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Kaithal News: गाजर की बंपर पैदावार से गिरे दाम, किसानों में चिंता
Wed, 21 Jan 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 21 Jan 2026 01:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गाजर की बंपर पैदावार के चलते इसके दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। नजदीकी सब्जी मंडियों में लगातार अधिक आवक होने से गाजर की कीमत 20 रुपये से घटकर मात्र 10 रुपये प्रति किलो रह गई है। कीमतों में आई इस तेज गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मौजूदा भाव पर उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान गाजर की खेती करते हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन अच्छा हुआ, लेकिन खेतों से सीधे मंडियों में भारी मात्रा में गाजर पहुंचने से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई। मांग अपेक्षाकृत कम रहने के कारण दामों पर दबाव पड़ा है। किसान अपनी परेशानी किसी से साझा भी नहीं कर पा रहे, जबकि आर्थिक नुकसान उनके लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है।
किसानों का कहना है कि गाजर की खेती में बीज, खाद, दवाइयां, सिंचाई और मजदूरी पर अच्छी-खासी लागत आती है।
इसके अलावा फसल को मंडी तक लाने में भी खर्च होता है। 10 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने से उन्हें सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि सब्जियों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ जमीनी स्तर पर मिलना चाहिए, ताकि लागत निकल सके। वहीं, जहां उपभोक्ताओं को सस्ते दामों का लाभ मिल रहा है, वहीं किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
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सब्जी मंडी में आवक ज्यादा, मांग कम
सब्जी मंडी के दुकानदार संदीप ने बताया कि इन दिनों मंडी में गाजर की आवक काफी अधिक है। क्षेत्र में अधिक खेती होने के कारण बाजार में गाजर की भरमार हो गई है, जिससे कीमतें लगातार गिर रही हैं। वर्तमान में गाजर 10 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है, जबकि पहले इसके दाम कहीं बेहतर थे।
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कैथल। गाजर की बंपर पैदावार के चलते इसके दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। नजदीकी सब्जी मंडियों में लगातार अधिक आवक होने से गाजर की कीमत 20 रुपये से घटकर मात्र 10 रुपये प्रति किलो रह गई है। कीमतों में आई इस तेज गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मौजूदा भाव पर उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान गाजर की खेती करते हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन अच्छा हुआ, लेकिन खेतों से सीधे मंडियों में भारी मात्रा में गाजर पहुंचने से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई। मांग अपेक्षाकृत कम रहने के कारण दामों पर दबाव पड़ा है। किसान अपनी परेशानी किसी से साझा भी नहीं कर पा रहे, जबकि आर्थिक नुकसान उनके लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है।
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किसानों का कहना है कि गाजर की खेती में बीज, खाद, दवाइयां, सिंचाई और मजदूरी पर अच्छी-खासी लागत आती है।
इसके अलावा फसल को मंडी तक लाने में भी खर्च होता है। 10 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने से उन्हें सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि सब्जियों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ जमीनी स्तर पर मिलना चाहिए, ताकि लागत निकल सके। वहीं, जहां उपभोक्ताओं को सस्ते दामों का लाभ मिल रहा है, वहीं किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
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सब्जी मंडी में आवक ज्यादा, मांग कम
सब्जी मंडी के दुकानदार संदीप ने बताया कि इन दिनों मंडी में गाजर की आवक काफी अधिक है। क्षेत्र में अधिक खेती होने के कारण बाजार में गाजर की भरमार हो गई है, जिससे कीमतें लगातार गिर रही हैं। वर्तमान में गाजर 10 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है, जबकि पहले इसके दाम कहीं बेहतर थे।