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Kaithal: पुरातत्व विभाग ने 206 घरों को भेजे नोटिस, गांव खाली करने के आदेश, एक महिला की चिंता में हुई मौत
Sun, 18 May 2025 05:33 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 18 May 2025 05:33 PM IST
सार
पुरातत्व विभाग की ओर से नोटिस देने के बाद पोलड़ गांव एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। इस गांव को धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में खुदाई को लेकर 206 घरों को घर खाली करने का नोटिस भेजा है।़डिटेल में पढ़ें खबर...
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पोलड़ गांव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से जिले के ऐतिहासिक पोलड़ गांव को खाली करने के नोटिस दिए जाने के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया है। विभाग ने गांव के 206 घरों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। इसी चिंता में गांव निवासी एक आंगनबाड़ी कर्मी महिला की मौत हो गई। मृतक महिला की पहचान गुरमीत कौर के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक शनिवार को जब उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला तब से महिला मानसिक रूप से काफी परेशान थीं। रविवार सुबह महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। गांव में इस घटना को लेकर शोक और रोष का माहौल है।
गांव की आबादी है छह हजार
पोलड गांव को नगर पालिका सीवन में शामिल किया गया था लेकिन बाद में ग्रामीणों के विरोध के बाद गांव को नगरपालिका से हटा दिया था। पोलड़ में करीब दो हजार मतदाता हैं और गांव की आबादी छह हजार के करीब है। पोलड़ गांव में अधिकतर जनसंख्या अनुसूचित जाति से संबंध रखती है।
ग्रामीणों बोले, पूर्वजों की जमीन नहीं छोड़ेंगे
ग्रामीणों का कहना है कि वे भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय यहां बसे थे और तभी से गांव में रह रहे हैं। अब तक गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से तीन बार खुदाई की जा चुकी है, लेकिन कोई ऐतिहासिक अवशेष नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें बेघर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।
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गांव की आबादी है छह हजार
पोलड गांव को नगर पालिका सीवन में शामिल किया गया था लेकिन बाद में ग्रामीणों के विरोध के बाद गांव को नगरपालिका से हटा दिया था। पोलड़ में करीब दो हजार मतदाता हैं और गांव की आबादी छह हजार के करीब है। पोलड़ गांव में अधिकतर जनसंख्या अनुसूचित जाति से संबंध रखती है।
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ग्रामीणों बोले, पूर्वजों की जमीन नहीं छोड़ेंगे
ग्रामीणों का कहना है कि वे भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय यहां बसे थे और तभी से गांव में रह रहे हैं। अब तक गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से तीन बार खुदाई की जा चुकी है, लेकिन कोई ऐतिहासिक अवशेष नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें बेघर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।
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पोलड़ गांव
- फोटो : अमर उजाला
विधायक को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने रविवार को गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि गांव को खाली कराने के आदेशों को रद्द करवाया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने घर किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। यह हमारे पूर्वजों की धरोहर है। हम यहां से हटेंगे नहीं, चाहे कुछ भी हो जाए। विधायक देंवेंद्र ने कहा कि गांव को उजड़ने नहीं देंगे। इस बारे में सीएम नायब सैनी व पुरातत्व विभाग के आला अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
ये है मामला
पुरातत्व विभाग की ओर से नोटिस देने के बाद पोलड़ गांव एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। इस गांव को धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। मान्यता है कि पुलस्त्यमुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। रावण का बचपन इसी स्थान पर बीता। गांव में स्थापित सरस्वती मंदिर और सैकड़ों वर्ष पुराना शिवलिंग इसकी ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं। मंदिर की देखरेख कर रहे महंत देवीदास के अनुसार मंदिर का निर्माण महंत राघवदास ने एक स्वप्न के आधार पर करवाया था।
पोलड़ की जमीन को ऐतिहासिक घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग ने पूर्व में कई बार खुदाई करवाई है। विभाग का कहना है कि यहां अति प्राचीन व दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं, इसलिए संरक्षित किया जाना जरूरी है। कोर्ट में विभाग की याचिका के बाद ही गांव को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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