविल लाइन थाना एसएचओ प्रह्लाद राय ने बताया कि मरीज के परिजनों ने उसको दूसरा दूसरा ब्लड ग्रुप चढ़ाने की बात कही है। अभी डॉक्टर आए नहीं हैं, वे ही आकर जांच करेंगे।
नाम न छापने की शर्त पर मौके पर मौजूद डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल स्टाफ के ही किसी कर्मचारी की गलती की वजह से खून बदल गया था। दो मरीजों को चढ़ाने के लिए अलग-अलग खून की थैलियां लाकर फ्रिज में रखी गई थीं। संभवत: गलती से एक मरीज का खून दूसरे को चढ़ा है। मरीज को इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को कहा है कि वे किसी भी अस्पताल में उनके पिता का इलाज करवाएं, उनकी तरफ से हर संभव सहायता की जाएगी।
वहीं इस बारे में बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद अस्पताल संचालक डॉ. डार अमीन ने फोन नहीं उठाया। उनसे जब भी बात होगी, उनका पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।