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फिर से एवरेस्ट फतेह की जिद
अमर/उजाला/ब्यूरो/कैथल\
Updated Wed, 23 Mar 2016 12:15 AM IST
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पवऱ्र्ववाराोही सीमा
- फोटो : amar ujala
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नेपाल के रास्ते एवरेस्ट फतेह करने का सपना लेकर गई सीमा गोस्वामी का बेशक मौत से सामना हो चुका है। लेकिन उसके हौंसले अभी भी बुलंद हैं। कैथल की इस बेटी ने फिर संकल्प लिया है कि वह एवरेस्ट फतेह करेगी। इसके लिए समाज के लोगों से सहायता का आह्वान किया है।
पिछले साल नेपाल में आए भूकंप के समय सीवन में जन्मी सीमा गोस्वामी अपने एवरेस्ट अभियान पर थीं। उस समय वह बर्फ में दब गई थीं। कई दिनों तक पैदल चलने के बाद वह बेस कैंप तक पहुंची। यह बेस कैंप पूरी तरह से तबाह हो चुका था। सीमा किसी तरह जान बचाकर वापिस सकुशल लौट गई। लेकिन उस समय कई लोग हादसे में मारे गए थे। सीमा ने भी मौत को काफी करीब से देखा था। इसके बावजूद अब वह फिर से एवरेस्ट फतेह करना चाहती है।
नहीं रही थी बचने की आस
सीमा ने कहा कि एक बार तो लगा था कि वे बच ही नहीं पाएंगे। लेकिन शायद भगवान ने उन्हें दोबारा इस अभियान के लिए तैयारी करने के लिए बचा लिया। इस बार भी वह इस अभियान के लिए जाना चाहती हैं। जिसमें काफी धनराशि की आवश्यकता है। पिछली बार 21 लाख रुपये का खर्च आया था। उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 5 लाख रुपये सहित शिक्षा मंत्री ने 2 लाख रुपये की सहायता की थी। इसके अलावा कई लोगों ने सहायता की थी। अब इस अभियान के लिए 14 लाख रुपये की आवश्यकता है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन हो गया है। अप्रैल माह में इस अभियान के लिए जाना है। अप्रैल में 8 अप्रैल से चढ़ाई शुरू होगी। इसके बाद 10 जून तक एवरेस्ट पर चढने की उम्मीद है। सीमा ने कहा कि अभी तक कई लोगों ने आश्वासन दिया है। लेकिन सहायता नहीं मिल पा रही है। जिला प्रशासन सहित समाज के गणमान्य लोगों से अपील है कि इस अभियान में उसकी सहायता करें। उसे विश्वास है कि वह एक दिन एवरेस्ट फतेह जरूर कर लेंगी। सीमा कैथल के ही आईजी कॉलेज से बीए पास है। कॉलेज द्वारा भी सीमा का सम्मान किया गया था।
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पिछले साल नेपाल में आए भूकंप के समय सीवन में जन्मी सीमा गोस्वामी अपने एवरेस्ट अभियान पर थीं। उस समय वह बर्फ में दब गई थीं। कई दिनों तक पैदल चलने के बाद वह बेस कैंप तक पहुंची। यह बेस कैंप पूरी तरह से तबाह हो चुका था। सीमा किसी तरह जान बचाकर वापिस सकुशल लौट गई। लेकिन उस समय कई लोग हादसे में मारे गए थे। सीमा ने भी मौत को काफी करीब से देखा था। इसके बावजूद अब वह फिर से एवरेस्ट फतेह करना चाहती है।
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नहीं रही थी बचने की आस
सीमा ने कहा कि एक बार तो लगा था कि वे बच ही नहीं पाएंगे। लेकिन शायद भगवान ने उन्हें दोबारा इस अभियान के लिए तैयारी करने के लिए बचा लिया। इस बार भी वह इस अभियान के लिए जाना चाहती हैं। जिसमें काफी धनराशि की आवश्यकता है। पिछली बार 21 लाख रुपये का खर्च आया था। उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 5 लाख रुपये सहित शिक्षा मंत्री ने 2 लाख रुपये की सहायता की थी। इसके अलावा कई लोगों ने सहायता की थी। अब इस अभियान के लिए 14 लाख रुपये की आवश्यकता है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन हो गया है। अप्रैल माह में इस अभियान के लिए जाना है। अप्रैल में 8 अप्रैल से चढ़ाई शुरू होगी। इसके बाद 10 जून तक एवरेस्ट पर चढने की उम्मीद है। सीमा ने कहा कि अभी तक कई लोगों ने आश्वासन दिया है। लेकिन सहायता नहीं मिल पा रही है। जिला प्रशासन सहित समाज के गणमान्य लोगों से अपील है कि इस अभियान में उसकी सहायता करें। उसे विश्वास है कि वह एक दिन एवरेस्ट फतेह जरूर कर लेंगी। सीमा कैथल के ही आईजी कॉलेज से बीए पास है। कॉलेज द्वारा भी सीमा का सम्मान किया गया था।
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