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Kaithal News: सबूत न देने पर मुकदमा किया खारिज, 4.50 लाख में मकान खरीदने का किया था दावा
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कैथल। गांव पाड़ला निवासी रमेश ने धूप सिंह पर 4.50 लाख रुपये लेकर मकान बेचने का समझौता करने के आरोप में अदालत ने मुकदमा खारिज कर दिया। सिविल जज सीनियर डिविजन डॉ. अमन इंदर सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि वादी अपने दावे के समर्थन में कोई गवाह या साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वह खुद भी गवाही के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ।
रमेश ने मुकदमे में बताया था कि पड़ला गांव की जाट पट्टी में दो कमरों, बरामदे और रसोई वाला मकान है। उसके अनुसार धूप सिंह ने 19 दिसंबर 2018 को यह मकान 4.50 लाख रुपये में बेचने का समझौता किया था। उसी दिन उसने पूरी रकम भी दे दी थी। रमेश का दावा था कि अप्रैल 2019 तक उसे मकान का कब्जा दे दिया गया था। इसके बाद बिक्री विलेख उसके नाम कराने के लिए कहने पर धूप सिंह टालमटोल करता रहा। रमेश ने बताया कि उसने 18 मई 2019 को धूप सिंह को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद उसने अदालत से मकान की बिक्री उसके पक्ष में कराने और धूप सिंह को संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को बेचने से रोकने की मांग की।
धूप सिंह ने कहा- न समझौता किया, न रकम ली
धूप सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा था कि उसने मकान बेचने का कोई समझौता नहीं किया और न ही 4.50 लाख रुपये लिए। उसने शपथपत्र को फर्जी बताया। उसका कहना था कि मकान पैतृक है और वह अकेला मालिक नहीं है। उसके तीन भाई भी इसके सह-मालिक हैं। अदालत ने कहा कि रमेश को साक्ष्य पेश करने के कई अवसर दिए गए लेकिन वह कोई गवाह पेश नहीं कर सका। वह खुद भी गवाही के लिए पेश नहीं हुआ। साक्ष्य के अभाव में उसके दावे साबित नहीं हो सके। अदालत ने दोनों मुख्य मुद्दे रमेश के खिलाफ तय किए और मुकदमा लागत सहित खारिज कर दिया। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया गया।
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रमेश ने मुकदमे में बताया था कि पड़ला गांव की जाट पट्टी में दो कमरों, बरामदे और रसोई वाला मकान है। उसके अनुसार धूप सिंह ने 19 दिसंबर 2018 को यह मकान 4.50 लाख रुपये में बेचने का समझौता किया था। उसी दिन उसने पूरी रकम भी दे दी थी। रमेश का दावा था कि अप्रैल 2019 तक उसे मकान का कब्जा दे दिया गया था। इसके बाद बिक्री विलेख उसके नाम कराने के लिए कहने पर धूप सिंह टालमटोल करता रहा। रमेश ने बताया कि उसने 18 मई 2019 को धूप सिंह को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद उसने अदालत से मकान की बिक्री उसके पक्ष में कराने और धूप सिंह को संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को बेचने से रोकने की मांग की।
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धूप सिंह ने कहा- न समझौता किया, न रकम ली
धूप सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा था कि उसने मकान बेचने का कोई समझौता नहीं किया और न ही 4.50 लाख रुपये लिए। उसने शपथपत्र को फर्जी बताया। उसका कहना था कि मकान पैतृक है और वह अकेला मालिक नहीं है। उसके तीन भाई भी इसके सह-मालिक हैं। अदालत ने कहा कि रमेश को साक्ष्य पेश करने के कई अवसर दिए गए लेकिन वह कोई गवाह पेश नहीं कर सका। वह खुद भी गवाही के लिए पेश नहीं हुआ। साक्ष्य के अभाव में उसके दावे साबित नहीं हो सके। अदालत ने दोनों मुख्य मुद्दे रमेश के खिलाफ तय किए और मुकदमा लागत सहित खारिज कर दिया। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया गया।
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