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बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी एंटी बायोटिक दवाइयां
कैथल
Updated Fri, 11 Apr 2014 11:34 PM IST
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केमिस्टों की दुकान पर मिलने वाली बहुत सी एंटी बायोटिक दवाइयां अब आपको बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिल पाएंगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से 30 अगस्त 2013 को जारी अधिसूचना के एक मार्च 2014 से अमल में आने के बाद कुल 46 दवाइयों को बिना प्रशिक्षित डाक्टर की सलाह के बिकने पर पाबंदी लगा दी गई है।
इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चीका आकर केमिस्ट एसोसिएशन की मीटिंग बुलाई तथा उन्हें एच-1 दवाइयों का पूरा रिकार्ड रखने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग के अंबाला जोन के सीनियर ड्रग कंट्रोल आफिसर रिपिन मेहता ने केमिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें दवा एच-1 श्रेणी में आने वाली सभी 46 दवाइयों के लिए बाकायदा एक रजिस्टर तैयार करना होगा, जिसमें पर्ची लिखने वाले डॉक्टर व मरीज का नाम और पते का रिकार्ड रखने के साथ साथ बेची गई दवा के मिकदार का भी रिकार्ड रखना होगा।
उन्होंने कहा कि यह रजिस्टर दवा बेचने की तारीख से तीन साल तक कभी भी चेक हो सकता है। इसलिए सभी दवा विक्रेता इस रजिस्टर को तीन साल तक संभाल कर रखेंगे।
कुछ हालात में खतरनाक हैं दवाएं : अधिकारी
कैथल के ड्रग कंट्रोल आफिसर राकेश छोक्कर ने कहा कि जिन दवाइयों को एच-1 सूची में शामिल किया गया है, वे कई परिस्थितियों में शरीर के लिए खतरनाक साबित हो जाती हैं। इसलिए इन दवाओं को बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के नहीं दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि इन दवाओं को बिना पर्ची के बेचना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए विक्रेता कोई कोताही न बरतें। चीका केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान महेंद्र सिंह तनेजा ने अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि चीका के केमिस्ट सभी नियमों का पालन करेंगे और इस प्रकार की दवाई का पूरा रिकार्ड अपने पास दर्ज करेंगे। इस अवसर पर डाक्टर हंस राज, डाक्टर देशराज, नवीन राजपाल, संजीव गर्ग, नरेंद्र गर्ग, सुरेंद्र बंसल, शिव कुमार, सुरेश कुमार सहित कैथल, पूंडरी, कलायत, ढांड, सीवन, कांगथली और भागल एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
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इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चीका आकर केमिस्ट एसोसिएशन की मीटिंग बुलाई तथा उन्हें एच-1 दवाइयों का पूरा रिकार्ड रखने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग के अंबाला जोन के सीनियर ड्रग कंट्रोल आफिसर रिपिन मेहता ने केमिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें दवा एच-1 श्रेणी में आने वाली सभी 46 दवाइयों के लिए बाकायदा एक रजिस्टर तैयार करना होगा, जिसमें पर्ची लिखने वाले डॉक्टर व मरीज का नाम और पते का रिकार्ड रखने के साथ साथ बेची गई दवा के मिकदार का भी रिकार्ड रखना होगा।
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उन्होंने कहा कि यह रजिस्टर दवा बेचने की तारीख से तीन साल तक कभी भी चेक हो सकता है। इसलिए सभी दवा विक्रेता इस रजिस्टर को तीन साल तक संभाल कर रखेंगे।
कुछ हालात में खतरनाक हैं दवाएं : अधिकारी
कैथल के ड्रग कंट्रोल आफिसर राकेश छोक्कर ने कहा कि जिन दवाइयों को एच-1 सूची में शामिल किया गया है, वे कई परिस्थितियों में शरीर के लिए खतरनाक साबित हो जाती हैं। इसलिए इन दवाओं को बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के नहीं दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि इन दवाओं को बिना पर्ची के बेचना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए विक्रेता कोई कोताही न बरतें। चीका केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान महेंद्र सिंह तनेजा ने अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि चीका के केमिस्ट सभी नियमों का पालन करेंगे और इस प्रकार की दवाई का पूरा रिकार्ड अपने पास दर्ज करेंगे। इस अवसर पर डाक्टर हंस राज, डाक्टर देशराज, नवीन राजपाल, संजीव गर्ग, नरेंद्र गर्ग, सुरेंद्र बंसल, शिव कुमार, सुरेश कुमार सहित कैथल, पूंडरी, कलायत, ढांड, सीवन, कांगथली और भागल एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।