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Kaithal News: आईडी गड़बड़ी में ईओ के साथ क्लर्क भी शामिल, आर्थिक दोस्ती के लिए चला खेल
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नगर परिषद कार्यालय में खाली पड़े काउंटर। संवाद
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कैथल। नगर परिषद में एडमिन आईडी का दुरुपयोग कर की गई गड़बड़ी का मामला गरमा गया है। इसके लिए नगर परिषद चेयरपर्सन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे निकाय मंत्री को शिकायत सौंपी है। आरोप है कि कार्यकारी अधिकारी (ईओ) की मुख्य प्रशासनिक आईडी का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ कमाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया।
इसके बाद ईओ व क्लर्क समेत कई कर्मचारी जांच के घेरे में आ गए हैं। नगर परिषद चेयरपर्सन सुरभि गर्ग ने बताया कि यह केवल किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे नेटवर्क में ईओ के साथ-साथ परिषद के कुछ क्लर्क और अन्य निचले स्तर के कर्मचारी भी पूरी तरह शामिल हैं। चेयरपर्सन ने निकाय मंत्री को भेजे पत्र में साफ लिखा है कि जनता के काम अटका कर दलालों के जरिये अवैध रूप से फाइलों को पास कराने का एक बड़ा नेक्सस परिषद के भीतर चल रहा है जिसकी उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई बेहद जरूरी है।
सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की
इस पूरे खेल का मुख्य जरिया ईओ की वह एडमिन आईडी थी जिसके पास डाटा मॉडिफिकेशन और अंतिम मंजूरी के विशेष अधिकार होते हैं। आरोप है कि अपनी आर्थिक दोस्ती निभाने और निजी हितों को साधने के लिए आईडी का जमकर दुरुपयोग किया गया। इसी आईडी के जरिये सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और नियमों के विपरीत जाकर ऐसे कामों को अंजाम दिया गया जो सामान्य प्रक्रिया में संभव नहीं थे।
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एक आईडी पर दो रजिस्ट्री
परिषद कार्यालय में दलालों की बढ़ती दखलअंदाजी का सबसे बड़ा सबूत तब सामने आया जब एक ही आईडी और एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) पर दो अलग-अलग संपत्तियों की रजिस्ट्री होने का मामला उजागर हुआ। तकनीकी रूप से एक आईडी पर केवल एक ही रजिस्ट्री होती है लेकिन एडमिन आईडी के विशेष अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर इसे किया गया। दलालों और अधिकारियों के इस गठजोड़ से सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान होने का अनुमान है।
मामला बढ़ता देख बैकफुट पर आए ईओ
जब यह मामला पूरी तरह तूल पकड़ने लगा और शिकायतें सीधे चंडीगढ़ तक पहुंचने लगीं, तो ईओ संदीप सोलंकी ने तुरंत मामले से जुड़े शिकायतकर्ताओं को अपने कार्यालय में तलब किया। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार से कराएंगे ताकि यह साफ हो सके कि तकनीकी स्तर पर यह रजिस्ट्री कैसे संभव हुई। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए आरोप निराधार हैं। किसी कर्मचारी ने ओटीपी लेकर गलत काम किया है। इसकी वह जांच कर रहे हैं।
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इसके बाद ईओ व क्लर्क समेत कई कर्मचारी जांच के घेरे में आ गए हैं। नगर परिषद चेयरपर्सन सुरभि गर्ग ने बताया कि यह केवल किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे नेटवर्क में ईओ के साथ-साथ परिषद के कुछ क्लर्क और अन्य निचले स्तर के कर्मचारी भी पूरी तरह शामिल हैं। चेयरपर्सन ने निकाय मंत्री को भेजे पत्र में साफ लिखा है कि जनता के काम अटका कर दलालों के जरिये अवैध रूप से फाइलों को पास कराने का एक बड़ा नेक्सस परिषद के भीतर चल रहा है जिसकी उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई बेहद जरूरी है।
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सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की
इस पूरे खेल का मुख्य जरिया ईओ की वह एडमिन आईडी थी जिसके पास डाटा मॉडिफिकेशन और अंतिम मंजूरी के विशेष अधिकार होते हैं। आरोप है कि अपनी आर्थिक दोस्ती निभाने और निजी हितों को साधने के लिए आईडी का जमकर दुरुपयोग किया गया। इसी आईडी के जरिये सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और नियमों के विपरीत जाकर ऐसे कामों को अंजाम दिया गया जो सामान्य प्रक्रिया में संभव नहीं थे।
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एक आईडी पर दो रजिस्ट्री
परिषद कार्यालय में दलालों की बढ़ती दखलअंदाजी का सबसे बड़ा सबूत तब सामने आया जब एक ही आईडी और एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) पर दो अलग-अलग संपत्तियों की रजिस्ट्री होने का मामला उजागर हुआ। तकनीकी रूप से एक आईडी पर केवल एक ही रजिस्ट्री होती है लेकिन एडमिन आईडी के विशेष अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर इसे किया गया। दलालों और अधिकारियों के इस गठजोड़ से सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान होने का अनुमान है।
मामला बढ़ता देख बैकफुट पर आए ईओ
जब यह मामला पूरी तरह तूल पकड़ने लगा और शिकायतें सीधे चंडीगढ़ तक पहुंचने लगीं, तो ईओ संदीप सोलंकी ने तुरंत मामले से जुड़े शिकायतकर्ताओं को अपने कार्यालय में तलब किया। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार से कराएंगे ताकि यह साफ हो सके कि तकनीकी स्तर पर यह रजिस्ट्री कैसे संभव हुई। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए आरोप निराधार हैं। किसी कर्मचारी ने ओटीपी लेकर गलत काम किया है। इसकी वह जांच कर रहे हैं।

नगर परिषद कार्यालय में खाली पड़े काउंटर। संवाद