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Kaithal News: मंडियों में पीआर धान की आवक बढ़ी, 20 गेटपास काटे गए
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नई अनाजमंडी कैथल में धान की सफाई करते मजूदर। संवाद
कैथल। क्षेत्र में धान की कटाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इसके कारण मंडियों में मोटे यानी पीआर धान की आवक लगातार बढ़ रही है लेकिन अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। शनिवार को मंडियों में किसानों की सुविधा के लिए पीआर धान के 20 गेटपास काटे गए हैं, ताकि आमद को व्यवस्थित किया जा सके। सरकारी खरीद न होने के कारण तौल की रफ्तार बेहद धीमी है। किसानों को मजबूरन अपनी उपज खुले में डालनी पड़ रही है जिससे मंडियों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।
सरकारी नियमों के मुताबिक धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आधिकारिक खरीद 1 अक्तूबर से प्रस्तावित है लेकिन अगेती किस्मों के पक जाने के कारण आवक पहले ही शुरू हो गई है। अकेले शहर की प्रमुख मंडियों में 1509 किस्म का करीब 25 हजार क्विंटल धान पहुंच चुका है।
बादल छाने से बढ़ी किसानों की चिंता
इन दिनों आसमान में बादलों के छाने से किसानों और आढ़तियों को चिंता सता रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में आंशिक बारिश के आसार जताए हैं। यदि इस समय बारिश होती है, तो मंडियों में पड़ा हजारों क्विंटल धान पानी में भीग जाएगा। इससे अनाज में नमी 17 प्रतिशत की तय सीमा से अधिक हो जाएगी।
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खेतों में कंबाइन के पहिए थमने का खतरा
खेतों में मोटे धान की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है। किसान मौसम के डर से जल्द से जल्द कंबाइन लगाकर कटाई पूरी करना चाहते हैं। किसानों का कहना है कि अगर बारिश आ गई, तो गीली जमीन में कंबाइन चलाना नामुमकिन हो जाएगा और फसलों के बिछने से दाना काला पड़ जाएगा। किसान नेता होशियार गिल ने मांग की है कि गेटपास कटने के साथ ही तुरंत प्रभाव से पीआर और अन्य धान की सरकारी तौल और उठान शुरू कराया जाए, ताकि इस दोहरे संकट से बचा जा सके।
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सरकारी नियमों के मुताबिक धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आधिकारिक खरीद 1 अक्तूबर से प्रस्तावित है लेकिन अगेती किस्मों के पक जाने के कारण आवक पहले ही शुरू हो गई है। अकेले शहर की प्रमुख मंडियों में 1509 किस्म का करीब 25 हजार क्विंटल धान पहुंच चुका है।
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बादल छाने से बढ़ी किसानों की चिंता
इन दिनों आसमान में बादलों के छाने से किसानों और आढ़तियों को चिंता सता रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में आंशिक बारिश के आसार जताए हैं। यदि इस समय बारिश होती है, तो मंडियों में पड़ा हजारों क्विंटल धान पानी में भीग जाएगा। इससे अनाज में नमी 17 प्रतिशत की तय सीमा से अधिक हो जाएगी।
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खेतों में कंबाइन के पहिए थमने का खतरा
खेतों में मोटे धान की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है। किसान मौसम के डर से जल्द से जल्द कंबाइन लगाकर कटाई पूरी करना चाहते हैं। किसानों का कहना है कि अगर बारिश आ गई, तो गीली जमीन में कंबाइन चलाना नामुमकिन हो जाएगा और फसलों के बिछने से दाना काला पड़ जाएगा। किसान नेता होशियार गिल ने मांग की है कि गेटपास कटने के साथ ही तुरंत प्रभाव से पीआर और अन्य धान की सरकारी तौल और उठान शुरू कराया जाए, ताकि इस दोहरे संकट से बचा जा सके।

नई अनाजमंडी कैथल में धान की सफाई करते मजूदर। संवाद