{"_id":"5efcc6048ebc3e42d3713c3c","slug":"city-council-kaithal-news-knl359435152","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य एक साल से अटके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य एक साल से अटके
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। जिला परिषद की पिछले साल 11 जून को हुई बैठक को एक साल से भी ज्यादा का समय हो गया है। लेकिन इस बैठक मेेें पारित किए गए प्रस्ताव अनुसार 5 करोड़ रुपये की राशि आज तक खर्च नहीं हो पाई है और जिले भर के गांवों में होने वाले विकास कार्यों के लिए फाइल जिला परिषद सीईओ की टेबल से आगे नहीं सरकी है। चेयरपर्सन व सदस्यों का कहना है कि वे कई बार सदस्यों को लिखित में दे चुके हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि गुटबाजी के कारण यह राशि खर्च नहीं हो पा रही है।
प्रशासनिक लेटलतीफी के उदाहरण इस मामले में एक साल से भी ज्यादा समय तक काम तक शुरू ना हो पाना जिला परिषद के सदस्यों व चेयरपर्सन व वाइस चैयरमैन के लिए अब और ज्यादा बेचैनी बढ़ गई है। क्योंकि प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव की रणभेरी बज रही है।
जिला परिषद से मिली जानकारी के अनुसार 11 जून 2019 को जिला परिषद की बैठक में करीब 5 करोड़ रुपये के विकास कार्याें के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें विकास कार्याें का फैसला चैयरपर्सन सुखविंद्र थौर पर छोड़ दिया गया था। चैयरपर्सन ने जिला पार्षदों से मिली सूची के अनुसार विकास कार्यों की सूची सीईओ जिला परिषद को दे दी थी। इसके बाद से आज तक यह सूची इस टेबल से आगे नहीं बढ़ पा रही है। करीब 5 करोड़ रुपये की राशि खर्च ना हो पाने के कारण जिला परिषद के कई सदस्य लंबित कार्यों के कारण परेशान हैं।
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जिला परिषद की चैयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चैयरमेन मनीष कठवाड़ ने कहा कि उन्होंने विकास कार्यों की सूची बनाकर सीईओ को सौंप दी थी। साथ ही इसके लिए रिमाइंडर भी दिए हैं। विकास कार्य सरकार की नीति अनुसार शीघ्र पूरे होने चाहिए।
इस संबंध में सीईओ जिला परिषद मीनाक्षी दहिया का कहना है कि यहां दो गुटों के कारण विकास कार्यों पर सहमति नहीं बन पा रही है। जिस कारण विभाग मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है। जैसे ही निर्देश आएंगे, विकास कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे। करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य होने हैं।
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प्रशासनिक लेटलतीफी के उदाहरण इस मामले में एक साल से भी ज्यादा समय तक काम तक शुरू ना हो पाना जिला परिषद के सदस्यों व चेयरपर्सन व वाइस चैयरमैन के लिए अब और ज्यादा बेचैनी बढ़ गई है। क्योंकि प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव की रणभेरी बज रही है।
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जिला परिषद से मिली जानकारी के अनुसार 11 जून 2019 को जिला परिषद की बैठक में करीब 5 करोड़ रुपये के विकास कार्याें के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें विकास कार्याें का फैसला चैयरपर्सन सुखविंद्र थौर पर छोड़ दिया गया था। चैयरपर्सन ने जिला पार्षदों से मिली सूची के अनुसार विकास कार्यों की सूची सीईओ जिला परिषद को दे दी थी। इसके बाद से आज तक यह सूची इस टेबल से आगे नहीं बढ़ पा रही है। करीब 5 करोड़ रुपये की राशि खर्च ना हो पाने के कारण जिला परिषद के कई सदस्य लंबित कार्यों के कारण परेशान हैं।
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जिला परिषद की चैयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चैयरमेन मनीष कठवाड़ ने कहा कि उन्होंने विकास कार्यों की सूची बनाकर सीईओ को सौंप दी थी। साथ ही इसके लिए रिमाइंडर भी दिए हैं। विकास कार्य सरकार की नीति अनुसार शीघ्र पूरे होने चाहिए।
इस संबंध में सीईओ जिला परिषद मीनाक्षी दहिया का कहना है कि यहां दो गुटों के कारण विकास कार्यों पर सहमति नहीं बन पा रही है। जिस कारण विभाग मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है। जैसे ही निर्देश आएंगे, विकास कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे। करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य होने हैं।