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बेवजह परेशान कर रहे हैं बैंक अधिकारी
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 22 Dec 2016 12:12 AM IST
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बैंकों में उमड़ी भारी भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी के बाद अब तक बैंकों से जहां नकदी निकलवाने के लिए परेशानी आ रही थीं, वहीं अब जाम करवाना भी मुश्किल हो गया है। बैंकों में 5000 रुपये से अधिक की नकदी जमा करवाने पर बैंक अधिकारी घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं कि उसने अभी तक किसी बैंक खाते में प्रतिबंधित नोटों की करेंसी जमा नहीं करवाई है। साथ ही उसे देरी से नकदी जमा करवाने का कारण भी बताना पड़ रहा है।
बुधवार को बैंकों में रुपये जमा करवाने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। शहर के अधिकतर बैंकों में लोग पांच हजार रुपये से अधिक जमा करवाने के लिए लाइनों में लगे रहे। जिन लोगों ने पांच हजार से अधिक रुपये जमा करवाए। उन्हें बैंक को पैसे जमा करवाने के कारण बताना पड़ा और उसके लिए घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। जिसमें उनसे लिखवाया जा रहा है कि उसने अभी तक यह राशि क्यों नहीं जमा करवाई और साथ ही उसने अभी तक प्रतिबंधित नोटों की राशि किसी अन्य बैंक में जमा नहीं करवाई।
शहर के अंबाला रोड स्थित पीएनबी मेन ब्रांच, कॉरपोरेशन, यूनियन, ओबीसी, इलाहाबाद बैंक, जींद रोड स्थित एसबीआई मेन ब्रांच, करनाल रोड स्थित एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा में लंच के बाद ही लोगों को भीड़ कम हो गई। जबकि एचडीएफसी बैंक में लंच के बाद भी लाइनें कम नहीं हुई।
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एसबीआई मेन ब्रांच में गांव बाता से रुपये जमा करवाने आए किसान सुरेंद्र ने बताया कि वह भैंसों का व्यापारी है। साथ में खेती भी करता है। भैंस बेचने पर एक ग्राहक ने 25 हजार रुपये के पुराने नोट दे दिए थे। जिसे जमा करवाने के लिए वह बैंक में पहुंचा। उसने बताया कि बैंक कर्मियों ने उससे जवाबदेही के रूप में एक फार्म भरवाया। जिसमें इसके कारणों का ब्योरा दिया गया।
आईसीआईसीआई बैंक में रुपये जमा करवाने आए गांव कसान वासी मोहन ने बताया कि उसने डेढ़ महीना पहले 50 हजार रुपये निकलवाए थे, जिसमें कुछ पुराने नोट भी बच गए थे। लेकिन अपने ही रुपये जमा करवाने के लिए इतनी मशक्कतें करनी पड़ी है। सरकार आए दिन नियमों को बदल रहे हैं। जिससे आम जनता काफी परेशानियां झेल रही हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
बैंक वालों ने नहीं लिए 10 रुपये के सिक्के
गांव मानस वासी धनपत ने बताया कि वह सेंट्रल बैंक में रुपये जमा करवाने के लिए आया था। जिसमें करीब 600 रुपये के 10-10 के सिक्के थे। लेकिन बैंक वालों ने उसके 10 रुपये के सिक्के जमा नहीं किये। जिससे काफी परेशानी हुई।
बैंकों में आने लगे है पांच सौ रुपये के नए नोट
बैंकों में अब पांच सौ रुपये के नोट आने लगे हैं। जिससे अब लोगों को कुछ ही दिनों में राहत मिलने के आसार है। कॉरपोरेशन बैंक में पेंशन लेने वाले लोगों को पांच सौ रुपये के नए नोट दिए गए।
एटीएम में भी मिली पर्याप्त नकदी
शहर के बैंकों में जहां लंच टाइम के बाद ही लोगों की भीड़ कम हो रही हैं। वहीं अब शहर के एटीएम में लोगों की जरूरत के अनुसार नकदी डालने से लोगों को रुपये मिलने लगे हैं। शहर में अधिकतर एटीएम चले। जिससे लोगों को राहत महसूस हुई। शहर में ढांड रोड स्थित आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, करनाल रोड पर एसबीआई, एचडीएफसी, एक्सिस और पीएनबी के एटीएम में पर्याप्त नकदी रही। जिससे लोगों को रुपये मिले।
नोटबंदी के कारण आढ़तियों व मजदूरों को नहीं मिल रहे पैसे, परेशान
धान की खरीद को बंद हुए करीब दो माह से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक खरीद एजेंसियों के द्वारा आढ़तियों को आढ़त, मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गई है। जिससे व्यापारियों व मजदूरों में गहरा रोष है। अनाज मंडी के प्रधान रणधीर सिंह फौजी ने बताया कि उनकी मंडी से हरियाणा वेयर हाऊस तथा हेफेड़ के द्वारा किसानों की धान की खरीद की थी। मंडी में लगभग 50 हजार से अधिक धान इन एजेंसियों के द्वारा खरीद किया गया। जिसकी आढ़त लगभग दस लाख, आई फार्म की मजदूरी लगभग 2 लाख 25 हजार की एजेंसियों के द्वारा नही दी गई। इतना ही नही खरीद करने के बाद, इन खरीद एजेंसियों के द्वारा लदान का कार्य भी आढ़तियों के मजदूरों से करवाया गया। जो लगभग एक लाख बनता है।
मंडी प्रधान रणधीर सिंह फौजी, आढ़ती रामकुमार, मोहन लाल, ईशवर, दिलबाग ने मांग की कि उनको उनकी आढ़त, मजदूरों को मजदूरी लदान सहित शीघ्र दी जाये।
हेफेड के डीएम एमएल पासवान ने बताया कि पैसे आ गये और मनेजरों के पास भेज दिये है। एक दो दिन में आढ़त व मजदूरी जिला में सभी जगह मिल जायेगी। लदान का कार्य जहां आढ़तियों के मजदूरों ने किया वह भी मिल जायेगा। यदि किसी को कोई परेशानी हो तो उनसे संपर्क कर सकते है।
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बुधवार को बैंकों में रुपये जमा करवाने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। शहर के अधिकतर बैंकों में लोग पांच हजार रुपये से अधिक जमा करवाने के लिए लाइनों में लगे रहे। जिन लोगों ने पांच हजार से अधिक रुपये जमा करवाए। उन्हें बैंक को पैसे जमा करवाने के कारण बताना पड़ा और उसके लिए घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। जिसमें उनसे लिखवाया जा रहा है कि उसने अभी तक यह राशि क्यों नहीं जमा करवाई और साथ ही उसने अभी तक प्रतिबंधित नोटों की राशि किसी अन्य बैंक में जमा नहीं करवाई।
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शहर के अंबाला रोड स्थित पीएनबी मेन ब्रांच, कॉरपोरेशन, यूनियन, ओबीसी, इलाहाबाद बैंक, जींद रोड स्थित एसबीआई मेन ब्रांच, करनाल रोड स्थित एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा में लंच के बाद ही लोगों को भीड़ कम हो गई। जबकि एचडीएफसी बैंक में लंच के बाद भी लाइनें कम नहीं हुई।
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एसबीआई मेन ब्रांच में गांव बाता से रुपये जमा करवाने आए किसान सुरेंद्र ने बताया कि वह भैंसों का व्यापारी है। साथ में खेती भी करता है। भैंस बेचने पर एक ग्राहक ने 25 हजार रुपये के पुराने नोट दे दिए थे। जिसे जमा करवाने के लिए वह बैंक में पहुंचा। उसने बताया कि बैंक कर्मियों ने उससे जवाबदेही के रूप में एक फार्म भरवाया। जिसमें इसके कारणों का ब्योरा दिया गया।
आईसीआईसीआई बैंक में रुपये जमा करवाने आए गांव कसान वासी मोहन ने बताया कि उसने डेढ़ महीना पहले 50 हजार रुपये निकलवाए थे, जिसमें कुछ पुराने नोट भी बच गए थे। लेकिन अपने ही रुपये जमा करवाने के लिए इतनी मशक्कतें करनी पड़ी है। सरकार आए दिन नियमों को बदल रहे हैं। जिससे आम जनता काफी परेशानियां झेल रही हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
बैंक वालों ने नहीं लिए 10 रुपये के सिक्के
गांव मानस वासी धनपत ने बताया कि वह सेंट्रल बैंक में रुपये जमा करवाने के लिए आया था। जिसमें करीब 600 रुपये के 10-10 के सिक्के थे। लेकिन बैंक वालों ने उसके 10 रुपये के सिक्के जमा नहीं किये। जिससे काफी परेशानी हुई।
बैंकों में आने लगे है पांच सौ रुपये के नए नोट
बैंकों में अब पांच सौ रुपये के नोट आने लगे हैं। जिससे अब लोगों को कुछ ही दिनों में राहत मिलने के आसार है। कॉरपोरेशन बैंक में पेंशन लेने वाले लोगों को पांच सौ रुपये के नए नोट दिए गए।
एटीएम में भी मिली पर्याप्त नकदी
शहर के बैंकों में जहां लंच टाइम के बाद ही लोगों की भीड़ कम हो रही हैं। वहीं अब शहर के एटीएम में लोगों की जरूरत के अनुसार नकदी डालने से लोगों को रुपये मिलने लगे हैं। शहर में अधिकतर एटीएम चले। जिससे लोगों को राहत महसूस हुई। शहर में ढांड रोड स्थित आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, करनाल रोड पर एसबीआई, एचडीएफसी, एक्सिस और पीएनबी के एटीएम में पर्याप्त नकदी रही। जिससे लोगों को रुपये मिले।
नोटबंदी के कारण आढ़तियों व मजदूरों को नहीं मिल रहे पैसे, परेशान
धान की खरीद को बंद हुए करीब दो माह से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक खरीद एजेंसियों के द्वारा आढ़तियों को आढ़त, मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गई है। जिससे व्यापारियों व मजदूरों में गहरा रोष है। अनाज मंडी के प्रधान रणधीर सिंह फौजी ने बताया कि उनकी मंडी से हरियाणा वेयर हाऊस तथा हेफेड़ के द्वारा किसानों की धान की खरीद की थी। मंडी में लगभग 50 हजार से अधिक धान इन एजेंसियों के द्वारा खरीद किया गया। जिसकी आढ़त लगभग दस लाख, आई फार्म की मजदूरी लगभग 2 लाख 25 हजार की एजेंसियों के द्वारा नही दी गई। इतना ही नही खरीद करने के बाद, इन खरीद एजेंसियों के द्वारा लदान का कार्य भी आढ़तियों के मजदूरों से करवाया गया। जो लगभग एक लाख बनता है।
मंडी प्रधान रणधीर सिंह फौजी, आढ़ती रामकुमार, मोहन लाल, ईशवर, दिलबाग ने मांग की कि उनको उनकी आढ़त, मजदूरों को मजदूरी लदान सहित शीघ्र दी जाये।
हेफेड के डीएम एमएल पासवान ने बताया कि पैसे आ गये और मनेजरों के पास भेज दिये है। एक दो दिन में आढ़त व मजदूरी जिला में सभी जगह मिल जायेगी। लदान का कार्य जहां आढ़तियों के मजदूरों ने किया वह भी मिल जायेगा। यदि किसी को कोई परेशानी हो तो उनसे संपर्क कर सकते है।