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Kaithal News: बाल विवाह रोकनेे के लिए मांगा सहयोग
Wed, 09 Apr 2025 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 09 Apr 2025 12:36 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आगामी 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया है और इस मौके पर बाल विवाह की खबरें मिलती हैं। यह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार बाल विवाह करना कानून अपराध है। यह जानकारी डीसी प्रीति ने दी।
उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरपंचों, पार्षदों और आमजनों से सहयोग मांगने के साथ अधिकारियों को सर्तकता बरतने के निर्देश दिए हैं।
डीसी ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम आयु के लड़के नाबालिग माना जाता है। उन्होंने बताया कि कम आयु में शादी करने से लड़का व लड़की का भविष्य खराब हो जाता है। बाल विवाह करना गैर-जमानती अपराध हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो बाल विवाह करवाता हैं, उसको बढ़ावा देते हैं या उनकी सहायता करता हैं तो दो साल तक की कड़ी कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता हैं।
उन्होंने लोगों से भी आह्वान किया कि जिले में कहीं पर भी बाल विवाह जानकारी मिलती है तो डॉयल 112, 181, 1098, 01746-235102, 235420, 234525, 235130 नंबर पर सूचना दें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
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सभी संबंधित अधिकारी, ग्राम पंचायत तथा वार्ड एमसी
सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में कोई भी बाल विवाह न होने पाए। इसको लेकर गांव, वार्ड, खंड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएं। अगर आमजन को बाल विवाह से संबंधित कोई सूचना मिलती है तो वे जिला प्रशासन को सूचित करें।
उन्होंने जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से भी समन्वय स्थापित करें और उन्हें बताएं कि इस प्रकार के सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने से पहले उपायुक्त कार्यालय को जरूर सूचित करें।
बाल विवाह के दोष
बाल विवाह से बच्चें के स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा प्राप्त करने और हिंसा एवं उत्पीड़न से संरक्षण के अधिकारों का हनन होता है । विवाह की व्यवस्था वैवाहिक जोड़ों पर विशेष प्रकार की सामाजिक जिम्मेदारियां थोंप देती है, जिसके लिए बच्चें शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार नहीं होते है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता हैं। जिस लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है, उसके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है तथा उसके कमाने और समुदाय में योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। उसे घरेलू हिंसा तथा एचआईवी / एड्स का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है।
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कैथल। आगामी 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया है और इस मौके पर बाल विवाह की खबरें मिलती हैं। यह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार बाल विवाह करना कानून अपराध है। यह जानकारी डीसी प्रीति ने दी।
उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरपंचों, पार्षदों और आमजनों से सहयोग मांगने के साथ अधिकारियों को सर्तकता बरतने के निर्देश दिए हैं।
डीसी ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम आयु के लड़के नाबालिग माना जाता है। उन्होंने बताया कि कम आयु में शादी करने से लड़का व लड़की का भविष्य खराब हो जाता है। बाल विवाह करना गैर-जमानती अपराध हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो बाल विवाह करवाता हैं, उसको बढ़ावा देते हैं या उनकी सहायता करता हैं तो दो साल तक की कड़ी कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता हैं।
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उन्होंने लोगों से भी आह्वान किया कि जिले में कहीं पर भी बाल विवाह जानकारी मिलती है तो डॉयल 112, 181, 1098, 01746-235102, 235420, 234525, 235130 नंबर पर सूचना दें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
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सभी संबंधित अधिकारी, ग्राम पंचायत तथा वार्ड एमसी
सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में कोई भी बाल विवाह न होने पाए। इसको लेकर गांव, वार्ड, खंड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएं। अगर आमजन को बाल विवाह से संबंधित कोई सूचना मिलती है तो वे जिला प्रशासन को सूचित करें।
उन्होंने जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से भी समन्वय स्थापित करें और उन्हें बताएं कि इस प्रकार के सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने से पहले उपायुक्त कार्यालय को जरूर सूचित करें।
बाल विवाह के दोष
बाल विवाह से बच्चें के स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा प्राप्त करने और हिंसा एवं उत्पीड़न से संरक्षण के अधिकारों का हनन होता है । विवाह की व्यवस्था वैवाहिक जोड़ों पर विशेष प्रकार की सामाजिक जिम्मेदारियां थोंप देती है, जिसके लिए बच्चें शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार नहीं होते है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता हैं। जिस लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है, उसके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है तथा उसके कमाने और समुदाय में योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। उसे घरेलू हिंसा तथा एचआईवी / एड्स का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है।