{"_id":"6a1dc83b00c8a0e07301fc4c","slug":"all-31-posts-of-doctors-are-vacant-at-one-chc-and-12-phcs-kaithal-news-c-245-1-kht1009-150178-2026-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: एक सीएचसी और 12 पीएचसी पर चिकित्सकों के सभी 31 पद खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: एक सीएचसी और 12 पीएचसी पर चिकित्सकों के सभी 31 पद खाली
Mon, 01 Jun 2026 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:28 PM IST
विज्ञापन
कैथल के जिला नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। जिले में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कौल में चिकित्सकों के सात और हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी कुल 22 पर चिकित्सकों के दो-दो पद स्वीकृत हैं। इनमें एक सीएचसी और 12 पीएचसी ऐसी हैं जिनमें एक भी चिकित्सक नहीं है।
वहीं गांव कौल में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के सभी सात पद खाली हैं। ये स्थिति सिर्फ इन 13 स्वास्थ्य केंद्रों की नहीं बल्कि पूरे जिले की है। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के 149 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 77 पद खाली पड़े हैं। जो 72 पद भरे हुए हैं, उनमें से भी 14 चिकित्सक या तो स्थायी तौर पर छुट्टी पर हैं या फिर वे ज्वाइनिंग के बाद अस्पताल ही नहीं आए।
नियमानुसार 30 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होता है। ऐसे में जिले में 4 लाख से ज्यादा की आबादी पर एक भी चिकित्सक नहीं है। इस कारण यहां रहने वाले लोगों को बाहर निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन 12 पीएचसी पर नहीं एक भी चिकित्सक
गांव भागल, अरनौली, अगौंध, खरकां, बात्ता, बालू, बढ़सीकरी, किठाना, जाखौली, फरल, ढांड और रसीना में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी चिकित्सक नहीं है।
ओपीडी दोगुनी हुई, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी
जिले में करीब 5 से 6 वर्ष पहले तक ओपीडी में करीब 800 मरीज रोजाना आते थे लेकिन अब यह बढ़कर करीब दोगुनी 1500 से 1600 हो चुकी है। इस समय अस्पताल में वर्तमान में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों के मुकाबले करीब दोगुने कर्मियोें की जरूरत है। चिकित्सक ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के हर विभाग का यही हाल है।
पहले के मुकाबले पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर डॉक्टरों की मांग से अवगत करवाया जाता है, ताकि चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जा सके।
- डाॅ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
विज्ञापन
वहीं गांव कौल में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के सभी सात पद खाली हैं। ये स्थिति सिर्फ इन 13 स्वास्थ्य केंद्रों की नहीं बल्कि पूरे जिले की है। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के 149 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 77 पद खाली पड़े हैं। जो 72 पद भरे हुए हैं, उनमें से भी 14 चिकित्सक या तो स्थायी तौर पर छुट्टी पर हैं या फिर वे ज्वाइनिंग के बाद अस्पताल ही नहीं आए।
विज्ञापन
नियमानुसार 30 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होता है। ऐसे में जिले में 4 लाख से ज्यादा की आबादी पर एक भी चिकित्सक नहीं है। इस कारण यहां रहने वाले लोगों को बाहर निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन 12 पीएचसी पर नहीं एक भी चिकित्सक
गांव भागल, अरनौली, अगौंध, खरकां, बात्ता, बालू, बढ़सीकरी, किठाना, जाखौली, फरल, ढांड और रसीना में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी चिकित्सक नहीं है।
ओपीडी दोगुनी हुई, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी
जिले में करीब 5 से 6 वर्ष पहले तक ओपीडी में करीब 800 मरीज रोजाना आते थे लेकिन अब यह बढ़कर करीब दोगुनी 1500 से 1600 हो चुकी है। इस समय अस्पताल में वर्तमान में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों के मुकाबले करीब दोगुने कर्मियोें की जरूरत है। चिकित्सक ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के हर विभाग का यही हाल है।
पहले के मुकाबले पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर डॉक्टरों की मांग से अवगत करवाया जाता है, ताकि चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जा सके।
- डाॅ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

कैथल के जिला नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद