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Kaithal News: दो करोड़ चार लाख 38 हजार 438 गैलन बढ़ेगी पेयजल स्टोरेज टैंकों की क्षमता
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जनस्वास्थ्य विभाग ने प्योदा रोड पर बनेे वाटर टैंकों की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए टेंडर खोलने प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब अधिकारियों को केवल अलॉटमेंट का इंतजार है। इसके बाद टैंकों की क्षमता बढ़ाने का कार्य शुरू होगा, जिससे शहरवासियों को पूरे महीने स्वच्छ नहरी पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये लागत की संभावना है।
गौरतलब है कि इन टैंकों में सिरसा ब्रांच नहर से पानी आता है। अब 32 दिन बाद नहर में पानी आता है। टैंकों की क्षमता दो करोड़ चार लाख 38 हजार 438 गैलन अतिरिक्त बढ़ाई जाएगी। इससे इनमें 32 से 33 दिन की खपत के लिए पानी स्टोर हो सकेगा। यह पानी नहर में सप्लाई आने तक पर्याप्त रहेगा। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले यह कार्य करने का विभाग का प्रयास है ताकि भीषण गर्मी में लोगों को पानी की किल्लत न झेलनी पड़े।
क्यों पड़ी आवश्यकता
अगर टैंकों में पानी समाप्त होने के समय तक नहर में पानी न आए तो शहरवासियों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। विभाग को मजबूरन नहरी पानी की सप्लाई में कटौती करनी पड़ती है। इससे पुराने शहर की कॉलोनियों में पानी नहीं पहुंच पाता है। शहरवासियों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है। पेयजल के लिए ट्यूबवेलों और सबमर्सीबलों पर निर्भर रहना पड़ता है। शहरवासियों को भी जल्द इस किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद जगी है।
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जिस समय से टैंक बनाए गए, उस समय नहरी पानी की सप्लाई 22 दिन बाद आती थी। नहर में पानी आने तक टैंकों में भी पर्याप्त पानी रहता था। बाद में नहर में पानी की सप्लाई 25 दिन के बाद आने लगी। इसके साथ ही शहर में गर्मी के मौसम में पेयजल की लागत व समस्या बढ़ने लगी। अब सप्लाई में एक माह से ज्यादा देरी होने के कारण लोग रोजाना विभाग को शिकायत कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए विभाग ने स्टोरेज क्षमता बढ़ने का निर्णय लिया है।
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ कर्ण बहल ने बताया कि इस कार्य के लिए टेंडर खुल चुका है। विभाग का प्रयास है कि जल्द से जल्द कार्य पूरा हो, ताकि शहरवासियों को जल्द सुविधा मिल सके। टैंकों की क्षमता बढऩे के बाद शहर में नहरी पानी की किल्लत नहीं रहेगी।
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गौरतलब है कि इन टैंकों में सिरसा ब्रांच नहर से पानी आता है। अब 32 दिन बाद नहर में पानी आता है। टैंकों की क्षमता दो करोड़ चार लाख 38 हजार 438 गैलन अतिरिक्त बढ़ाई जाएगी। इससे इनमें 32 से 33 दिन की खपत के लिए पानी स्टोर हो सकेगा। यह पानी नहर में सप्लाई आने तक पर्याप्त रहेगा। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले यह कार्य करने का विभाग का प्रयास है ताकि भीषण गर्मी में लोगों को पानी की किल्लत न झेलनी पड़े।
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क्यों पड़ी आवश्यकता
अगर टैंकों में पानी समाप्त होने के समय तक नहर में पानी न आए तो शहरवासियों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। विभाग को मजबूरन नहरी पानी की सप्लाई में कटौती करनी पड़ती है। इससे पुराने शहर की कॉलोनियों में पानी नहीं पहुंच पाता है। शहरवासियों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है। पेयजल के लिए ट्यूबवेलों और सबमर्सीबलों पर निर्भर रहना पड़ता है। शहरवासियों को भी जल्द इस किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद जगी है।
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जिस समय से टैंक बनाए गए, उस समय नहरी पानी की सप्लाई 22 दिन बाद आती थी। नहर में पानी आने तक टैंकों में भी पर्याप्त पानी रहता था। बाद में नहर में पानी की सप्लाई 25 दिन के बाद आने लगी। इसके साथ ही शहर में गर्मी के मौसम में पेयजल की लागत व समस्या बढ़ने लगी। अब सप्लाई में एक माह से ज्यादा देरी होने के कारण लोग रोजाना विभाग को शिकायत कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए विभाग ने स्टोरेज क्षमता बढ़ने का निर्णय लिया है।
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ कर्ण बहल ने बताया कि इस कार्य के लिए टेंडर खुल चुका है। विभाग का प्रयास है कि जल्द से जल्द कार्य पूरा हो, ताकि शहरवासियों को जल्द सुविधा मिल सके। टैंकों की क्षमता बढऩे के बाद शहर में नहरी पानी की किल्लत नहीं रहेगी।