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Kaithal News: बारिश के बाद उमस गर्मी से हाल बेहाल
Fri, 04 Jul 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 04 Jul 2025 12:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मानसून ने प्रदेश और जिले में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी तीन से चार दिनों तक बारिश की पूरी संभावना बनी हुई है। बारिश की उम्मीद में किसानों ने खेतों में धान की रोपाई का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
हालांकि, बुधवार को कैथल शहर में बारिश के बाद दूसरे दिन भी उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मंगलवार रात राजौंद क्षेत्र में हल्की बारिश हुई। इसके बाद बुधवार को सौंगल, माजरा, हरसौला, प्यौदा, सिसला सहित कई गांवों में धान की रोपाई जोरों से की गई। किसान सुदामा और सूरज ने बताया कि खेतों में धान की पौध पहले से तैयार थी और जुताई के बाद रोपाई के लिए खेत भी पूरी तरह तैयार थे। लेकिन महंगे डीजल के कारण पंप से सिंचाई करना मुश्किल हो रहा था, इसलिए सभी किसान बारिश का इंतजार कर रहे थे।
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बारिश होते ही किसान अपने परिवार और मजदूरों के साथ धान की रोपाई में जुट गए। मजदूर रामखेलावन, देवराज यादव, नंद गोपाल और रामपाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से काम नहीं मिल रहा था। अब जुलाई भर रोजगार मिल जाएगा। बारिश से मौसम में हल्की ठंडक आने से खेतों में काम करना भी आसान हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि 1 से 10 जुलाई तक धान की रोपाई का सबसे अच्छा समय होता है। हालांकि, 15 जुलाई तक रोपाई की जा सकती है।
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कैथल। मानसून ने प्रदेश और जिले में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी तीन से चार दिनों तक बारिश की पूरी संभावना बनी हुई है। बारिश की उम्मीद में किसानों ने खेतों में धान की रोपाई का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
हालांकि, बुधवार को कैथल शहर में बारिश के बाद दूसरे दिन भी उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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मंगलवार रात राजौंद क्षेत्र में हल्की बारिश हुई। इसके बाद बुधवार को सौंगल, माजरा, हरसौला, प्यौदा, सिसला सहित कई गांवों में धान की रोपाई जोरों से की गई। किसान सुदामा और सूरज ने बताया कि खेतों में धान की पौध पहले से तैयार थी और जुताई के बाद रोपाई के लिए खेत भी पूरी तरह तैयार थे। लेकिन महंगे डीजल के कारण पंप से सिंचाई करना मुश्किल हो रहा था, इसलिए सभी किसान बारिश का इंतजार कर रहे थे।
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बारिश होते ही किसान अपने परिवार और मजदूरों के साथ धान की रोपाई में जुट गए। मजदूर रामखेलावन, देवराज यादव, नंद गोपाल और रामपाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से काम नहीं मिल रहा था। अब जुलाई भर रोजगार मिल जाएगा। बारिश से मौसम में हल्की ठंडक आने से खेतों में काम करना भी आसान हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि 1 से 10 जुलाई तक धान की रोपाई का सबसे अच्छा समय होता है। हालांकि, 15 जुलाई तक रोपाई की जा सकती है।