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Kaithal News: मां महागौरी की पूजा के साथ व्रत का पारण

Fri, 27 Mar 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 27 Mar 2026 12:14 AM IST
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Breaking the fast with the worship of Maa Mahagauri
कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
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 कैथल/कलायत/ढांड। चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर वीरवार को क्षेत्रभर के मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत का पारण किया। सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

मंदिरों में विशेष पूजन, हवन और कन्या पूजन के आयोजन किए गए। हालांकि इस बार कंजक पूजन के लिए छोटी कन्याओं की कमी श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी। लोग सुबह से ही कन्याओं की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए, लेकिन कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना अनुसार पूजन नहीं कर सके।
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मंदिर के पुजारी संजय गौतम ने बताया कि मां महागौरी को देवी पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है, जो पवित्रता, सौंदर्य और शक्ति की प्रतीक हैं। नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिसमें अष्टमी को महागौरी और नवमी को मां सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि इस बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ने के कारण अधिकांश श्रद्धालुओं ने अष्टमी पर ही कंजक पूजन कर व्रत संपन्न किए। वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11:48 बजे तक रही, जबकि उदयातिथि के आधार पर 26 मार्च को महाअष्टमी का व्रत रखा गया।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाअष्टमी के दिन मां महागौरी की आराधना करने से कष्टों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन, भोजन और उपहार देने की परंपरा है।

कन्याओं की कमी से बदली परंपरा की तस्वीर : इस बार क्षेत्र में कन्याओं की कमी साफ तौर पर देखने को मिली। आमतौर पर श्रद्धालु स्कूलों या आसपास के घरों में जाकर कंजक पूजन करते हैं, लेकिन अवकाश के चलते स्कूल बंद रहने से कंजकों की उपलब्धता कम रही। जहां कहीं कन्याओं के समूह दिखाई दिए, वहां श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कंजकाएं भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर प्रसाद ग्रहण करती रहीं और यजमानों को आशीर्वाद देती आगे बढ़ती रहीं। ढांड क्षेत्र में भी यही स्थिति रही, जहां लोग घर-घर जाकर कन्याओं की तलाश करते दिखे।


राजौंद में पूर्णाहुति के साथ सतचंडी यज्ञ का समापन

राजौंद। नगर स्थित बाबा बहादुर वन मंदिर में चल रहा आठ दिवसीय सतचंडी यज्ञ विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। समापन अवसर पर हवन और कन्या पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर के महंत तेजगिरी जी व आचार्य बृज भूषण हरित ने बताया कि 19 मार्च से सात ब्राह्मणों द्वारा सतचंडी पाठ का शुभारंभ किया गया था, जो आठ दिनों तक निरंतर चलता रहा। वीरवार को दुर्गा अष्टमी के अवसर पर हवन के साथ यज्ञ का विधिवत समापन किया गया। इस अवसर पर पंडित बृजभूषण हरित, पंडित धर्मेंद्र हरित, पंडित रविश्याम कौशल, पंडित दीपक हरित, पंडित मदन हरित, पंडित महावीर दीक्षित, पंडित लवली हरित मौजूद रहे। संवाद

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

कंजकाओं को भोजन करवाते श्रद्धालु

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