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Kaithal News: लिव-इन रिलेशनशिप पर चिंता जताई
Sun, 29 Mar 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:31 AM IST
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जिले के गांव मटौर में आयोजित महिला संगोष्ठी में सर्वजातीय सर्वखाप महिला महापंचायत की अध्यक्ष डॉ
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मटौर गांव में आयोजित महिला संगोष्ठी में सर्वजातीय सर्वखाप महिला महापंचायत की अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते प्रचलन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति भारतीय पारिवारिक व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के कारण पारंपरिक परिवार व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिससे वैवाहिक संबंधों में अस्थिरता और परिवार टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे संबंधों में महिलाओं को स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिल पाते, जिसके चलते वे धोखाधड़ी, शोषण का शिकार हो रही हैं।
डॉ. दहिया ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हर वर्ष लाखों मामले दर्ज होते हैं। इनमें उत्पीड़न, धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा के कई मामले लिव-इन संबंधों से भी जुड़े पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को सामाजिक स्वीकार्यता में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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कैथल। मटौर गांव में आयोजित महिला संगोष्ठी में सर्वजातीय सर्वखाप महिला महापंचायत की अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते प्रचलन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति भारतीय पारिवारिक व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के कारण पारंपरिक परिवार व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिससे वैवाहिक संबंधों में अस्थिरता और परिवार टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे संबंधों में महिलाओं को स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिल पाते, जिसके चलते वे धोखाधड़ी, शोषण का शिकार हो रही हैं।
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डॉ. दहिया ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हर वर्ष लाखों मामले दर्ज होते हैं। इनमें उत्पीड़न, धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा के कई मामले लिव-इन संबंधों से भी जुड़े पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को सामाजिक स्वीकार्यता में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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