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मैनेजर के कहने पर मुंशी ने बेचा था कंपनी का बचा हुआ सीमेंट
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ढांड पुलिस द्वारा नॉट फोर सेल इन रिटेल मार्का के पकड़े गए 101 सीमेंट के कट्टे एनएच-152 डी पर खंभे लगा रही कंपनी के हैं। जिन्हें बच जाने पर कंपनी मैनेजर ने स्थानीय कर्मचारी को बेचने के लिए कहा था। जबकि नियमानुुसार इस सीमेंट को ऐसे बेचा नहीं जा सकता। पुलिस जांच में यह जानकारी सामने आई है।
एसएचओ ढांड जयभगवान ने बताया कि पुलिस ने संदेह के आधार पर एक ट्राली में ले जाया जा रहा सीमेंट पकड़ा था। जिसमें करीब 101 कट्टे अपलोड थे। इन्हें रिटेल में नहीं बेचा जा सकता। इसके बाद अब जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि यह सीमेंट एनएच-152 डी पर बिजली के खंबे लगा रही कंपनी जे आर ट्रांसफार्मर्स प्राइवेट लिमिटिड का है। जिसके लिए कंपनी ने कागज प्रस्तुत किए हैं। इसके बिल सहित पूरी जानकारी दी है। यहां पर करीब तीन हजार कट्टे सीमेंट स्टोर किया गया था। जिसमें से छह सौ कट्टे बच गए। इन कट्टों को कंपनी के मैनेजर ने यहां नियुक्त मुुंशी को बेचने के लिए कह दिया। जिस पर जिस गोदाम में ये कट्टे रखे गए थे, उसी गोदाम के मालिक को ये कट्टे उठवा दिए। जिन्हें वह कहीं ओर ले जा रहा था और पुलिस ने मुखबिर के बाद उसे पकड़ लिया। अब इस मामले में जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। एनएचएआई या एनएचएआई पर पुलिस आदि का निर्माण कर रही एजेंसी का इन सीमेंट के कट्टों से कोई लेना-देना नहीं हैं।
विदित रहे कि इस मार्ग पर बनाए जा रहे पुल का स्लैब गिर जाने के बाद भी फरवरी माह में यह मार्ग चर्चा में आया था। उस समय डीसी द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि उस समय तकनीकी खामी सामने आई थी। स्लैब पुल के पिलर पर रखते समय खिसक गया था। जिस कारण पिलर भी धंस गया था। यह रिपोर्ट डीसी महोदय को भेज दी गई थी। आगे क्या कार्रवाई हुई, उन्हें जानकारी नहीं है।
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एसएचओ ढांड जयभगवान ने बताया कि पुलिस ने संदेह के आधार पर एक ट्राली में ले जाया जा रहा सीमेंट पकड़ा था। जिसमें करीब 101 कट्टे अपलोड थे। इन्हें रिटेल में नहीं बेचा जा सकता। इसके बाद अब जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि यह सीमेंट एनएच-152 डी पर बिजली के खंबे लगा रही कंपनी जे आर ट्रांसफार्मर्स प्राइवेट लिमिटिड का है। जिसके लिए कंपनी ने कागज प्रस्तुत किए हैं। इसके बिल सहित पूरी जानकारी दी है। यहां पर करीब तीन हजार कट्टे सीमेंट स्टोर किया गया था। जिसमें से छह सौ कट्टे बच गए। इन कट्टों को कंपनी के मैनेजर ने यहां नियुक्त मुुंशी को बेचने के लिए कह दिया। जिस पर जिस गोदाम में ये कट्टे रखे गए थे, उसी गोदाम के मालिक को ये कट्टे उठवा दिए। जिन्हें वह कहीं ओर ले जा रहा था और पुलिस ने मुखबिर के बाद उसे पकड़ लिया। अब इस मामले में जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। एनएचएआई या एनएचएआई पर पुलिस आदि का निर्माण कर रही एजेंसी का इन सीमेंट के कट्टों से कोई लेना-देना नहीं हैं।
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विदित रहे कि इस मार्ग पर बनाए जा रहे पुल का स्लैब गिर जाने के बाद भी फरवरी माह में यह मार्ग चर्चा में आया था। उस समय डीसी द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि उस समय तकनीकी खामी सामने आई थी। स्लैब पुल के पिलर पर रखते समय खिसक गया था। जिस कारण पिलर भी धंस गया था। यह रिपोर्ट डीसी महोदय को भेज दी गई थी। आगे क्या कार्रवाई हुई, उन्हें जानकारी नहीं है।
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