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Kaithal News: नहरी पेयजल आपूर्ति समस्या है बड़ा मुद्दा
Thu, 05 Sep 2024 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Sep 2024 03:36 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इस विधानसभा चुनाव में शहर में नहरी पानी की पेयजल आपूर्ति की समस्या बड़ा मुद्दा है। हर साल गर्मी में नहरी पानी न होने से लोगों को काफी परेशानियां होती हैं। सिरसा ब्रांच के माध्यम से 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से नहरी पानी की सप्लाई की जाती है।
शहर के प्योदा रोड पर टैंक का निर्माण कार्य शुरू हुए दो साल हो चुके हैं लेकिन यह पूरा नहीं हो सका है। वहीं, शहर की आबादी लगभग दो लाख के करीब पहुंच चुकी है। बढ़ती आबादी के साथ पेयजल की मांग भी बढ़ रही है।
ज्यादातर आबादी भूमिगत जल के स्रोतों पर निर्भर है। न्यू प्योदा रोड स्थित जल घर की क्षमता बढ़ाने के लिए अभी दो नए टैंक बनवाए जा रहे हैं, जिससे नहर में पानी आने में देरी की स्थिति में शहर की जलापूर्ति में कटौती न करनी पड़े। ऐसा अक्सर होता है कि जब नहर में पानी का रोटेशन लंबा हो जाता है, टैंकों में कम पानी रहने से जलापूर्ति एक समय करनी पड़ती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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घट रहा जलस्तर ः भूमिगत जल का अत्यधिक उपयोग न केवल इसके स्तर को घटा रहा है, बल्कि इसकी गुणवत्ता में भी गिरावट ला रहा है। कैथल में भूजल स्तर की स्थिति लगातार खराब हो रही है। आधे गांव रेड जोन में हैं और कई गांवों में भूजल स्तर 60 मीटर से भी नीचे पहुंच गया है। कई इलाकों में पानी में फ्लोराइड और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिससे लोग विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
पानी की गुणवत्ता की स्थिति तब और भी खराब हो जाती है जब जर्जर पाइप लाइन कहीं से टूट जाती है। पुराने शहर के इलाकों में पाइपलाइनों की स्थिति बहुत खराब है। जगह-जगह से पाइपलाइन लीक कर रही हैं, जिससे न केवल जल की बर्बादी हो रही है, बल्कि इसमें गंदगी और सीवरेज का मिश्रण भी हो रहा है।
आबादी बढ़ी, जल संसाधन नहीं
कैथल शहर की आबादी पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन जल संसाधनों के विस्तार और उनकी देखभाल पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। पहले जहां नहरी पानी और भूमिगत जल की आपूर्ति पर्याप्त होती थी, वहीं अब मांग बढ़ने से जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन की उम्र काफी हो चुकी है और इनकी मरम्मत के बजाय अब इन्हें बदलने की आवश्यकता है।
पुराने पाइपलाइन में लीकेज की समस्या बढ़ गई है, जिससे जल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नई और बेहतर गुणवत्ता वाली पाइपलाइन लगाकर ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। कैथल के बाहरी बस्तियों में पेयजल की समस्या सबसे ज्यादा है। यहां पानी की आपूर्ति में अनियमितता है और कई बार लोग घंटों पानी के लिए इंतजार करते रहते हैं।
नई बस्तियों में जल संसाधन और पाइपलाइन नेटवर्क की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है। शहर के कई हिस्सों में सीवरेज और पेयजल की पाइपलाइन एक-दूसरे के साथ-साथ बिछी हुई हैं, जिससे जल प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में लीकेज होने पर सीवरेज का गंदा पानी पेयजल में मिल जाता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
शहर में पीने के पानी की कोई किल्लत नहीं है। जिन कॉलोनियों में दिक्कत थी, वहां नए ट्यूबवेल लगाए जा चुके हैं। 47 ट्यूबवेल से सप्लाई शहर में दी जा रही है। वहीं नहरी पानी स्टोरेज के लिए दो नए वाटर टैंक तैयार किए जा रहे हैं। इस परियोजना पर नौ करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च होगी। इसके बाद पानी की किल्लत नहीं रहेगी। पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित परीक्षण किए जा रहे हैं और जहां कहीं भी समस्याएं आती हैं, वहां तत्काल सुधार कर दिया जाता है। - गोपाल वेद, एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग
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कैथल। इस विधानसभा चुनाव में शहर में नहरी पानी की पेयजल आपूर्ति की समस्या बड़ा मुद्दा है। हर साल गर्मी में नहरी पानी न होने से लोगों को काफी परेशानियां होती हैं। सिरसा ब्रांच के माध्यम से 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से नहरी पानी की सप्लाई की जाती है।
शहर के प्योदा रोड पर टैंक का निर्माण कार्य शुरू हुए दो साल हो चुके हैं लेकिन यह पूरा नहीं हो सका है। वहीं, शहर की आबादी लगभग दो लाख के करीब पहुंच चुकी है। बढ़ती आबादी के साथ पेयजल की मांग भी बढ़ रही है।
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ज्यादातर आबादी भूमिगत जल के स्रोतों पर निर्भर है। न्यू प्योदा रोड स्थित जल घर की क्षमता बढ़ाने के लिए अभी दो नए टैंक बनवाए जा रहे हैं, जिससे नहर में पानी आने में देरी की स्थिति में शहर की जलापूर्ति में कटौती न करनी पड़े। ऐसा अक्सर होता है कि जब नहर में पानी का रोटेशन लंबा हो जाता है, टैंकों में कम पानी रहने से जलापूर्ति एक समय करनी पड़ती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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घट रहा जलस्तर ः भूमिगत जल का अत्यधिक उपयोग न केवल इसके स्तर को घटा रहा है, बल्कि इसकी गुणवत्ता में भी गिरावट ला रहा है। कैथल में भूजल स्तर की स्थिति लगातार खराब हो रही है। आधे गांव रेड जोन में हैं और कई गांवों में भूजल स्तर 60 मीटर से भी नीचे पहुंच गया है। कई इलाकों में पानी में फ्लोराइड और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिससे लोग विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
पानी की गुणवत्ता की स्थिति तब और भी खराब हो जाती है जब जर्जर पाइप लाइन कहीं से टूट जाती है। पुराने शहर के इलाकों में पाइपलाइनों की स्थिति बहुत खराब है। जगह-जगह से पाइपलाइन लीक कर रही हैं, जिससे न केवल जल की बर्बादी हो रही है, बल्कि इसमें गंदगी और सीवरेज का मिश्रण भी हो रहा है।
आबादी बढ़ी, जल संसाधन नहीं
कैथल शहर की आबादी पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन जल संसाधनों के विस्तार और उनकी देखभाल पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। पहले जहां नहरी पानी और भूमिगत जल की आपूर्ति पर्याप्त होती थी, वहीं अब मांग बढ़ने से जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन की उम्र काफी हो चुकी है और इनकी मरम्मत के बजाय अब इन्हें बदलने की आवश्यकता है।
पुराने पाइपलाइन में लीकेज की समस्या बढ़ गई है, जिससे जल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नई और बेहतर गुणवत्ता वाली पाइपलाइन लगाकर ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। कैथल के बाहरी बस्तियों में पेयजल की समस्या सबसे ज्यादा है। यहां पानी की आपूर्ति में अनियमितता है और कई बार लोग घंटों पानी के लिए इंतजार करते रहते हैं।
नई बस्तियों में जल संसाधन और पाइपलाइन नेटवर्क की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है। शहर के कई हिस्सों में सीवरेज और पेयजल की पाइपलाइन एक-दूसरे के साथ-साथ बिछी हुई हैं, जिससे जल प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में लीकेज होने पर सीवरेज का गंदा पानी पेयजल में मिल जाता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
शहर में पीने के पानी की कोई किल्लत नहीं है। जिन कॉलोनियों में दिक्कत थी, वहां नए ट्यूबवेल लगाए जा चुके हैं। 47 ट्यूबवेल से सप्लाई शहर में दी जा रही है। वहीं नहरी पानी स्टोरेज के लिए दो नए वाटर टैंक तैयार किए जा रहे हैं। इस परियोजना पर नौ करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च होगी। इसके बाद पानी की किल्लत नहीं रहेगी। पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित परीक्षण किए जा रहे हैं और जहां कहीं भी समस्याएं आती हैं, वहां तत्काल सुधार कर दिया जाता है। - गोपाल वेद, एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग