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सहायक लेबर कमीशनर को 3 वर्ष की कैद
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Fri, 26 Feb 2016 11:24 PM IST
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पिता की जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में सोनीपत के सहायक लेबर कमिश्नर बलधीर सिंह व सह-आरोपियों को यहां की एक अदालत ने 3 साल की कैद और जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
वर्ष 2006 में कौल निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक अमर सिंह ने ढांड पुलिस थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसके बेटे बलधीर सिंह, सुधीर, उसके साले तेलू राम निवासी लाठरो जिला करनाल व दोहते शैलेंद्र पुत्र मक्खन निवासी बडसालू जिला करनाल ने आपसी आपराधिक साजिश रचकर उसकी करीब 16-17 एकड़ भूमि को हड़पने के लिए फर्जी कागजात तैयार कर लिए। जिसमें शैलेंद्र गवाह बना।
जब पुलिस को शिकायत की गई तो पुलिस ने फोरेंसिक लैब मधुबन से हस्ताक्षरों का मिलान करवाया तो पाया गया कि जिन लोगों को इस सालसी फैसले से लाभ मिलने वाला था, उन्होंने यह फर्जी दस्तावेज तैयार किया। अमर सिंह के पुराने हस्ताक्षर वाले किसी कोरे कागज का दुरुपयोग करते हुए यह फर्जी डाक्यूमेंट तैयार किया। अमर सिंह ने इस दस्तावेज को न्यायालय में चुनौती भी दी हुई है।
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भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 506, 120 बी के तहत इस केस को अदालत में साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 8 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। न्यायिक मजिस्ट्रेट याचना ने सभी गवाहों, तथ्यों, रिकार्ड व एफएसएल की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सभी उक्त व्यक्तियों को दोषी करार देते हुए सभी धाराओं में 3-3 साल की सजा 1000 रुपये जुर्माना तथा धारा 506 के तहत 500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। एडवोकेट सुभाष शर्मा ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमर सिंह की ओर से उन्होंने कोर्ट में पैरवी की और इस फैसले में आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है।
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वर्ष 2006 में कौल निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक अमर सिंह ने ढांड पुलिस थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसके बेटे बलधीर सिंह, सुधीर, उसके साले तेलू राम निवासी लाठरो जिला करनाल व दोहते शैलेंद्र पुत्र मक्खन निवासी बडसालू जिला करनाल ने आपसी आपराधिक साजिश रचकर उसकी करीब 16-17 एकड़ भूमि को हड़पने के लिए फर्जी कागजात तैयार कर लिए। जिसमें शैलेंद्र गवाह बना।
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जब पुलिस को शिकायत की गई तो पुलिस ने फोरेंसिक लैब मधुबन से हस्ताक्षरों का मिलान करवाया तो पाया गया कि जिन लोगों को इस सालसी फैसले से लाभ मिलने वाला था, उन्होंने यह फर्जी दस्तावेज तैयार किया। अमर सिंह के पुराने हस्ताक्षर वाले किसी कोरे कागज का दुरुपयोग करते हुए यह फर्जी डाक्यूमेंट तैयार किया। अमर सिंह ने इस दस्तावेज को न्यायालय में चुनौती भी दी हुई है।
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भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 506, 120 बी के तहत इस केस को अदालत में साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 8 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। न्यायिक मजिस्ट्रेट याचना ने सभी गवाहों, तथ्यों, रिकार्ड व एफएसएल की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सभी उक्त व्यक्तियों को दोषी करार देते हुए सभी धाराओं में 3-3 साल की सजा 1000 रुपये जुर्माना तथा धारा 506 के तहत 500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। एडवोकेट सुभाष शर्मा ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमर सिंह की ओर से उन्होंने कोर्ट में पैरवी की और इस फैसले में आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है।