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सात साल पहले लगाए गए सीसीटीवी कैमरे बंद, कैसे पुख्ता हों सुरक्षा के प्रबंध
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कैथल। शहर में करीब सात वर्ष पहले लगाए गए ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। ऐसे में शहर में लूट, घरों, संस्थानों और दुकानों में चोरी और वाहन चोरी की वारदातें बढ़ रही हैं। लूट और चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाश वारदात कर निकल जाते हैं और पुलिस उनको तलाशती रह जाती है। अगर वारदात की जगह पर कोई सीसीटीवी कैमरा लगा हो तो ठीक हैं नहीं तो कौन वारदात को अंजाम दे गया, इसका पता तक नहीं चल पाता।
जिन चौक चौराहों पर फिलहाल सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं, वे भी सिर्फ दिखावटी बनकर रह गए हैं। कई स्थानों पर तो कैमरों की तारें गायब हैं और कई जगहों पर उनकी डीवीआर तक नहीं है। कैमरों की खराब हालात के चलते अपराधियों को फायदा हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय कैमरों की देखरेख की जिम्मेदारी भी पुलिस विभाग पर है। जिसे सबसे ज्यादा जरूरत है, वही देखरेख के कार्य में खरे नहीं उतर रहे हैं।
गौरतलब है कि करीब सात साल पहले वर्ष 2015-16 में नगर परिषद के सहयोग से शहर के चौराहों पर 23 लोकेशन पर 52 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों पर करीब 11 लाख रुपये की राशि खर्च की गई थी। अब इनमें से करीब 47 कैमरे बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव में काफी कैमरे खराब हो चुके हैं। केवल पांच कैमरे ही चालू हालात में बताए जा रहे हैं। ये कैमरे शहर में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अनाज मंडी, सभी मुख्य मार्ग, मुख्य बाजार, अस्पताल और अन्य स्थानों पर लगे थे। कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाना ही था, लेकिन नगर परिषद और पुलिस इस उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही है। इसके अलावा प्रतिदिन आधा दर्जन बाइक चोरी की घटनाएं हो रहीं हैं। इन वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के पास पुलिस नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा दो सितंबर को अंबाला रोड परम कॉलोनी और जाट कॉलेज से बाइक दो चोरी हुई।
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जिन चौक चौराहों पर फिलहाल सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं, वे भी सिर्फ दिखावटी बनकर रह गए हैं। कई स्थानों पर तो कैमरों की तारें गायब हैं और कई जगहों पर उनकी डीवीआर तक नहीं है। कैमरों की खराब हालात के चलते अपराधियों को फायदा हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय कैमरों की देखरेख की जिम्मेदारी भी पुलिस विभाग पर है। जिसे सबसे ज्यादा जरूरत है, वही देखरेख के कार्य में खरे नहीं उतर रहे हैं।
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गौरतलब है कि करीब सात साल पहले वर्ष 2015-16 में नगर परिषद के सहयोग से शहर के चौराहों पर 23 लोकेशन पर 52 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों पर करीब 11 लाख रुपये की राशि खर्च की गई थी। अब इनमें से करीब 47 कैमरे बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव में काफी कैमरे खराब हो चुके हैं। केवल पांच कैमरे ही चालू हालात में बताए जा रहे हैं। ये कैमरे शहर में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अनाज मंडी, सभी मुख्य मार्ग, मुख्य बाजार, अस्पताल और अन्य स्थानों पर लगे थे। कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाना ही था, लेकिन नगर परिषद और पुलिस इस उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही है। इसके अलावा प्रतिदिन आधा दर्जन बाइक चोरी की घटनाएं हो रहीं हैं। इन वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के पास पुलिस नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा दो सितंबर को अंबाला रोड परम कॉलोनी और जाट कॉलेज से बाइक दो चोरी हुई।
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