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Kaithal News: बच्चों के दांतों में लग रहा कीड़ा, रोजाना 15 से 20 बच्चे पहुंच रहे ओपीडी में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:28 PM IST
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Children are suffering from tooth decay; 15 to 20 children are visiting the OPD daily.
ओपीडी में बच्ची की दांतों की जांच करते सीनियर डेंटल सर्जन। संवाद
कैथल। बच्चों में दांतों की कैविटी यानी कीड़ा लगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 100 मरीज दांतों की जांच के लिए पहुंचते हैं और इनमें से 15 से 20 बच्चे दांतों में कीड़ा लगे होने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
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जांच करने पर अधिकतर बच्चों के दांतों में कैविटी विकसित हो चुकी होती है। डॉ. आदित्य गोयल का कहना है कि ये अभिभावकों की लापरवाही का नतीजा है। अभिभावकों में आज भी यह गलतफहमी है कि दूध वाले दांत कुछ समय बाद अपने आप टूट जाते हैं, इसलिए उनमें कीड़ा लगने पर विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती। इसी लापरवाही के कारण बच्चों में दांतों की समस्याएं बढ़ रही हैं। दंत चिकित्सकों के अनुसार दूध वाले दांत बच्चों के चबाने, बोलने और जबड़ों के सही विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये दांत स्थायी दांतों के लिए उचित स्थान बनाए रखते हैं। यदि दूध वाले दांत समय से पहले खराब होकर टूट जाएं या निकालने पड़ें तो बाद में आने वाले स्थायी दांत टेढ़े-मेढ़े या गलत दिशा में निकल सकते हैं।
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खानपान की आदतें बढ़ा रही समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि चॉकलेट, टॉफी, मीठे पेय पदार्थ, पैकेट बंद जूस और जंक फूड का बढ़ता सेवन बच्चों में कैविटी का प्रमुख कारण बन रहा है। इसके अलावा रात में दूध पीने के बाद बिना कुल्ला किए सो जाना और नियमित ब्रश न करना भी दांतों को नुकसान पहुंचा रहा है।
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आदतों में सुधार और सही ब्रशिंग जरूरी
दंत चिकित्सकों ने सलाह दी है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डलवानी चाहिए। छह वर्ष तक के बच्चों की ब्रशिंग पर अभिभावकों को निगरानी रखनी चाहिए। साथ ही हर छह महीने में एक बार दंत परीक्षण करवाना भी जरूरी है। इसके अलावा खाने की आदतों में सुधार करें और अभिभावक ही ये करवा सकते हैं। बच्चों के मीठे खाद्य पदार्थों और शीतल पेयों का सेवन सीमित करें। रात में दूध पीने के बाद कुल्ला अवश्य कराएं। दांतों में दर्द या काले धब्बे दिखने पर तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करें। नियमित दंत जांच कराएं।

यदि समय रहते दूध वाले दांतों की देखभाल की जाए तो बच्चों को भविष्य में होने वाली कई दंत समस्याओं से बचाया जा सकता है। अभिभावक ये समझ लें कि दूध वाले दांत भी मुख्य दांतों की तरह ही महत्वपूर्ण हैं और किसी भी तरह की लारपरवाही न बरतें। ये कहकर की बच्चे जिद्दी हैं, अभिभावक अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। बच्चों में सही खानपान की आदत और सही ब्रशिंग बहुत जरूरी है।
- डॉ. आदित्य गोयल, डेंटल सर्जन, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल।

ओपीडी में बच्ची की दांतों की जांच करते सीनियर डेंटल सर्जन। संवाद

ओपीडी में बच्ची की दांतों की जांच करते सीनियर डेंटल सर्जन। संवाद

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