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डीएपी के विकल्प के तौर पर दूसरी खाद का प्रयोग कर सकते हैं किसान
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डीएपी खाद गेहूं की 25 अक्तूबर के बाद शुरू होने वाली बिजाई के समय आवश्यक मात्रा में उपलब्ध रहेगी। यूरिया अभी आवश्यक मात्रा में उपलब्ध है। यह जानकारी कृषि उपनिदेशक डा. कर्मचंद ने दी। वहीं कृषि विभाग ने डीएपी खाद की जगह दूसरी खाद विकल्प के तौर पर प्रयोग करने की सलाह दी है, जो डीएपी की तुलना में सस्ता भी है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिला कैथल में अभी यूरिया भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए किसानों को इसके लिए चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों की खाद की गुणवत्ता एवं निगरानी हेतु ड्यूटियां लगाई हुई हैं। रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं हैं, जिसकी अगेती किस्मों की बिजाई 25 अक्तूबर से शुरू होकर नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह तक चलती है। बिजाई के समय दिन और रात का औसत तापमान 22 डिग्री सेल्सियस होना उत्तम होता है, जो गेहूं के जमाव के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
उपनिदेशक ने बताया कि गेहूं की बिजाई के लिए किसान डीएपी खाद का इस्तेमाल करते हैं जोकि फास्फोरस तत्व का मुख्य श्रोत है। डीएपी खाद की समय पर आपूर्ति के लिए सरकार द्वारा निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आगामी कुछ ही दिनों में बाजार में इस खाद की कोई कमी नहीं रहेगी। वैसे तो डीएपी खाद के विकल्प के तौर एसएसपी 16 प्रतिशत खाद के इस्तेमाल से सल्फर तत्व अतिरिक्त तौर पर फसल को प्राप्त होता है, जिससे पौधे की जड़ें एवं ताना मजबूत होने के साथ-साथ दाने भी स्वस्थ होंगे तथा पैदावार में भी वृद्धि होगी। एनपीके 12:32:16 के इस्तेमाल से फास्फोरस तथा पोटाश तत्वों की पूर्ति होगी, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसलों की बिजाई के लिए वैकल्पिक खादों का इस्तेमाल करके अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिला कैथल में अभी यूरिया भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए किसानों को इसके लिए चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों की खाद की गुणवत्ता एवं निगरानी हेतु ड्यूटियां लगाई हुई हैं। रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं हैं, जिसकी अगेती किस्मों की बिजाई 25 अक्तूबर से शुरू होकर नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह तक चलती है। बिजाई के समय दिन और रात का औसत तापमान 22 डिग्री सेल्सियस होना उत्तम होता है, जो गेहूं के जमाव के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
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उपनिदेशक ने बताया कि गेहूं की बिजाई के लिए किसान डीएपी खाद का इस्तेमाल करते हैं जोकि फास्फोरस तत्व का मुख्य श्रोत है। डीएपी खाद की समय पर आपूर्ति के लिए सरकार द्वारा निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आगामी कुछ ही दिनों में बाजार में इस खाद की कोई कमी नहीं रहेगी। वैसे तो डीएपी खाद के विकल्प के तौर एसएसपी 16 प्रतिशत खाद के इस्तेमाल से सल्फर तत्व अतिरिक्त तौर पर फसल को प्राप्त होता है, जिससे पौधे की जड़ें एवं ताना मजबूत होने के साथ-साथ दाने भी स्वस्थ होंगे तथा पैदावार में भी वृद्धि होगी। एनपीके 12:32:16 के इस्तेमाल से फास्फोरस तथा पोटाश तत्वों की पूर्ति होगी, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसलों की बिजाई के लिए वैकल्पिक खादों का इस्तेमाल करके अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
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