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मिट्टी से बने दीयों की बढ़ी मांग
ब्यूरो कैथल
Updated Sat, 22 Oct 2016 11:24 PM IST
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दीये बनाती युवती और महिला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पिछले कई सालों से बाजार पर काबिज चाइनीज लड़ियों, दीयों और अन्य सामग्री के कारण लगातार हाशिये पर जा रहे कुम्हार समाज के परिवारों में उम्मीद जगी है। सोशल मीडिया पर की जा रही अपील का असर नजर आने लगा है। पूरे सीजन में जितनी बिक्री होती थी, उससे ज्यादा दीये तो इस बार अभी से बिक चुके हैं। जिससे दीये बनाने वाले परिवार उत्साहित हैं।
सोशल मीडिया की मुहिम का दिखने लगा है असर
इस बार दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग की अपील की जा रही है। पाक का साथ दिए जाने के कारण चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार से देश को बचाने की बात हो रही है। ताकि देश का पैसा देश में ही रहे। दीपावली से पूर्व शुरू हुई इस मुहिम के चलते काफी लोगों का मन बदल चुका है।
नजर आने लगा है मुहिम का असर
सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम का असर बाजार में नजर आने लगा है। पुश्तैनी धंधा करने वाले दुकानदारों ने बताया कि दीपावली पर एक सीजन में जितने दीये बिकते थे, उतने तो अभी से बिक चुके हैं। उन्हें इस बार अच्छा धंधा निकलने की उम्मीद जगी है।
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इस वर्ष बनाए ज्यादा दीए
करीगर शेखर का कहना है कि वह पिछले पांच सालों से मिट्टी के दीये बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार चीनी समान के बहिष्कार के बाद लोगों में दीयों की काफी डिमांड हैं और उन्होंने इस दीपावली पर पहले से अधिक दीये बनाएं है। उसने बताया कि वह सामान्य तौर पर 10 हजार दिये बनाते थे लेकिन इस वर्ष 20 से तीस हजार दीये बनाएंगे।
दीयों का रेट बढ़ा
दुकानदार सूरजभान ने बताया कि इस बार दीयों की बढ़ती हुई मांग से दीयों के रेट में भी काफी इजाफा हुआ है। उसने बताया कि इस बार 8 से लेकर दस रुपये पर प्रति सैकड़ा दीयों का रेट बढ़ा है। पहले 50 रुपये प्रति सैकड़ा दीयों का रेट था जो अब 60 रुपये हो गया है। जिससे दुकानदारों को भी इस बार मुनाफे की उम्मीद है।
मिट्टी के दीयों से करेंगी पूजन
ग्राहक शकुंतला देवी ने बताया कि वह इस दीपावली पर पूरी तरह से मिट्टी के दीये से पूजन करेंगी, क्योंकि बुर्जगों का कहना है कि मिट्टी का समान शुभ और पवित्र होता है। इसीलिए हमेशा मिट्टी के दीयों से दीपावली को मनाना चाहिए ।
स्वेदशी समान पर जागरूकता सरहानीय कदम
वार्ड नंबर-23 के पार्षद गोपाल सैनी ने बताया कि यह अच्छी बात है कि इस बार दीपावली पर स्वदेशी समान को लेकर काफी जागरूकता आई है। ऐसा अभियान पहले ही चलाया जाना चाहिए था लेकिन अब चला तो भी यह काफी सराहनीय है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के दीयों से कीट-कीटाणु और मच्छर दूर होते हैं।
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सोशल मीडिया की मुहिम का दिखने लगा है असर
इस बार दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग की अपील की जा रही है। पाक का साथ दिए जाने के कारण चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार से देश को बचाने की बात हो रही है। ताकि देश का पैसा देश में ही रहे। दीपावली से पूर्व शुरू हुई इस मुहिम के चलते काफी लोगों का मन बदल चुका है।
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नजर आने लगा है मुहिम का असर
सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम का असर बाजार में नजर आने लगा है। पुश्तैनी धंधा करने वाले दुकानदारों ने बताया कि दीपावली पर एक सीजन में जितने दीये बिकते थे, उतने तो अभी से बिक चुके हैं। उन्हें इस बार अच्छा धंधा निकलने की उम्मीद जगी है।
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इस वर्ष बनाए ज्यादा दीए
करीगर शेखर का कहना है कि वह पिछले पांच सालों से मिट्टी के दीये बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार चीनी समान के बहिष्कार के बाद लोगों में दीयों की काफी डिमांड हैं और उन्होंने इस दीपावली पर पहले से अधिक दीये बनाएं है। उसने बताया कि वह सामान्य तौर पर 10 हजार दिये बनाते थे लेकिन इस वर्ष 20 से तीस हजार दीये बनाएंगे।
दीयों का रेट बढ़ा
दुकानदार सूरजभान ने बताया कि इस बार दीयों की बढ़ती हुई मांग से दीयों के रेट में भी काफी इजाफा हुआ है। उसने बताया कि इस बार 8 से लेकर दस रुपये पर प्रति सैकड़ा दीयों का रेट बढ़ा है। पहले 50 रुपये प्रति सैकड़ा दीयों का रेट था जो अब 60 रुपये हो गया है। जिससे दुकानदारों को भी इस बार मुनाफे की उम्मीद है।
मिट्टी के दीयों से करेंगी पूजन
ग्राहक शकुंतला देवी ने बताया कि वह इस दीपावली पर पूरी तरह से मिट्टी के दीये से पूजन करेंगी, क्योंकि बुर्जगों का कहना है कि मिट्टी का समान शुभ और पवित्र होता है। इसीलिए हमेशा मिट्टी के दीयों से दीपावली को मनाना चाहिए ।
स्वेदशी समान पर जागरूकता सरहानीय कदम
वार्ड नंबर-23 के पार्षद गोपाल सैनी ने बताया कि यह अच्छी बात है कि इस बार दीपावली पर स्वदेशी समान को लेकर काफी जागरूकता आई है। ऐसा अभियान पहले ही चलाया जाना चाहिए था लेकिन अब चला तो भी यह काफी सराहनीय है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के दीयों से कीट-कीटाणु और मच्छर दूर होते हैं।