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ट्रांसपोर्ट सेवा थमने से रूका उद्योग का पहिया
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business stop
- फोटो : Kaithal
किसान आंदोलन ने उद्योगों में तैयार होने वाले उत्पादों की सेल और कीमतों पर प्रभाव डाला है। आंदोलन के चलते उद्योगों में कार्य धीमा हो गया गया है और तैयार उत्पादों के खरीदार भी घट गए हैं। कृषि उपकरण, पाइप इंडस्ट्री, चादर-जाली और चावल उद्योगों पर करीब 40 से लेकर 50 प्रतिशत तक काम घटा है।
ट्रांसपोर्ट नहीं मिलने से कच्चे माल की सप्लाई बंद- हर प्रकार के उद्योगों के लिए जिले में कच्चा माल ज्यादातर दिल्ली और अन्य प्रदेशों से आता है, जो वाया दिल्ली होकर ही आता है। दिल्ली के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा न मिलना भी उद्योगपतियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। इससे कच्चा माल लाने में भी दिक्कतें आ रही सामने आ रही है।
40 से 50 प्रतिशत तक घटा टर्नओवर- जिन उद्योगों में तैयार होने के बाद हर माह माल 12 से 15 लाख रुपये तक सेल होता था, वह अब घटकर पांच से छह लाख रुपये तक रह गया है। उद्योगपतियों का कहना है कि अगर किसानों की समस्या का कोई समाधान होता है, तभी उद्योगों में काम पूरी तरह से पटरी पर लौटेगा। फिलहाल तो कर्मचारियों का वेतन भी बड़ी मुश्किल से पूरा करना पड़ रहा है, बचत की तो कोई संभावना ही नहीं है।
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गुरु नानक फाउंडरी एंड इंजीनियरिंग वर्कस संचालक सरदार बजिंद्र सिंह बिल्ला ने बताया कि वे दिल्ली से रॉ मेटीरियल मंगवाकर ट्रैक्टर के पार्ट और कृषि उपकरणों के पार्ट तैयार करते हैं। असल तो कच्चा माल आ ही नहीं रहा। पहले लॉकडाउन का असर रहा अब किसान वैसे ही खरीद नहीं कर रहे हैं।
आशीर्वाद पाइप उद्योग संचालक अशोक कुमार ने बताया कि किसानों आंदोलन का असर कृषि से जुड़े सभी उद्योगों पर पूरी तरह देखने को मिल रहा है। नया माल आ नहीं रहा, पुराने माल से ही पाइप वगैरह तैयार कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट नहीं मिलने के कारण कैंसल किया ऑर्डर- मनचंदा इंटरप्राइजिज के मालिक राजेश मनचंदा ने कहा कि पिछले सप्ताह ही उन्होंने जाली व चादरें तैयार करने के लिए कच्चे माल की सप्लाई मंगवाई थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट की दिक्कत के कारण ऑर्डर कैंसल करना पड़ा है। अब तो तभी कच्चा माल मंगवाने का फायदा है, जब तैयार माल की बिक्री सही होगी। फिलहाल जो भी तैयार कर रहे हैं, वह पहले मंगवाए जा चुके माल से तैयार किया जा रहा है।
राइस मिलर अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि किसान आंदोलन का चावल उद्योग पर केवल निर्यात पर प्रभाव पड़ा है। ट्रांसपोर्ट को लेकर दिक्कतें आ रही हैं। बाहर निर्यात करने के लिए बड़े वाहन नहीं मिलना बड़ी समस्या है। मिलों में अन्य प्रकार के सभी कार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं।
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ट्रांसपोर्ट नहीं मिलने से कच्चे माल की सप्लाई बंद- हर प्रकार के उद्योगों के लिए जिले में कच्चा माल ज्यादातर दिल्ली और अन्य प्रदेशों से आता है, जो वाया दिल्ली होकर ही आता है। दिल्ली के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा न मिलना भी उद्योगपतियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। इससे कच्चा माल लाने में भी दिक्कतें आ रही सामने आ रही है।
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40 से 50 प्रतिशत तक घटा टर्नओवर- जिन उद्योगों में तैयार होने के बाद हर माह माल 12 से 15 लाख रुपये तक सेल होता था, वह अब घटकर पांच से छह लाख रुपये तक रह गया है। उद्योगपतियों का कहना है कि अगर किसानों की समस्या का कोई समाधान होता है, तभी उद्योगों में काम पूरी तरह से पटरी पर लौटेगा। फिलहाल तो कर्मचारियों का वेतन भी बड़ी मुश्किल से पूरा करना पड़ रहा है, बचत की तो कोई संभावना ही नहीं है।
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गुरु नानक फाउंडरी एंड इंजीनियरिंग वर्कस संचालक सरदार बजिंद्र सिंह बिल्ला ने बताया कि वे दिल्ली से रॉ मेटीरियल मंगवाकर ट्रैक्टर के पार्ट और कृषि उपकरणों के पार्ट तैयार करते हैं। असल तो कच्चा माल आ ही नहीं रहा। पहले लॉकडाउन का असर रहा अब किसान वैसे ही खरीद नहीं कर रहे हैं।
आशीर्वाद पाइप उद्योग संचालक अशोक कुमार ने बताया कि किसानों आंदोलन का असर कृषि से जुड़े सभी उद्योगों पर पूरी तरह देखने को मिल रहा है। नया माल आ नहीं रहा, पुराने माल से ही पाइप वगैरह तैयार कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट नहीं मिलने के कारण कैंसल किया ऑर्डर- मनचंदा इंटरप्राइजिज के मालिक राजेश मनचंदा ने कहा कि पिछले सप्ताह ही उन्होंने जाली व चादरें तैयार करने के लिए कच्चे माल की सप्लाई मंगवाई थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट की दिक्कत के कारण ऑर्डर कैंसल करना पड़ा है। अब तो तभी कच्चा माल मंगवाने का फायदा है, जब तैयार माल की बिक्री सही होगी। फिलहाल जो भी तैयार कर रहे हैं, वह पहले मंगवाए जा चुके माल से तैयार किया जा रहा है।
राइस मिलर अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि किसान आंदोलन का चावल उद्योग पर केवल निर्यात पर प्रभाव पड़ा है। ट्रांसपोर्ट को लेकर दिक्कतें आ रही हैं। बाहर निर्यात करने के लिए बड़े वाहन नहीं मिलना बड़ी समस्या है। मिलों में अन्य प्रकार के सभी कार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं।