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Kaithal News: कलाकार प्रदीप की कृतियों से सजीं अयोध्या राम मंदिर की दीवारें
Tue, 30 Dec 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 30 Dec 2025 01:23 AM IST
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अयोध्या मंदिर की दीवारों पर बनाए गए रामायण के प्रसंग। स्वयं
नरेंद्र पंडित
कैथल। कैथल के कलाकार प्रदीप कुमार की कला अयोध्या के श्रीराम मंदिर की दीवारों पर रामायण को सजीव रूप दे रही है। उन्होंने मंदिर के लोअर प्लिंथ (वास्तुशिल्प स्तंभ के आधार का निचला भाग ) पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों को इतनी जीवंत शैली में उकेरा है कि उन्हें देखते ही श्रद्धालुओं के सामने रामायण के दृश्य साकार हो उठते हैं।
ये प्रसंग पहले फाइबर माध्यम से तैयार किए गए और बाद में राजस्थान में पत्थर से तराशकर अंतिम रूप दिया गया। अब ये कलाकृतियां राम मंदिर की भव्यता और गरिमा को और अधिक बढ़ा रही हैं।
इन शिल्पों में भरत द्वारा भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं ग्रहण करने का दृश्य, हनुमानजी द्वारा वाटिका का विध्वंस, चित्रकूट में भरत, श्रीराम और उनकी तीनों माताओं की भावपूर्ण भेंट, निशादराज और भरत की मुलाकात सहित रामायण के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं।
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प्रदीप कुमार का कहना है कि किसी भी महापुरुष या पात्र की मूर्ति बनाने से पहले उसके व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र का गहन अध्ययन आवश्यक होता है, ताकि मूर्ति में भाव और चेतना स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने बताया कि ये सभी प्रसंग उनके द्वारा संचालित जींद स्थित माट आर्ट स्टूडियो में तैयार किए गए, जिन्हें बनाने में लगभग सात माह का समय लगा।
बस स्टैंड पर बैठकर बनाते थे स्कैच ः प्रदीप ने बताया कि उन्हें दूसरी कक्षा से ही ड्राइंग में रुचि थी। एक अध्यापक द्वारा प्रोत्साहित किए जाने के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने राजकीय कॉलेज ऑफ आर्ट, चंडीगढ़ से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में वे रात के समय अक्सर बस स्टैंड पर जाकर सोते हुए और बैठे हुए लोगों के स्कैच बनाते थे। बाद में जब उन्होंने मूर्तिकला में काम शुरू किया तो अपनी कलाकृतियों के चित्र सोशल मीडिया पर साझा किए। वहीं से उनके काम को पहचान मिली और उन्हें अयोध्या में रामदरबार बनाने का अवसर प्राप्त हुआ। संवाद
तीन माह में बनाया रामदरबार
प्रदीप ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया था। उन्हें दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन बुलाया गया। वहां अन्य कलाकारों के साथ उनका चयन किया गया और रामदरबार का स्कैच तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। इस रामदरबार को तैयार करने में उन्हें तीन माह का समय लगा। रामदरबार में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न और हनुमानजी को सम्मिलित किया गया है। इस रामदरबार को अयोध्या मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। मूर्ति निर्माण से पूर्व मंदिर समिति द्वारा दो बार जींद आकर निरीक्षण किया गया। अंतिम स्वीकृति के बाद इसे राजस्थान में पत्थर से तराशा गया।
स्वीडन में बर्फ से बनाई श्रीकृष्ण की मूर्ति
प्रदीप ने बताया कि वर्ष 2019 में वे एक वर्कशॉप के सिलसिले में स्वीडन गए थे, जहां विभिन्न देशों के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने बर्फ से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाई, जिसके लिए भारत को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। वर्तमान में वे अमेरिका के न्यू जर्सी में निर्माणाधीन जैन मंदिर के लिए भी मूर्तियां बना रहे हैं।
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कैथल। कैथल के कलाकार प्रदीप कुमार की कला अयोध्या के श्रीराम मंदिर की दीवारों पर रामायण को सजीव रूप दे रही है। उन्होंने मंदिर के लोअर प्लिंथ (वास्तुशिल्प स्तंभ के आधार का निचला भाग ) पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों को इतनी जीवंत शैली में उकेरा है कि उन्हें देखते ही श्रद्धालुओं के सामने रामायण के दृश्य साकार हो उठते हैं।
ये प्रसंग पहले फाइबर माध्यम से तैयार किए गए और बाद में राजस्थान में पत्थर से तराशकर अंतिम रूप दिया गया। अब ये कलाकृतियां राम मंदिर की भव्यता और गरिमा को और अधिक बढ़ा रही हैं।
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इन शिल्पों में भरत द्वारा भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं ग्रहण करने का दृश्य, हनुमानजी द्वारा वाटिका का विध्वंस, चित्रकूट में भरत, श्रीराम और उनकी तीनों माताओं की भावपूर्ण भेंट, निशादराज और भरत की मुलाकात सहित रामायण के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं।
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प्रदीप कुमार का कहना है कि किसी भी महापुरुष या पात्र की मूर्ति बनाने से पहले उसके व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र का गहन अध्ययन आवश्यक होता है, ताकि मूर्ति में भाव और चेतना स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने बताया कि ये सभी प्रसंग उनके द्वारा संचालित जींद स्थित माट आर्ट स्टूडियो में तैयार किए गए, जिन्हें बनाने में लगभग सात माह का समय लगा।
बस स्टैंड पर बैठकर बनाते थे स्कैच ः प्रदीप ने बताया कि उन्हें दूसरी कक्षा से ही ड्राइंग में रुचि थी। एक अध्यापक द्वारा प्रोत्साहित किए जाने के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने राजकीय कॉलेज ऑफ आर्ट, चंडीगढ़ से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में वे रात के समय अक्सर बस स्टैंड पर जाकर सोते हुए और बैठे हुए लोगों के स्कैच बनाते थे। बाद में जब उन्होंने मूर्तिकला में काम शुरू किया तो अपनी कलाकृतियों के चित्र सोशल मीडिया पर साझा किए। वहीं से उनके काम को पहचान मिली और उन्हें अयोध्या में रामदरबार बनाने का अवसर प्राप्त हुआ। संवाद
तीन माह में बनाया रामदरबार
प्रदीप ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया था। उन्हें दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन बुलाया गया। वहां अन्य कलाकारों के साथ उनका चयन किया गया और रामदरबार का स्कैच तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। इस रामदरबार को तैयार करने में उन्हें तीन माह का समय लगा। रामदरबार में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न और हनुमानजी को सम्मिलित किया गया है। इस रामदरबार को अयोध्या मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। मूर्ति निर्माण से पूर्व मंदिर समिति द्वारा दो बार जींद आकर निरीक्षण किया गया। अंतिम स्वीकृति के बाद इसे राजस्थान में पत्थर से तराशा गया।
स्वीडन में बर्फ से बनाई श्रीकृष्ण की मूर्ति
प्रदीप ने बताया कि वर्ष 2019 में वे एक वर्कशॉप के सिलसिले में स्वीडन गए थे, जहां विभिन्न देशों के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने बर्फ से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाई, जिसके लिए भारत को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। वर्तमान में वे अमेरिका के न्यू जर्सी में निर्माणाधीन जैन मंदिर के लिए भी मूर्तियां बना रहे हैं।

अयोध्या मंदिर की दीवारों पर बनाए गए रामायण के प्रसंग। स्वयं

अयोध्या मंदिर की दीवारों पर बनाए गए रामायण के प्रसंग। स्वयं