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Kaithal News: अभियान के तहत स्कूल प्रांगण में की सफाई
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सीवन। पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम विद्यालय की कानूनी साक्षरता प्रकोष्ठ की छात्राओं की ओर से आयोजित किया। कार्यक्रम के दौरान स्कूल प्रांगण की सफाई की और रैली निकाली गई। कानूनी साक्षरता प्रकोष्ठ की इंचार्ज डाॅ. भूपिंद्र कौर और गोपाल दास ने प्रार्थना सभा में छात्राओं को स्वच्छता ही सेवा विषय पर जीवन में सफाई के महत्व को विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि जीवन में सफाई का बहुत महत्व है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होती है। स्वच्छता से बीमारियों से बचाव होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साफ-सुथरा वातावरण जीवन में अनुशासन और संतुलन लाता है। यह समाज और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। इस अवसर पर विद्यालय इंचार्ज आशा रानी, प्राध्यापिका अनुराधा, अंजली, कविता, ज्योति, सुषमा, सुनीता, सुमनलता और महेंद्रजीत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
फोटो सहित
अमित तनेजा
सीवन। श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की स्थापना महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने 1990 में की थी। इसका उद्देश्य भगवद् गीता के उपदेशों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना और लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है। स्वामी ज्ञानानंद जिन्हें गीता मनीषी के रूप में जाना जाता है, मानते हैं कि गीता के सिद्धांत न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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उपरोक्त विचार श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति सीवन के पूर्व प्रधान सुरेश सरदाना ने अपने कार्यालय में एक भेंटवार्ता में कहे। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य कार्य भगवद गीता के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना और इसे दैनिक जीवन में अपनाने पर जोर देना है। गीता के उपदेश, जैसे कर्मयोग (कर्तव्य पालन बिना फल की चिंता के), भक्ति योग (भगवान के प्रति समर्पण) और ज्ञानयोग (आध्यात्मिक ज्ञान) मनुष्य के जीवन को दिशा देने और संतुलन में रखने के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
वर्तमान में समिति का प्रचार-प्रसार भारत के अलावा अन्य 15 से अधिक देशों में फैला हुआ है। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया और अन्य यूरोपीय देश शामिल हैं। सरदाना ने कहा कि समिति के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गीता महोत्सव, सत्संग, और ध्यान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जहां गीता के सार को विभिन्न भाषाओं में सरल तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
उन्होंने कहा कि गीता हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और एक संतुलित और नैतिक जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। समिति के सामाजिक योगदान में गौसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और धर्मार्थ कार्य भी शामिल हैं। इस अवसर पर उनके साथ घनश्याम रहेजा, सुरेंद्र सरदाना, कार्तिक सरदाना, हरिकिशन तनेजा व अन्य उपस्थित थे।
सीवन में पत्रकारों से बात करते समिति के पूर्व प्रधान सुरेश सरदाना व अन्य
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उन्होंने कहा कि जीवन में सफाई का बहुत महत्व है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होती है। स्वच्छता से बीमारियों से बचाव होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साफ-सुथरा वातावरण जीवन में अनुशासन और संतुलन लाता है। यह समाज और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। इस अवसर पर विद्यालय इंचार्ज आशा रानी, प्राध्यापिका अनुराधा, अंजली, कविता, ज्योति, सुषमा, सुनीता, सुमनलता और महेंद्रजीत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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फोटो सहित
अमित तनेजा
सीवन। श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की स्थापना महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने 1990 में की थी। इसका उद्देश्य भगवद् गीता के उपदेशों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना और लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है। स्वामी ज्ञानानंद जिन्हें गीता मनीषी के रूप में जाना जाता है, मानते हैं कि गीता के सिद्धांत न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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उपरोक्त विचार श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति सीवन के पूर्व प्रधान सुरेश सरदाना ने अपने कार्यालय में एक भेंटवार्ता में कहे। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य कार्य भगवद गीता के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना और इसे दैनिक जीवन में अपनाने पर जोर देना है। गीता के उपदेश, जैसे कर्मयोग (कर्तव्य पालन बिना फल की चिंता के), भक्ति योग (भगवान के प्रति समर्पण) और ज्ञानयोग (आध्यात्मिक ज्ञान) मनुष्य के जीवन को दिशा देने और संतुलन में रखने के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
वर्तमान में समिति का प्रचार-प्रसार भारत के अलावा अन्य 15 से अधिक देशों में फैला हुआ है। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया और अन्य यूरोपीय देश शामिल हैं। सरदाना ने कहा कि समिति के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गीता महोत्सव, सत्संग, और ध्यान शिविरों का आयोजन किया जाता है, जहां गीता के सार को विभिन्न भाषाओं में सरल तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
उन्होंने कहा कि गीता हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और एक संतुलित और नैतिक जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। समिति के सामाजिक योगदान में गौसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और धर्मार्थ कार्य भी शामिल हैं। इस अवसर पर उनके साथ घनश्याम रहेजा, सुरेंद्र सरदाना, कार्तिक सरदाना, हरिकिशन तनेजा व अन्य उपस्थित थे।
सीवन में पत्रकारों से बात करते समिति के पूर्व प्रधान सुरेश सरदाना व अन्य