फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Auto drivers putting kids life in risk

ऑटो के किराये से कम है जिंदगी की कीमत

Fri, 25 Jul 2014 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Fri, 25 Jul 2014 12:04 AM IST
विज्ञापन
Auto drivers putting kids life in risk
कैथल। स्कूल वाहनों में बच्चे अपनी जिंदगी की कीमत पर स्कूल तक का सफर तय कर रहे हैं। सरकार द्वारा गठित की गई स्कूल सुरक्षा कमेटी की निष्क्रियता के कारण स्कूल वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर ले जाया जा रहा है। अंबाला के साहा में हुए हादसे के बावजूद न तो वाहन चालक और न ही जिला प्रशासन कोई सबक लेता नजर नहीं आ रहा।
विज्ञापन



वर्ष 2012 में जिला उपायुक्त ने अंबाला के शाह में दुर्घटना में मारे गए बच्चों के बाद कुछ समय के लिए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई थी। इसके लिए वाहन चालकों के लिए नियम भी जारी किए गए थे। लेकिन अब फिर से ढाक के तीन पात वाली बात हो चली है। ऑटो, स्कूल बसों सहित अन्य स्कूल वाहनों में सरकार की सख्ती के बाद किराया बढ़ जाने के बाद अभिभावकाें की जेब जरूर ढीली हुई थी, लेकिन वाहनों मेें बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। स्कूल बस तो दूर ऑटो में भी 12 से 15 बच्चे स्कूल तक का सफर तय कर रहे हैं। जबकि इसमें केवल छह से आठ बच्चे ही सवार हो सकते हैं।
विज्ञापन


अगल-बगल बैठाते हैं ऑटो चालक
शहर के मुख्य चौक से सुबह व शाम बड़ी संख्या में बच्चे ऑटो में ठूंस-ठूंस कर भरे होते हैं। कुछ विद्यार्थी ऑटो के पीछे भी लटक कर सफर करते हैं। इन सब हालत को देखकर भी यातायात पुलिस मूकदर्शक बनी हुई नजर आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रशासन ने डाला किराये का बोझ :  अभिभावक
अभिभावकों का कहना है कि जिला प्रशासन ने ऑटो का किराया बढ़ाकर उन पर बोझ डाल दिया है। जबकि ऑटो चालकों पर किसी प्रकार की लगाम नहीं कसी गई है। अभिभावक सुरेन्द्र कुमार, विनय कुमार, कमल गुप्ता, भारत भूषण, रामफल, प्रयाग सैनी, सतीश कुमार, अनिल कुमार, संतोष कुमार, अश्वनी कुमार, पारुल वर्मा, जितेन्द्र कुमार, संजीव कुमार ने बताया कि वर्ष 2012 में अंबाला में शाहा दुर्घटना के बाद अभिभावकों व ऑटो चालकों की बैठक में फैसला लिया गया था कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ऑटो में केवल छह से आठ बच्चे एक समय में ले जा सकते हैं।

 ऐसी स्थिति में ऑटो चालकों ने किराया बढ़ाने की मांग रखी। जिला प्रशासन ने 300 रुपये किराया बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया। लेकिन ऑटो चालकों ने बच्चों की संख्या 12 से 15 रखी। जिस कारण अभिभावकों को किराया बढ़ाने का बोझ डाल दिया गया। लेकिन ऑटो चालकों को किसी प्रकार की सख्ती नहीं की गई है।


स्कूल सुरक्षा कमेटी नींद में
गौरतलब है कि बच्चों की सुरक्षा के ध्यान में रखते हुए एक स्कूल सुरक्षा कमेटी बनाई गई थी। इसके कमेटी के अध्यक्ष खुद डीसी हैं। लेकिन यह कमेटी भी मूकदर्शक बनकर रह गई है। कमेटी की ओर से इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed