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Kaithal News: धान के अवशेष जलाने पर लगाई रोक
Fri, 12 Sep 2025 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला उपायुक्त प्रीति ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर जिले की सीमा में धान की फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश 15 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे।
डीसी ने बताया कि खरीफ फसलों की कटाई उपरांत कुछ किसान खेतों में बचे अवशेषों को आग लगा देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके कारण आंखों में जलन, त्वचा रोग और सांस की दिक्कतें पैदा होती हैं। कई बार घना धुआं राजमार्गों पर दुर्घटनाओं का कारण भी बनता है। खेतों में चर रहे मवेशी आग की चपेट में आ जाते हैं और चारे की कमी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से भूमि की ऊपरी सतह भी प्रभावित होती है, जिससे सूक्ष्म जीव और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरक क्षमता घटती है। इस कारण जान-माल का नुकसान होने का खतरा भी बना रहता है।
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डीसी ने कहा कि अवहेलना करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम-1981 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी एसडीएम, डीएसपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, बीडीपीओ और कृषि उपनिदेशक को दी गई है।
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कैथल। जिला उपायुक्त प्रीति ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर जिले की सीमा में धान की फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश 15 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे।
डीसी ने बताया कि खरीफ फसलों की कटाई उपरांत कुछ किसान खेतों में बचे अवशेषों को आग लगा देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके कारण आंखों में जलन, त्वचा रोग और सांस की दिक्कतें पैदा होती हैं। कई बार घना धुआं राजमार्गों पर दुर्घटनाओं का कारण भी बनता है। खेतों में चर रहे मवेशी आग की चपेट में आ जाते हैं और चारे की कमी हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से भूमि की ऊपरी सतह भी प्रभावित होती है, जिससे सूक्ष्म जीव और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरक क्षमता घटती है। इस कारण जान-माल का नुकसान होने का खतरा भी बना रहता है।
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डीसी ने कहा कि अवहेलना करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम-1981 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी एसडीएम, डीएसपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, बीडीपीओ और कृषि उपनिदेशक को दी गई है।