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Kaithal News: कृषि विभाग के उप निदेशक की शिकायत पर कर्मचारी पर मामला दर्ज
Thu, 11 Jul 2024 06:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 11 Jul 2024 06:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कृषि विभाग कैथल में तैनात एक जिला स्तर के अधिकारी पर रिश्वत लेने संबंधी एक ऑडियो व रिश्वत की लिस्ट व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल होने के मामले में बुधवार को अब नया मोड़ आ गया। मामले में बर्खास्त किया गया लिपिक अब मीडिया के सामने आया है। इसके बाद कृषि विभाग के जिला उप निदेशक ने भी इस कर्मचारी की बोगस दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति का आरोप लगाकर सिविल लाइन थाना में शिकायत दी गई है। मामले में पुलिस ने कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर ली है।
सिविल लाइन थाना पुलिस में दी गई शिकायत में डीडीए बलवंत सिंह ने बताया कि पूंडरी निवासी प्रगट सिंह 16 अक्तूबर 2020 को कार्यालय में आत्मा स्कीम के तहत लिपिक के पद पर नियुक्त हुआ था। उसे विभाग की ओर से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से योग्यता से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया था। जब उसने इस पद के लिए अपेक्षित योग्यता से संबंधित प्रस्तुत प्रस्तुत किए तो दस्तावेज बोगस व जाली पाएगा। इसके बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर कार्यभार से मुक्त कर दिया था। उसने जो वेतन प्राप्त किया, वह भी जाली तरीके सम पाया। जबकि प्रगट सिंह कि इस पद के लिए पात्रता नहीं बनती थी इसलिए अनुरोध है कि इसके विरुद्ध बोगस में जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति लेने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह था पूरा मामला ः एक दिन पहले ही वाट्सएप ग्रुपों में कृषि विभाग के उपनिदेशक द्वारा रिश्वत लेने की एक ऑडियो व सूची वायरल हुई है। जारी की गई लिस्ट में चार हजार से लेकर 20 लाख रुपये तक की रिश्वत देने का जिक्र किय गया। आरोप लगाने वाले कर्मी का कहना था कि विभाग के कर्मचारियों कभी स्टॉक रजिस्टर पूरा न होने के नाम पर तो कभी दवाइयों के सैंपल लेने का डर दिखाकर रिश्वत लेते रहे हैं। यह भी सामने आया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों ने चीका में एक पेस्टीसाइड का गोदाम सील किया था। आरोप था कि इस गोदाम में नकली दवाइयां जमा की गई है। बाद में जब इस गोदाम को खोला गया तो उसमें से दवाइयां गायब मिली। आरोप है कि अधिकारियों ने किसी मृतक व्यक्ति के नाम किरायानामा संबंधी तस्दीकशुदा शपथ पत्र लेकर मामले को रफा दफा कर दिया।
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डीडीए ने कहा है कि जो डिग्री की है कि उन्होंने 2015 से 2018 तक डिग्री कंप्लीट की है। जबकि उस समय वे एक ठेकेदार के माध्यम से ही लगे थे। डीडीए जो भी मार्केट से लेन-देन करते थे तो उनसे रिश्वत की मांग करते थे। यह रिश्वत की मांग नई कंपनी आने के बाद उसके दस्तावेजों में कमी का भय दिखाकर लेते थे। उन्हें अब बर्खास्त कर दिया गया है।
किसानों ने की जांच की मांग ः इस मामले में भाकियू (चढूंनी) गुट ने भी सरकार से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाकियू के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि कृषि विभाग कार्यालय में तैनात रह चुके कर्मचारी ने सरेआम जिला कृषि अधिकारी पर पेस्टीसाइड विक्रेताओ से लाखों रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाए है। किसानों को नकली दवाई व पेस्टीसाइड बेचकर पूरे जिले में किस तरह आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। यदि पेस्टीसाइड या नकली दवाई बेचने के घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भाकियू (चढूनी) कृषि विभाग कैथल के कार्यालय पर प्रदर्शन करेगी।
इस मामले में पुलिस ने कर्मचारी प्रगट सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। मामले में आगामी जांच की जा रही है। जैसे ही कोई आरोप सिद्ध होगा तो आगामी कार्रवाई की जाएगी। - नवीन, संब इंस्पेक्टर, जांच अधिकारी, सिविल लाइन थाना, कैथल।
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कैथल। कृषि विभाग कैथल में तैनात एक जिला स्तर के अधिकारी पर रिश्वत लेने संबंधी एक ऑडियो व रिश्वत की लिस्ट व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल होने के मामले में बुधवार को अब नया मोड़ आ गया। मामले में बर्खास्त किया गया लिपिक अब मीडिया के सामने आया है। इसके बाद कृषि विभाग के जिला उप निदेशक ने भी इस कर्मचारी की बोगस दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति का आरोप लगाकर सिविल लाइन थाना में शिकायत दी गई है। मामले में पुलिस ने कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर ली है।
सिविल लाइन थाना पुलिस में दी गई शिकायत में डीडीए बलवंत सिंह ने बताया कि पूंडरी निवासी प्रगट सिंह 16 अक्तूबर 2020 को कार्यालय में आत्मा स्कीम के तहत लिपिक के पद पर नियुक्त हुआ था। उसे विभाग की ओर से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से योग्यता से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया था। जब उसने इस पद के लिए अपेक्षित योग्यता से संबंधित प्रस्तुत प्रस्तुत किए तो दस्तावेज बोगस व जाली पाएगा। इसके बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर कार्यभार से मुक्त कर दिया था। उसने जो वेतन प्राप्त किया, वह भी जाली तरीके सम पाया। जबकि प्रगट सिंह कि इस पद के लिए पात्रता नहीं बनती थी इसलिए अनुरोध है कि इसके विरुद्ध बोगस में जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति लेने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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यह था पूरा मामला ः एक दिन पहले ही वाट्सएप ग्रुपों में कृषि विभाग के उपनिदेशक द्वारा रिश्वत लेने की एक ऑडियो व सूची वायरल हुई है। जारी की गई लिस्ट में चार हजार से लेकर 20 लाख रुपये तक की रिश्वत देने का जिक्र किय गया। आरोप लगाने वाले कर्मी का कहना था कि विभाग के कर्मचारियों कभी स्टॉक रजिस्टर पूरा न होने के नाम पर तो कभी दवाइयों के सैंपल लेने का डर दिखाकर रिश्वत लेते रहे हैं। यह भी सामने आया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों ने चीका में एक पेस्टीसाइड का गोदाम सील किया था। आरोप था कि इस गोदाम में नकली दवाइयां जमा की गई है। बाद में जब इस गोदाम को खोला गया तो उसमें से दवाइयां गायब मिली। आरोप है कि अधिकारियों ने किसी मृतक व्यक्ति के नाम किरायानामा संबंधी तस्दीकशुदा शपथ पत्र लेकर मामले को रफा दफा कर दिया।
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डीडीए ने कहा है कि जो डिग्री की है कि उन्होंने 2015 से 2018 तक डिग्री कंप्लीट की है। जबकि उस समय वे एक ठेकेदार के माध्यम से ही लगे थे। डीडीए जो भी मार्केट से लेन-देन करते थे तो उनसे रिश्वत की मांग करते थे। यह रिश्वत की मांग नई कंपनी आने के बाद उसके दस्तावेजों में कमी का भय दिखाकर लेते थे। उन्हें अब बर्खास्त कर दिया गया है।
किसानों ने की जांच की मांग ः इस मामले में भाकियू (चढूंनी) गुट ने भी सरकार से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाकियू के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि कृषि विभाग कार्यालय में तैनात रह चुके कर्मचारी ने सरेआम जिला कृषि अधिकारी पर पेस्टीसाइड विक्रेताओ से लाखों रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाए है। किसानों को नकली दवाई व पेस्टीसाइड बेचकर पूरे जिले में किस तरह आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। यदि पेस्टीसाइड या नकली दवाई बेचने के घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भाकियू (चढूनी) कृषि विभाग कैथल के कार्यालय पर प्रदर्शन करेगी।
इस मामले में पुलिस ने कर्मचारी प्रगट सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। मामले में आगामी जांच की जा रही है। जैसे ही कोई आरोप सिद्ध होगा तो आगामी कार्रवाई की जाएगी। - नवीन, संब इंस्पेक्टर, जांच अधिकारी, सिविल लाइन थाना, कैथल।